80 महीने बाद ISRO को लगा झटका, नौवहन उपग्रह IRNSS-1H का प्रक्षेपण विफल

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80 महीने बाद ISRO को लगा झटका, नौवहन उपग्रह IRNSS-1H का प्रक्षेपण विफल

बेंगलुरु : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) को गुरुवारको उस समय विफलता हाथ लगी, जब नौवहन उपग्रह IRNSS-1H का प्रक्षेपण विफल हो गया. IRNSS-1H नौवहन उपग्रह को IRNSS-1A की जगह लेना था. जिसकी तीन रुबीडियम परमाणु घडियों (एटॉमिक क्लॉक) ने काम करना बंद कर दिया था. IRNSS-1A ‘नाविक’ शृंखला के सात उपग्रहों में शामिल था. […]

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बेंगलुरु : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) को गुरुवारको उस समय विफलता हाथ लगी, जब नौवहन उपग्रह IRNSS-1H का प्रक्षेपण विफल हो गया. IRNSS-1H नौवहन उपग्रह को IRNSS-1A की जगह लेना था. जिसकी तीन रुबीडियम परमाणु घडियों (एटॉमिक क्लॉक) ने काम करना बंद कर दिया था. IRNSS-1A ‘नाविक’ शृंखला के सात उपग्रहों में शामिल था. इससे पहले इसरो ने 25 दिसंबर 2010को GSLV-F06 का प्रक्षेपण किया था जो स्टेज-1 में ही असफल हो गया था.

विफलता के बाद इसरो प्रमुख किरण कुमार ने कहा कि भारत के नौवहन उपग्रह को प्रक्षेपित करने का अंतरिक्ष मिशन विफल हो गया. इसरो प्रमुख ने कहा, हमारे मिशन में समस्या आ गयी. हम विस्तृत विश्लेषण करेंगे. IRNSS-1H को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉंच पैड से शाम सात बजे प्रक्षेपण किया गया था. 1,400 किलोग्राम से ज्यादा वजन के IRNSS-1H का निर्माण इसरो के साथ मिलकर छह छोटी-मझौली कंपनियों ने किया था. भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (IRNSS) एक स्वतंत्र क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली है, जिसे भारत ने अमेरिका के जीपीएस की तर्ज पर विकसित किया है.

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