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Manipur Violence: मणिपुर में 12,000 विस्थापित बच्चों में से 100 सदमे में, सरकारी डेटा से बड़ा खुलासा

Updated at : 03 Sep 2023 7:46 PM (IST)
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Manipur Violence: मणिपुर में 12,000 विस्थापित बच्चों में से 100 सदमे में, सरकारी डेटा से बड़ा खुलासा

**EDS: SCREENSHOT VIA PTI VIDEO** Thoubal: Security forces personnel guard after a mob allegedly attempted to loot weapons from an India Reserve Battalion located in Khangabok, in Thoubal district of Manipur, Tuesday, July 4, 2023. (PTI Photo) (PTI07_05_2023_000036B)

जातीय संघर्षों के कारण विस्थापित हुए लगभग 50,000 लोगों में से 12,694 बच्चे हिंसा प्रभावित मणिपुर के राहत शिविरों में रह रहे हैं और उनमें से 100 गंभीर रूप से सदमे में हैं, जिन्हें पेशेवर परामर्श की आवश्यकता है, एक सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध आंकड़ों के हवाले से कहा गया है.

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मणिपुर इस समय हिंसा की आग में जल रहा है. मई के पहले सप्ताह में शुरू हुई जातीय संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है. राज्य में रह-रहकर कुकी और मैतेई समुदाय के बीच हिंसक झड़पें हो जाती हैं. राज्य में शांति बहाली के लिए प्रयास जारी है, लेकिन अब भी पूरी तरह से स्थिति को नियंत्रण में नहीं लिया जा सकता है. एक ही राज्य बफर जोन में बंट चुका है. इधर एक सरकारी डेटा में बताया गया है कि हिंसा प्रभावित राज्य में 100 से अधिक बच्चे सदमे में हैं. जिनका इलाज मनोचिकित्सकों की ओर से जारी है.

12,694 बच्चे हिंसा प्रभावित मणिपुर के राहत शिविरों में रह रहे

जातीय संघर्षों के कारण विस्थापित हुए लगभग 50,000 लोगों में से 12,694 बच्चे हिंसा प्रभावित मणिपुर के राहत शिविरों में रह रहे हैं और उनमें से 100 गंभीर रूप से सदमे में हैं, जिन्हें पेशेवर परामर्श की आवश्यकता है, एक सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध आंकड़ों के हवाले से कहा गया है. बताया गया है कि समाज कल्याण विभाग के योग्य डॉक्टरों की टीम और बाल मनोचिकित्सकों की टीम बच्चों को सदमें से बाहर निकालने में दिन-रात जुटी हुई है. डॉक्टरों की टीम ने बताया, शिविरों में बच्चों की पहचान की जाती है और फिर उन्हें पेशेवर परामर्शदाताओं के पास ले जाया जाता है.

बाल मनोचिकित्सक डॉ जीना हेइग्रुजम ने अपना अनुभव शेयर किया

बाल मनोचिकित्सक डॉ जीना हेइग्रुजम, जिन्होंने पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर वाले बच्चों की पहचान करने के लिए कई राहत शिविरों का दौरा किया. उन्होंने बताया, शिविरों में तनाव प्रभावित बच्चों की पहचान करते हैं और उन्हें तनाव से बाहर निकालने के लिए ‘खेल और नृत्य’ तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. खेल और नृत्य समूह अभ्यास के बाद, विस्थापित बच्चों को ड्राइंग पेंसिल और कागज दिए जाते हैं और उन्हें जो भी पसंद हो उसे स्केच/चित्र बनाने के लिए कहा जाता है.

मणिपुर में बुरा वक्त बीत गया, राज्य बेहतर वक्त की ओर बढ़ रहा: असम रायफल्स के डीजी

असम रायफल्स के महानिदेशक, लेफ्टिनेंट जनरल पी सी नायर ने कहा कि मणिपुर में बुरा वक्त बीत चुका है और हिंसा प्रभावित यह राज्य ‘‘बेहतर वक्त की ओर बढ़ रहा है. लेफ्टिनेंट जनरल नायर ने कहा कि कुछ इलाकों से हिंसा की छिटपुट घटनाओं की सूचनाएं हैं लेकिन पूर्वोत्तर का यह राज्य अब शांति की ओर बढ़ रहा है. ऐसे आरोप लग रहे हैं कि असम रायफल्स मणिपुर में जारी हिंसा में एक खास समुदाय के प्रति पक्षपाती है और इसके बीच लेफ्टिनेंट जनरल नायर का यह बयान आया है. उन्होंने कहा, हम पक्षपाती नहीं हैं और मैं ये एकदम स्पष्ट कर देना चाहता हूं. अगर हमें बंकर दिखते हैं तो हम उन्हें नष्ट कर देते हैं. हमने दोनों समुदायों से बराबर की संख्या में हथियार बरामद किए, इसी प्रकार दोनों पक्षों के लोगों को बचाया.

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मणिपुर हिंसा में 160 से अधिक लोगों की हो चुकी है मौत

गौरतलब है कि मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद राज्य में भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. राज्य की आबादी में मैतेई समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 53 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं. वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है और उनमें से ज्यादातर पर्वतीय जिलों में रहते हैं.

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

मुख्यधारा की पत्रकारिता में 14 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. खेल जगत में मेरी रुचि है. वैसे, मैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर काम करता हूं. झारखंड की संस्कृति में भी मेरी गहरी रुचि है. मैं पिछले 14 वर्षों से प्रभातखबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इस दौरान मुझे डिजिटल मीडिया में काम करने का काफी अनुभव प्राप्त हुआ है. फिलहाल मैं बतौर शिफ्ट इंचार्ज कार्यरत हूं.

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