अमित शाह ने अदालत को बताया, दंगे वाली सुबह विधानसभा और बाद में अस्पताल में थीं कोडनानी

Updated at : 18 Sep 2017 4:21 PM (IST)
विज्ञापन
अमित शाह ने अदालत को बताया, दंगे वाली सुबह विधानसभा और बाद में अस्पताल में थीं कोडनानी

अहमदाबाद : भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को विशेष एसआईटी अदालत को बताया कि 28 फरवरी, 2002 को नरौदा गाम में हुए दंगे की सुबह वह गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी से प्रदेश विधानसभा और बाद में अस्पताल में भी मिले थे. दंगा मामलों में आरोपी कोडनानी के अनुरोध पर शाह बचाव पक्ष […]

विज्ञापन

अहमदाबाद : भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को विशेष एसआईटी अदालत को बताया कि 28 फरवरी, 2002 को नरौदा गाम में हुए दंगे की सुबह वह गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी से प्रदेश विधानसभा और बाद में अस्पताल में भी मिले थे. दंगा मामलों में आरोपी कोडनानी के अनुरोध पर शाह बचाव पक्ष के गवाह के रूप में सोमवार को अदालत में उपस्थित हुए. कोडनानी पर हत्या और दंगा करवाने सहित विभिन्न आरोपों में मुकदमा चल रहा है.

शाह ने न्यायाधीश पी. बी. देसाई की अदालत को बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि सदर अस्पताल से पुलिस द्वारा सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद माया कोडनानी कहां गयीं. पुलिस उन्हें और माया कोडनानी को सुरक्षित स्थान पर ले गयी थी, क्योंकि गुस्साई भीड़ ने उन्हें अस्पताल में घेर लिया था.

गोधरा ट्रेन अग्निकांड के एक दिन बाद 28 फरवरी, 2002 को नरौदा गाम में 11 मुसलमानों की हत्या कर दी गयी थी. इस मामले में कुल 82 लोगों के खिलाफ सुनवाई हो रही है. वर्ष 2002 में शाह और कोडनानी दोनों ही भाजपा विधायक थे. कोडनानी ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह शाह को बचाव पक्ष के गवाह के रूप में समन करें ताकि उनके इस बयान की पुष्टि हो सके कि वह दंगे वाले दिन पहले विधानसभा और बाद में सोला सदर अस्पताल में थीं और नरौदा गाम में मौजूद नहीं थीं.

शाह ने अदालत से कहा कि 28 फरवरी, 2002 को वह विधानसभा सत्र में भाग लेने के लिए वहां गये थे. सत्र सुबह साढ़े आठ बजे शुरू हुआ था और कोडनानी सदन में थीं. उन्होंने कहा कि विधानसभा में साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बे एस-6 को जलाने की घटना की कठोरतम शब्दों में निंदा की गयी थी. एक दिन पहले हुयी इस घटना में 59 कारसेवक जल कर मर गये थे.

शाह ने कहा कि यह सूचना मिलने पर कि कारसेवकों के शव अस्पताल लाये गये हैं वह सोला सदर अस्पताल गये. शवों की अटॉप्सी वहीं हुई. शाह ने अदालत को बताया, चूंकि सोला सदर अस्पताल मेरे विधानसभा क्षेत्र में आता है, मैं सुबह साढ़े नौ से पौने दस बजे के बीच वहां पहुंचा. उन्होंने कहा, माया कोडनानी हमसे सोला सदर अस्पताल में मिलीं. शाह ने कहा कि भीड़ कारसेवकों की हत्या से गुस्से में थी और उन्होंने अस्पताल को घेर लिया था.

उन्होंने कहा, पुलिस मायाबेन को अस्पताल से बाहर सुरक्षित निकाल रही थी, जब सवा ग्यारह से साढ़े ग्यारह के बीच मैंने पहली बार उन्हें देखा. शाह ने कहा, उन्होंने मायाबेन के साथ ही मुझे भी अपने वाहन में कुछ दूर तक सुरक्षित बाहर छोड़ा, और मुझे गोटा क्रॉस रोड पर छोड़ा लेकिन वह अभी भी वाहन (जीप) में थीं.

उन्होंने कहा, उसके बाद मैं अपने घर चला गया और मुझे नहीं मालूम कि वह कहां गयी. कोडनानी को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में 2007 में कनिष्ठ मंत्री बनाया गया था. उच्चतम न्यायालय ने तीन सप्ताह पहले विशेष एसआईटी अदालत से कहा कि वह मामले की सुनवाई चार महीने के भीतर पूरी करे.

तत्कालीन प्रधान न्यायमूर्ति जे. एस. खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने निचली अदालत से कहा कि वह दो महीने के भीतर गवाहों का बयान दर्ज करने का काम पूरा करे. नरौदा गाम मामला 2002 में हुए नौ बड़े सांप्रदायिक दंगों के मामलों में से एक है जिनकी जांच उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल ने की है. कोडनानी को नरौदा पाटिया दंगा मामले में दोषी करार देते हुए 28 साल कैद की सजा सुनायी गयी है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola