घरों से लेकर होटल तक फीका पड़ा खाने का स्वाद

Updated at : 07 Apr 2026 6:30 PM (IST)
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घरों से लेकर होटल तक फीका पड़ा खाने का स्वाद

इन दिनों एकाएक मसाले की बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है, इनमें 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हो गयी है.

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मसाले की बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा रसोई का बजट

सहरसा. इन दिनों एकाएक मसाले की बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है, इनमें 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हो गयी है. जिसके कारण लोगों के भोजन का स्वाद फीका पड़ने लगा है. एलपीजी गैस की कटौती के बाद मसालों की कीमत में वृद्धि का सीधा असर अब रसोई तक पहुंच गया है. पहले जहां सब्जियों, दालों एवं तेल के बढ़ते दामों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ाई थी. वहीं अब मसालों की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ने लोगों के भोजन का स्वाद फीका कर दिया है. गृहणी खाने में मसालों का इस्तेमाल भी सोच-समझकर कर रही है. घरों की रसोई में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख मसाले में हल्दी, धनिया, जीरा, लाल मिर्च, गरम मसाला, काली मिर्च एवं इलायची की कीमतों में अचानक आई तेजी ने लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है. खासकर मध्यम वर्ग एवं गरीब परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी किसी बड़ी परेशानी से कम नहीं है.

20 से 30 प्रतिशत तक की हुई वृद्धि

पिछले कुछ महीनों में मसालों की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गयी है. जो हल्दी पहले 120 से 140 रुपये प्रति किलो मिलती थी. वह अब दो सौ से 250 रुपये प्रति किलो बिक रही है. इसी तरह धनिया की कीमत एक सौ रुपये से बढ़कर 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गयी है. जीरा की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिला है. पहले जहां जीरा 200 से 300 रुपये किलो मिलता था. वहीं अब इसकी कीमत 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गयी है. लाल मिर्च 200 रुपये से बढ़कर 280 से 300 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. गरम मसाला, काली मिर्च एवं इलायची जैसे मसालों की कीमतों में भी काफी बढ़ोतरी हुई है. जिससे त्योहारों एवं खास मौकों पर बनने वाला व्यंजन भी महंगा हो गया है.

गृहिणियों की बढ़ी परेशानी

मसालों की कीमत बढ़ने से सबसे ज्यादा असर गृहिणियों पर पड़ा है. पहले जहां खाने में स्वाद बढ़ाने के लिए खुलकर मसालों का इस्तेमाल किया जाता था. वहीं अब गृहिणी सीमित मात्रा में मसाला डालकर भोजन परोस रही है. गृहिणी सीमा देवी ने बताया कि पहले महीने में 500 से 600 रुपये मसालों पर खर्च होता था, लेकिन अब वही खर्च बढ़कर नौ सौ से एक हजार रुपये तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि मसालों की कीमत बढ़ने से अब खाना भी फीका लगने लगा है, क्योंकि पहले जितना मसाला डालते थे, अब उतना डालना मुश्किल हो गया है. गृहिणी रेखा देवी ने बताया कि पहले त्योहारों या मेहमानों के आने पर विशेष व्यंजन बनाना आसान था, लेकिन अब महंगे मसालों की वजह से खर्च बढ़ जाता है. जिससे कई बार योजना बदलनी पड़ती है.

छोटे दुकानदारों की बिक्री पर असर

मसालों की बढ़ती कीमतों का असर छोटे दुकानदारों पर भी पड़ा है. किराना दुकानदार दीपक भगत ने बताया कि पहले लोग आधा किलो या एक किलो मसाला खरीदते थे, लेकिन अब एक सौ ग्राम या दो सौ ग्राम ही खरीद कर काम चला रहे हैं. इससे बिक्री पर भी असर पड़ा है. किराना दुकानदार सुधांशु शेखर ने बताया कि मसालों की कीमत बढ़ने के बाद ग्राहकों की संख्या कम हो गयी है. लोग अब जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी कर रहे हैं. पहले लोग महीने भर का सामान एक साथ लेते थे. लेकिन अब थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खरीद रहे हैं. मसाला व्यवसायी अंजनी कुमार ने बताया कि मसालों की कीमत बढ़ने का मुख्य कारण उत्पादन में कमी एवं परिवहन लागत में वृद्धि है. मसाला उत्पादन क्षेत्रों में खराब मौसम के कारण मसालों की फसल प्रभावित हुई है. जिससे बाजार में आपूर्ति कम हो गयी है. किसानों को उत्पादन लागत में वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है. खाद, बीज एवं मजदूरी महंगी होने से मसालों की खेती करना पहले की तुलना में ज्यादा खर्चीला हो गया है.

होटल व रेस्टोरेंट संचालकों की बढ़ी चिंता

मसालों की कीमत बढ़ने से होटल एवं रेस्टोरेंट संचालक भी परेशान हैं. कचहरी चौक स्थित कृष्णा होटल के संचालक ने बताया कि मसाला महंगा होने से खाने की लागत बढ़ गयी है. लेकिन ग्राहकों को बनाए रखने के लिए कीमतों में ज्यादा वृद्धि नहीं कर पा रहे हैं. रजिस्ट्री आफिस स्थित बबलू होटल के संचालक बबलू मुखिया ने बताया कि पहले जहां मसालों पर महीने में 10 हजार रुपये खर्च होते थे. अब वही खर्च 15 हजार रुपये तक पहुंच गया है. इससे मुनाफा कम हो गया है. मसालों की कीमत बढ़ने का सीधा असर आम लोगों के भोजन पर पड़ा है. लोग अब कम मसालेदार खाना खाने को मजबूर हो रहे हैं. इससे भोजन का स्वाद भी प्रभावित हो रहा है.

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