बंगाल में 90 लाख लोगों को मिलेगा वोटिंग का हक? वोटर लिस्ट फ्रीज मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 13 को महा-सुनवाई

Supreme Court Bengal Voter List Hearing West Bengal Elections 2026
Supreme Court Bengal Voter List Hearing: सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा. 90 लाख लोगों के नाम कटने के दावों के बीच यह फैसला बंगाल चुनाव की दिशा बदल सकता है.
Supreme Court Bengal Voter List Hearing: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान (23 अप्रैल) से ठीक पहले एक बड़ी कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयी है. निर्वाचन आयोग (ECI) के द्वारा मतदाता सूची (Voter List) को ‘फ्रीज’ करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अब देश की सर्वोच्च अदालत 13 अप्रैल को सुनवाई करेगी. इस सुनवाई का सीधा असर उन लाखों लोगों पर पड़ेगा, जिनके नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से हटा दिये गये थे.
क्या है वोटर लिस्ट फ्रीज होने का मतलब?
निर्वाचन आयोग ने 9 अप्रैल को उन विधानसभा सीटों के लिए मतदाता सूची को अंतिम रूप (Freeze) दे दिया है, जहां पहले चरण में मतदान होना है. इसका तकनीकी अर्थ यह है कि अब इस सूची में कोई नया नाम नहीं जोड़ा जा सकता. जिन लोगों के नाम हटाये गये हैं और जिनकी अपीलें अभी लंबित हैं, वे मौजूदा चुनाव में अपने मताधिकार से वंचित रह सकते हैं.
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सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस- वोट देने का अधिकार स्थायी
शुक्रवार को प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ के सामने वकील ने दलील दी कि जब हजारों अपीलें अभी अदालतों और न्यायाधिकरणों में लंबित हैं, तो आयोग सूची को फ्रीज कैसे कर सकता है?
न्यायमूर्ति बागची की टिप्पणी : सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि चुनाव के संदर्भ में एक कट-ऑफ तारीख होती है, लेकिन इसके पीछे भविष्य के चुनावों में वोट देने का संवैधानिक अधिकार है, जो कहीं अधिक महत्वपूर्ण और स्थायी है.
चुनाव आयोग का तर्क : आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने कहा कि 9 अप्रैल की तारीख निकल चुकी है और अब किसी नये व्यक्ति को शामिल करना संभव नहीं है. हालांकि, CJI ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को स्थायी रूप से वंचित नहीं किया जा रहा है.
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60 लाख दावों का निपटारा, 19 ट्रिब्यूनल्स पर नजर
कोर्ट ने पहले ही बताया था कि पश्चिम बंगाल में जारी SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाये गये लोगों के लगभग 60 लाख दावों और आपत्तियों का निपटारा किया जा चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक तीन सदस्यीय विशेष पैनल गठित करने का निर्देश दिया है, जो 19 न्यायाधिकरणों (Tribunals) के लिए एक समान प्रक्रिया तय करेगा, ताकि अपीलों का फैसला निष्पक्ष तरीके से हो सके.
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ममता बनर्जी ने किया है बड़ा दावा
ममता बनर्जी पहले ही दावा कर चुकी हैं कि बंगाल में 90 लाख नाम काटे गये हैं, जिनमें से 60 लाख हिंदू और 30 लाख मुसलमान हैं. अब 13 अप्रैल की सुनवाई यह तय करेगी कि इन लोगों को 23 और 29 अप्रैल को होने वाले चुनाव में वोट डालने का मौका मिलेगा या नहीं.
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By Mithilesh Jha
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