वोटर लिस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का आधी रात वाला अल्टीमेटम, आज ही होगा 60 लाख दावों पर फैसला

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Sc Order West Bengal Voter List ‍Bengal Elections 2026

SC Order West Bengal Voter List: सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में 60 लाख मतदाता दावों के निस्तारण के लिए आज रात तक का समय दिया है. मालदा में तनाव के बीच 8 लाख केस सुलझे. चुनाव आयोग को मिली कड़ी हिदायत. सुप्रीम कोर्ट में आज क्या-क्या हुआ, डिटेल यहां पढ़ें.

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SC Order West Bengal Voter List: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची पर जारी महासंग्राम अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक सुनवाई के दौरान साफ कर दिया कि मतदाता सूची से बाहर किये गये करीब 60 लाख लोगों के दावों और आपत्तियों का निस्तारण आज (सोमवार) ही करना होगा. कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह भी स्पष्ट कर दिया कि बंगाल के मौजूदा हालात को देखते हुए केंद्रीय बलों (Central Forces) को वापस नहीं बुलाया जायेगा.

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जजों ने 59.15 लाख मामलों का किया निपटारा

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पत्र का हवाला देते हुए न्यायिक अधिकारियों की पीठ थपथपायी. 6 अप्रैल की दोपहर तक लगभग 60 लाख मामलों में से 59.15 लाख से अधिक दावों का निस्तारण किया जा चुका था. चुनाव आयोग के वकील डीएस नायडू ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि शेष दावों पर आज ही फैसला लेकर सोमवार रात तक पूरक निर्वाचक सूची (Supplementary List) प्रकाशित कर दी जायेगी.

मालदा में जजो को बंधक बनाये जाने के बीच 8 लाख केस सुलझे

कोर्ट ने विशेष रूप से मालदा जिले का जिक्र किया, जहां न्यायिक अधिकारियों को घेराव और धमकियों का सामना करना पड़ा था. इसके बावजूद वहां लगभग 8 लाख मामलों का निपटारा कर दिया गया है. कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि सरकारी तंत्र जजों और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहता है, तो सुप्रीम कोर्ट कड़े कदम उठायेगा.

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ममता बनर्जी के वकील की दलील और कोर्ट का नया निर्देश

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने दलील दी कि नाम हटाने के खिलाफ गठित 19 अपीलीय अधिकरण (Tribunals) अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हुए हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पूर्व जजों की एक कमेटी बनायेंगे, जो अधिकरणों के लिए समान प्रक्रिया तय करेगी. कमेटी को मंगलवार तक गाइडलाइंस फाइनल करनी होगी. इन ट्रिब्यूनल्स को मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के कारणों की गहन जांच करने का पूरा अधिकार होगा.

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जस्टिस जॉयमाल्या बागची की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने चुनाव आयोग को याद दिलाया कि उसकी भूमिका चुनावी भागीदारी को सीमित करने की बजाय उसे बढ़ाना है. कोर्ट ने डिजिटल हस्ताक्षर अपलोड करने के लिए 7 अप्रैल तक का समय तय किया है.

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