अब खतना के खात्मे के खिलाफ मुस्लिम महिलाआें ने आवाज की बुलंद, पीएम मोदी को खुला खत

Updated at : 23 Aug 2017 10:09 PM (IST)
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अब खतना के खात्मे के खिलाफ मुस्लिम महिलाआें ने आवाज की बुलंद, पीएम मोदी को खुला खत

नयी दिल्लीः मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक की कुप्रथा को सुप्रीम कोर्ट की आेर से गैर-काूननी करार दिये जाने के ठीक एक दिन बाद अब मुस्लिम महिलाआें ने खतना के खात्मे के खिलाफ आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है. तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोहरा मुस्लिम समुदाय की मासूमा रानाल्वी […]

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नयी दिल्लीः मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक की कुप्रथा को सुप्रीम कोर्ट की आेर से गैर-काूननी करार दिये जाने के ठीक एक दिन बाद अब मुस्लिम महिलाआें ने खतना के खात्मे के खिलाफ आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है. तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोहरा मुस्लिम समुदाय की मासूमा रानाल्वी ने पीएम के नाम एक खुला ख़त लिखकर इस कुप्रथा को खत्म करने की मांग की है.

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मुस्लिम महिलाओं में खतना एक ऐसी कुप्रथा है, जिसका उद्देश्य महिलाओं की यौन आजादी पर पाबंदी लगाना है. खतना के नाम पर महिलाओं आैर बच्चियों के साथ होने वाली इस कुरीति के बाद महिलाओं में जननांग विकृति से हर साल बहुत सी महिलाओं और बच्चियों की मौत हो जाती है. खतना को समाप्त करने को लेकर पीएम मोदी नाम अपने पत्र में लिखा है कि आजादी वाले दिन आपने जब मुस्लिम महिलाओं के दर्द और दुखों का जिक्र लालकिले के प्राचीर से किया था, तो उसे देख सुनकर काफी अच्छा लगा.

खतना के खात्मे के बिना मुस्लिम महिलाआें को नहीं मिल सकेगी आजादी

उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि हम मुस्लिम औरतों को तब तक पूरी आजादी नहीं मिल सकती, जब तक हमारा बलात्कार होता रहेगा. हमें संस्कृति, परंपरा और धर्म के नाम पर प्रताड़ित किया जाता रहेगा. तीन तलाक एक गुनाह है, लेकिन इस देश की औरतों की सिर्फ यही एक समस्या नहीं है. मैं आपको औरतों के साथ होने वाले खतने के बारे में बताना चाहती हूं, जो छोटी बच्चियों के साथ किया जाता है. बोहरा समुदाय में सालों से ‘ख़तना’ या ‘ख़फ्ज़’ प्रथा का पालन किया जा रहा है.

सात साल की उम्र में ही मुस्लिम बच्चियों का करा दिया जाता है खतना

पीएम को लिखे खत में उन्होंने लिखा है कि मेरे समुदाय में जैसे ही कोई बच्ची 7 साल की हो जाती है, तो उसकी मां या दादी मां उसे एक दाई या लोकल डॉक्टर के पास ले जाती हैं, जहां उसके प्राइवेट पार्ट को काट दिया जाता है, जो कुछ उस 7 साल की बच्ची के साथ होता है, उसके बारे में उन्हें पता ही नहीं होता, लेकिन उसका दंश और दर्द वो ताउम्र झेलती हैं. इस प्रथा का एकमात्र उद्देश्य है, बच्ची या महिला के यौन इच्छाओं को दबाना है.

कुरीति के खिलाफ अभियान को नहीं मिल रहा समर्थन

इसके साथ उन्होंने बताया कि उन्हें इस कुप्रथा को रोकने के लिए ‘WESpeakoutonFGM’ नाम से एक कैंपेन की शुरुआत की है, लेकिन इसमें हमें समर्थन नहीं मिल रहा. मैं सरकार से दरख्वास्त करती हूं कि जल्द से जल्द इस कुप्रथा को खत्म करने पर काम शुरू किया जाये. इस प्रथा को बैन करके बोहरा बेटी बचाना बहुत जरूरी है.

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