केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सिलिकोसिस के मुद्दे पर मिली शिकायत का लिया संज्ञान

डब्ल्यूबीपीसीबी के सदस्य सचिव को शिकायत पर कार्रवाई करने के लिए भेजा पत्र
पीएमओ से शिकायत पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हरकत में पश्चिम बर्दवान जिले में हाल के दिनों में सिलिकोसिस के अनेकों मामले पीड़ित कुछ मरीजों की हुई है मौत आसनसोल. पश्चिम बर्दवान जिले में उद्योगों के प्रदूषण से तेजी से फैल रही लाइलाज बीमारी सिलिकोसिस को लेकर अब मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है. स्थानीय भाजपा नेता अभिजीत राय द्वारा पीएमओ जन शिकायत (पीएमओपीजी) पोर्टल में की गई शिकायत पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने संज्ञान लिया है. बोर्ड ने पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को निर्देश दिया है कि मामले पर कार्रवाई कर तत्काल जानकारी उपलब्ध करायें.
शिकायत में क्या कहा गया
अभिजीत राय ने अपनी शिकायत में उन कारखानों को तत्काल बंद करने की मांग की है, जहां से सिलिका का अनियमित उत्सर्जन हो रहा है. उनका कहना है कि सुरक्षा के अभाव में काम कर रहे मजदूर गंभीर खतरे में हैं. उन्होंने प्रभावित श्रमिकों के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधा और उचित मुआवजा सुनिश्चित करने की मांग की है. साथ ही यह भी कहा कि जब तक सुरक्षा मानकों का पालन सख्ती से नहीं होगा, तब तक जिले में सिलिकोसिस का खतरा बढ़ता ही जायेगा.
बीमारी का बढ़ता असर
गौरतलब है कि देश के मानचित्र पर औद्योगिक नगरी के रूप में चिह्नित पश्चिम बर्दवान जिला हाल के दिनों में प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है. कारखानों में श्रमिकों से काम तो लिया जा रहा है, लेकिन उनके स्वास्थ्य की नियमित जांच नहीं की जाती और सुरक्षा उपकरणों का भी पर्याप्त प्रबंध नहीं है. यही कारण है कि सिलिकोसिस जैसी बीमारी, जो फेफड़ों को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचाती है, जिले में लगातार पैर पसार रही है.
दो मरीज से छह तक
कुछ साल पहले तक जिले में सिलिकोसिस से पीड़ित मरीजों की संख्या महज दो थी. सालानपुर इलाके के एक्टिविस्ट अमरनाथ महतो ने इस विषय पर मुहिम छेड़ी और प्रभात खबर अखबार ने इस मुद्दे पर धारावाहिक खबर प्रकाशित करनी शुरू की. इसके बाद प्रशासन हरकत में आया. जिला स्तर पर सिलिकोसिस जांच शिविर लगाये जाने लगे. कारखानों की जांच और सुरक्षा मानकों की समीक्षा शुरू हुई. बोर्ड की बैठकों में यह विषय प्रमुखता से उठने लगा. इसके बावजूद हाल के महीनों में छह नये मरीज चिह्नित हुए, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है. यह स्थिति इलाके की गंभीरता को दर्शाती है.
प्रशासन की सक्रियता
जिलाधिकारी एस पोन्नमबालम ने इस मामले में सकारात्मक भूमिका निभायी है. उनकी पहल पर अधिकारियों की सक्रियता जरूर बढ़ी है. समय-समय पर सिलिकोसिस जांच शिविर लगाये जा रहे हैं और कारखानों की जांच भी हो रही है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कारखानों में श्रमिकों के लिए स्थायी रूप से सुरक्षा उपाय लागू नहीं होंगे और प्रदूषण पर सख्ती से अंकुश नहीं लगाया जायेगा, तब तक समस्या का हल मुश्किल है.अब आगे क्या
अभिजीत राय का कहना है कि श्रमिकों की स्थिति में कोई ठोस सुधार अभी तक दिखाई नहीं दिया है. इसी वजह से उन्होंने पीएमओपीजी पोर्टल में शिकायत दर्ज करायी. सीपीसीबी ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को कार्रवाई करने और उसकी जानकारी मुहैया कराने के लिए पत्र भेजा है. इसकी एक प्रति उन्हें भी भेजी जायेगी. इसके मिलने के बाद यह स्पष्ट होगा कि बोर्ड ने क्या कदम उठाए हैं और आगे की रणनीति उसी आधार पर तय की जायेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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