कानपुर हत्याकांड का नया खुलासा : मोस्ट वांटेड विकास दुबे ने घर में बना रखा था वायरलेस कंट्रोल रूम, फाइनेंसर को एसटीएफ ने उठाया

कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर में डीएसपी समेत आठ पुलिसकर्मियों के हत्यारे मोस्टवांटेड अपराधी विकास दुबे के खिलाफ जांच का आज पांचवा दिन है. पुलिस की जांच में मंगलवार को अहम खुलासा हुआ है. विकास दुबे ने अपने घर में एक वायरलेस कंट्रोल रूम बना रखा था. इसके इस्तेमाल वह अपने गुर्गों से संपर्क में बने रहने के लिए करता था. उसके घर से कई पहचान पत्र भी बरामद हुए हैं. इन पहचान पत्रों पर फोटो किसी का, तो नाम व पते किसी और के हैं. आशंका है कि इन पहचान पत्रों का इस्तेमाल विकास दुबे जमीनों की खरीद फरोख्त में करता था.
कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर में डीएसपी समेत आठ पुलिसकर्मियों के हत्यारे मोस्टवांटेड अपराधी विकास दुबे के खिलाफ जांच का आज पांचवा दिन है. पुलिस की जांच में मंगलवार को अहम खुलासा हुआ है. विकास दुबे ने अपने घर में एक वायरलेस कंट्रोल रूम बना रखा था. इसके इस्तेमाल वह अपने गुर्गों से संपर्क में बने रहने के लिए करता था. उसके घर से कई पहचान पत्र भी बरामद हुए हैं. इन पहचान पत्रों पर फोटो किसी का, तो नाम व पते किसी और के हैं. आशंका है कि इन पहचान पत्रों का इस्तेमाल विकास दुबे जमीनों की खरीद फरोख्त में करता था.
कानपुर मुठभेड़ में अब तक की जांच में सामने आया है कि गैंगस्टर विकास दुबे ने गुर्गों, रिश्तेदारों और नौकर-नौकरानी के नाम से कई चल और अचल संपत्तियां खरीद रखी थीं. विकास दुबे की इस जालसाजी के धंधे में उसके हर एक साथी बराबर उसका साथ दे रहे थे. आईजी रेंज कानपुर मोहित अग्रवाल का कहना है कि प्रथम दृष्टया इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल धोखाधड़ी और जालसाजी के लिए किया जाना प्रतीत होता है. साक्ष्य जुटाने के लिए बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से भी संपर्क किया जा रहा है.
मुठभेड़ में बदमाशों की गोली का शिकार हुए डीएसपी देवेंद्र मिश्र की तीन माह पुरानी एसएसपी अनंत देव को लिखी चिट्ठी वायरल होने के बाद जांच प्रक्रिया तेज कर दी गयी है. जांच पहले कानपुर जोन के एडीजी जय नारायण सिंह को दिये जाने की बात सामने आयी थी. लेकिन, अब आईजी लखनऊ लक्ष्मी सिंह को जांच के लिए नामित किया गया है. आईजी लक्ष्मी सिंह मंगलवार सुबह सीओ बिल्हौर कार्यालय पहुंची हैं. उन्होंने सभी स्टाफ को तलब करते हुए कार्यालय में आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है. बंद कमरे में पुलिसकर्मियों से पूछताछ की गयी. कंप्यूटर और दस्तावेजों की भी जांच की गयी. फॉरेन्सिक टीम ने कंप्यूटर को सीज कर कब्जे में ले लिया है. माना जा रहा है कि डीएसपी की वायरल चिट्ठी मामले की जांच के लिए आईजी लक्ष्मी सिंह आयी हैं.
एसटीएफ गैंगस्टर विकास दुबे के सहयोगी ब्रह्मनगर निवासी जय बाजपेयी को हिरासत में लिया है. टीम उसे कानपुर से लेकर लखनऊ पहुंची है. बताया जा रहा है कि करीब हजार करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिक जय बाजपेयी विकास दुके के सभी काले कारोबार को देखता था. उसकी अघोषित संपत्तियों को ठिकाने लगाने के साथ विकास दुबे का पैसा रियल एस्टेट और शराब के कारोबार में भी लगाता था. जय बाजपेयी को विकास दुबे का फाइनेंसर बताया जा रहा है. एक हफ्ते पहले उसने विकास के खाते में 15 लाख रुपये ट्रांसफर किये थे. एसटीएफ उससे लखनऊ में पूछताछ कर रही है.
दरअसल, रविवार को काकादेव में तीन लावारिस कारें बरामद हुई थी. शक है कि विकास दुबे ने फरार होने में इन्हीं में से किसी एक कार का इस्तेमाल किया है. पुलिस ने जांच की तो कारें जय बाजपेयी की निकलीं. उसके बाद उसे हिरासत में लिया गया है. बताया जा रहा है कि जय बाजपेयी महज आठ सालों में अकूत संपत्ति का मालिक बना है.
Posted By : kaushal Kishor
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