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पिता की मौत के बावजूद झोंपड़ी के लाल विशाल ने बनाये रखा हौसला, यूपीएससी में पाया 484 रैंक

Updated at : 31 May 2022 9:57 AM (IST)
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पिता की मौत के बावजूद झोंपड़ी के लाल विशाल ने बनाये रखा हौसला, यूपीएससी में पाया 484 रैंक

आर्थिक विपन्नता व पिता की मौत के बावजूद मकसूदपुर गांव की झोपड़ी के लाल विशाल कुमार ने यूपीएससी परीक्षा परिणाम में मीनापुर का नाम रौशन किया है. विशाल को यूपीएससी में 484 रैंक आया है. वर्ष 2009 में विशाल के पिता बिकाउ प्रसाद की सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी.

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मुजफ्फरपुर. आर्थिक विपन्नता व पिता की मौत के बावजूद मकसूदपुर गांव की झोपड़ी के लाल विशाल कुमार ने यूपीएससी परीक्षा परिणाम में मीनापुर का नाम रौशन किया है. विशाल को यूपीएससी में 484 रैंक आया है. वर्ष 2009 में विशाल के पिता बिकाउ प्रसाद की सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी. बावजूद विशाल ने हार नहीं मानी. उसने अपनी पढ़ाई पर इसका असर नहीं पड़ने दिया.

जिले का टॉपर रहा है विशाल

उसने वर्ष 2011 में रामकिशोर उच्च विद्यालय छपड़ा से मैट्रिक परीक्षा में 435 अंक प्राप्त कर जिला में टॉप स्थान के साथ साथ राज्य के टॉप-10 में स्थान लाया था. उसने एलएस कॉलेज मुजफ्फरपुर से आइएससी प्रथम श्रेणी से उतीर्ण हुआ. 2013 में वह पटना आ गया और वहीं से उसका चयन आइआइटी के लिए हो गया. इसके बाद आइआइटी कानपुर से बीटेक (केमिकल) किया. बीटेक करने के बाद विशाल रिलायंस ज्वाइन किया.

नौकरी छोड़ तैयारी में जुटा

अपने सपने को पूरा करने के लिए उसने नौकरी छोड़ इनस्टिच्यूट में पढ़ाना शुरू कर दिया. पहले प्रयास में उसे सफलता हाथ नहीं लगी, तो उसने पढ़ाना छोड़ दिल्ली में अपना ठिकाना बना लिया और अंततः उसे सफलता मिल ही गयी.

मां का मिला सहारा

मां उस वक्त सहारा इंडिया में काम कर पढ़ाई में सहयोग कर रही थी. पिता एक छोटी से दावा की दुकान करते थे. सिर से पिता का साया उठने के बाद विशाल की मां ने अपने बेटे को कभी अहसास नही होने दिया कि उसके पिता नहीं हैं.

हमने उसे कभी कमी महसूस नहीं होने दी

विशाल की सफलता पर उनकी मां बेहद भावुक होते हुए बताती हैं कि बचपन से ही विशाल पढ़ने लिखने में काफी तेज था. हमने उसे कभी कमी महसूस नहीं होने दी. गांव के ही गौरीशंकर सर ने उसे पढ़ाई में काफी मदद की थी.

भावुक करनेवाला क्षण

विशाल के शिक्षक गौरी शंकर बताते हैं कि बचपन से ही विशाल पढ़ने में काफी तेज था. 2011 में मैट्रिक में जिले में टॉप किया. फिर आइआइटी गया. वहां से बीटेक करने के बाद नौकरी लग गयी, पर आगे पढ़ाई करना चाहता था. आज उसे सफलता मिल गयी. हम सब के लिए यह बहुत भावुक करनेवाला क्षण है.

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