Manipur Violence: मणिपुर में 12,000 विस्थापित बच्चों में से 100 सदमे में, सरकारी डेटा से बड़ा खुलासा

**EDS: SCREENSHOT VIA PTI VIDEO** Thoubal: Security forces personnel guard after a mob allegedly attempted to loot weapons from an India Reserve Battalion located in Khangabok, in Thoubal district of Manipur, Tuesday, July 4, 2023. (PTI Photo) (PTI07_05_2023_000036B)
जातीय संघर्षों के कारण विस्थापित हुए लगभग 50,000 लोगों में से 12,694 बच्चे हिंसा प्रभावित मणिपुर के राहत शिविरों में रह रहे हैं और उनमें से 100 गंभीर रूप से सदमे में हैं, जिन्हें पेशेवर परामर्श की आवश्यकता है, एक सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध आंकड़ों के हवाले से कहा गया है.
मणिपुर इस समय हिंसा की आग में जल रहा है. मई के पहले सप्ताह में शुरू हुई जातीय संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है. राज्य में रह-रहकर कुकी और मैतेई समुदाय के बीच हिंसक झड़पें हो जाती हैं. राज्य में शांति बहाली के लिए प्रयास जारी है, लेकिन अब भी पूरी तरह से स्थिति को नियंत्रण में नहीं लिया जा सकता है. एक ही राज्य बफर जोन में बंट चुका है. इधर एक सरकारी डेटा में बताया गया है कि हिंसा प्रभावित राज्य में 100 से अधिक बच्चे सदमे में हैं. जिनका इलाज मनोचिकित्सकों की ओर से जारी है.
12,694 बच्चे हिंसा प्रभावित मणिपुर के राहत शिविरों में रह रहे
जातीय संघर्षों के कारण विस्थापित हुए लगभग 50,000 लोगों में से 12,694 बच्चे हिंसा प्रभावित मणिपुर के राहत शिविरों में रह रहे हैं और उनमें से 100 गंभीर रूप से सदमे में हैं, जिन्हें पेशेवर परामर्श की आवश्यकता है, एक सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध आंकड़ों के हवाले से कहा गया है. बताया गया है कि समाज कल्याण विभाग के योग्य डॉक्टरों की टीम और बाल मनोचिकित्सकों की टीम बच्चों को सदमें से बाहर निकालने में दिन-रात जुटी हुई है. डॉक्टरों की टीम ने बताया, शिविरों में बच्चों की पहचान की जाती है और फिर उन्हें पेशेवर परामर्शदाताओं के पास ले जाया जाता है.
बाल मनोचिकित्सक डॉ जीना हेइग्रुजम ने अपना अनुभव शेयर किया
बाल मनोचिकित्सक डॉ जीना हेइग्रुजम, जिन्होंने पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर वाले बच्चों की पहचान करने के लिए कई राहत शिविरों का दौरा किया. उन्होंने बताया, शिविरों में तनाव प्रभावित बच्चों की पहचान करते हैं और उन्हें तनाव से बाहर निकालने के लिए ‘खेल और नृत्य’ तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. खेल और नृत्य समूह अभ्यास के बाद, विस्थापित बच्चों को ड्राइंग पेंसिल और कागज दिए जाते हैं और उन्हें जो भी पसंद हो उसे स्केच/चित्र बनाने के लिए कहा जाता है.
मणिपुर में बुरा वक्त बीत गया, राज्य बेहतर वक्त की ओर बढ़ रहा: असम रायफल्स के डीजी
असम रायफल्स के महानिदेशक, लेफ्टिनेंट जनरल पी सी नायर ने कहा कि मणिपुर में बुरा वक्त बीत चुका है और हिंसा प्रभावित यह राज्य ‘‘बेहतर वक्त की ओर बढ़ रहा है. लेफ्टिनेंट जनरल नायर ने कहा कि कुछ इलाकों से हिंसा की छिटपुट घटनाओं की सूचनाएं हैं लेकिन पूर्वोत्तर का यह राज्य अब शांति की ओर बढ़ रहा है. ऐसे आरोप लग रहे हैं कि असम रायफल्स मणिपुर में जारी हिंसा में एक खास समुदाय के प्रति पक्षपाती है और इसके बीच लेफ्टिनेंट जनरल नायर का यह बयान आया है. उन्होंने कहा, हम पक्षपाती नहीं हैं और मैं ये एकदम स्पष्ट कर देना चाहता हूं. अगर हमें बंकर दिखते हैं तो हम उन्हें नष्ट कर देते हैं. हमने दोनों समुदायों से बराबर की संख्या में हथियार बरामद किए, इसी प्रकार दोनों पक्षों के लोगों को बचाया.
Also Read: मणिपुर हिंसा पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का बयान, बोले शांति बहाल करने की कोशिश में हो रहे सफल
मणिपुर हिंसा में 160 से अधिक लोगों की हो चुकी है मौत
गौरतलब है कि मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद राज्य में भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. राज्य की आबादी में मैतेई समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 53 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं. वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है और उनमें से ज्यादातर पर्वतीय जिलों में रहते हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By अरबिंद कुमार मिश्रा
अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.
झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










