‘ट्रायंगुलर सिक्योरिटी ग्रिड’ से मजबूत होगी ‘चिकेन नेक’ की सुरक्षा, सिलीगुड़ी में बोले अमित शाह
सिलीगुड़ी में ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा पर हाई लेवल मीटिंग में अमित शाह, शुभेंदु अधिकारी व अन्य.
Siliguri Corridor Security: सिलीगुड़ी में गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस के साथ समीक्षा बैठक की. ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा के लिए चोपड़ा, किशनगंज और धुबरी को जोड़कर बना ट्रायंगुलर सिक्यूरिटी ग्रिड.
Siliguri Corridor Security: देश की सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील ‘चिकन नेक’ के नाम से मशहूर सिलीगुड़ी कॉरिडोर (Siliguri Corridor) की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक सुरक्षा चक्र तैयार किया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर मंथन के लिए शनिवार को पश्चिम बंगाल और केंद्रीय बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक में देश की पूर्वी सीमाओं पर सुरक्षा का जायजा लिया गया और मुख्य रूप से सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.
क्या है ‘ट्रायंगुलर सिक्यूरिटी ग्रिड’ का सुरक्षा मॉडल?
- 3 सैन्य बेस का तालमेल : पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ने वाले इस बेहद संकरे भू-भाग की सुरक्षा के लिए 3 प्रमुख ठिकानों - चोपड़ा (पश्चिम बंगाल), किशनगंज (बिहार) और धुबरी (असम) को जोड़कर एक त्रिकोणीय सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है.
- त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था : केंद्रीय बलों (बीएसएफ और एसएसबी), खुफिया एजेंसियों, पश्चिम बंगाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच रीयल-टाइम समन्वय स्थापित किया जा रहा है.
- नियमित युद्ध अभ्यास : इस क्षेत्र में सेना और सुरक्षा बलों द्वारा ‘तीस्ता प्रहार’ जैसे विशेष सैन्य अभ्यास चलाकर तैयारियों को लगातार परखा जा रहा है.
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सुकना में अमित शाह ने की हाई लेवल मीटिंग
अधिकारियों ने बताया कि अमित शाह ने अपने 3 दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे के अंतिम दिन सुकना में राज्य प्रशासन, केंद्रीय सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ हाई लेवल समीक्षा बैठक की. बैठक का मुख्य मकसद सीमा पर निगरानी बढ़ाना, केंद्रीय सुरक्षा बलों, खुफिया एजेंसियों और राज्य पुलिस व प्रशासन के बीच तालमेल बेहतर करना तथा ‘ट्रायंगुलर सिक्यूरिटी ग्रिड’ बनाने के लिए एक रूपरेखा तैयार करना था.
बीएसएफ और एसएसबी के अधिकारी भी बैठक में हुए शामिल
गृह मंत्री शाह के पश्चिम बंगाल के दौरे के तीसरे और आखिरी दिन सिलीगुड़ी के पास सुकना में हुई अहम चर्चा में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया. बैठक इसलिए भी अहम थी, क्योंकि सिलीगुड़ी नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास है और यहां से गुजरने वाला संकरा कॉरिडोर पूर्वोत्तर और देश के बाकी हिस्सों के बीच जमीन के रास्ते मुख्य संपर्क का काम करता है.
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रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है ‘चिकन नेक’?
- अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का संगम : सिलीगुड़ी कॉरिडोर नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से घिरा है.
- पूर्वोत्तर की जीवन रेखा : यह संकरा गलियारा भारत के पूर्वोत्तर की सात बहनों (Seven Sisters) को मुख्य भूमि से जोड़ने वाला इकलौता जमीनी मार्ग है.
- अवैध घुसपैठ और तस्करी पर रोक : खुली सीमाओं के कारण होने वाली अवैध घुसपैठ, मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी को रोकने के लिए इस क्षेत्र की कड़ी किलेबंदी अनिवार्य मानी जा रही है.
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