मां चंद्रघंटा की पूजा में तल्लीन रहे शहर से गांव तक के श्रद्धालु

Updated at : 24 Sep 2025 6:53 PM (IST)
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मां चंद्रघंटा की पूजा में तल्लीन रहे शहर से गांव तक के श्रद्धालु

मां चंद्रघंटा की पूजा में तल्लीन रहे शहर से गांव तक के श्रद्धालु

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– आज होगी मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना कटिहार जिले में मां दुर्गा की पूजा को लेकर उत्साह का माहौल है. एक ओर जहां पूजा पंडाल एवं सार्वजनिक दुर्गा मंदिर को सजाया संवारा जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ मां दुर्गा की प्रतिमा को भी अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है. दुर्गापूजा को लेकर नये परिधानों की खरीदारी भी चल रही है. लोग अपने तथा परिजनों कपड़े की खरीददारी कर रहे है. इस बीच बुधवार को नवरात्र के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने मां चंद्रघंटा की पूजा पूरे विधि विधान के साथ किया. शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिर एवं पूजा पंडालों में मां चंद्रघंटा की पूजा को लेकर भीड़ लगी रही. अहले सुबह से ही लोग अनुष्ठान की तैयारी में जुट गये. गुरुवार को नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना की तैयारी की जा रही है. आरती में उमड़ रही है भीड़ शहर के सार्वजनिक दुर्गा मंदिर व मिरचाईबाड़ी स्थित सर्वमंगला मंदिर में दिन भर पूजा को लेकर तांता लगा रहा. दोनों मंदिरों में नवरात्र को लेकर दुर्गा पाठ भी चल रहा है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु दुर्गा पाठ कार्यक्रम में सम्मिलित हो रहे है. दूसरी तरफ संध्या में महाआरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते है. दोनों जगहों पर मेला जैसा नजारा दिखने लगा है. हालांकि सवेरे से ही शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालु नवरात्र को लेकर पूजा अर्चना करते रहे. पूरे दिन उपवास में रहकर श्रद्धालु शाम में अल्पाहार किया. नवरात्र को लेकर जिले का पूरा वातावरण भक्ति में हो गया है. शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के खानपान के प्रतिष्ठानों में भी बदलाव दिखने लगा है. अधिकांश व्यंजन बगैर लहसुन प्याज के बनाये जा रहे है. आज होगी मां कूष्मांडा की पूजा नवरात्र के चौथे दिन गुरुवार को मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरुप की पूजा अर्चना होगी. मान्यता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था. तब कूष्मांडा देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी. अपनी मंद-मंद मुस्कान से ब्रम्हांड की उत्पत्ति करने के कारण ही इन्हें कूष्मांडा के नाम से जाना जाता है. इसलिए ये सृष्टि की आदि-स्वरूपा- आदिशक्ति के रूप में प्रसिद्ध है. मां कूष्मांडा का निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है. निवास कर सकने की क्षमता व शक्ति केवल उन्ही में है. इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य के समान ही अलौकिक है. माता के तेज व प्रकाश से दसों दिशाएं प्रकाशित होती है. ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में मौजूद तेज मां कूष्मांडा की छाया है. मां कूष्माण्डा की आठ भुजाएं है. इसलिए मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है. इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है. आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है.

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