...और जब सुशील मोदी भारी बारिश के बीच ही पैदल डोकानियां धर्मशाला से पहुंच गये थे समाहरणालय

<P>-बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कभी सांसद के तौर पर भी किया था बांका के धोरैया विधानसभा का प्रतिनिधित्व -दिवंगत मोदी का था बांका से गहरा रिश्ता -पटना
-बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कभी सांसद के तौर पर भी किया था बांका के धोरैया विधानसभा का प्रतिनिधित्व -दिवंगत मोदी का था बांका से गहरा रिश्ता -पटना एयरपोर्ट पर रामनारायण मंडल ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि -बांका के कार्यकर्ताओं ने किया शोक प्रकटबांका. सूबे के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के निधन से बांका के भाजपा परिवार और उनके प्रशंसकों में शोक व्याप्त है. सुशील कुमार मोदी अपने राजनीतिक जीवन में बांका कई बार आये थे. अनेकों दफा वह सरकारी कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री के तौर पर शिरकत करने पहुंचे तो कई बार पार्टी कार्यक्रम से बांका आए. इतना ही नहीं वह निजी और व्यक्तिगत संबंध निभाने भी बांका आते-जाते रहे. जानकारों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर के नेता जो बांका अधिकतम बार आते रहे हैं उनमें सुशील मोदी भी एक नाम है. खास बात यह भी है उन्होंने सांसद के तौर पर भी बांका का प्रतिनिधित्व किया है. दरअसल, जब 2004 में वह भागलपुर लोकसभा से सांसद के तौर पर निर्वाचित हुए तो उस समय बांका जिला का धोरैया विधानसभा भागलपुर में ही था. धोरैया विधानसभा में धोरैया और रजौन दो बड़े प्रखंड उनके संसदीय क्षेत्र का हिस्सा था. इस नाते भी उनका बांका से गहरा लगाव रहा था. सूबे के पूर्व मंत्री व बांका के विधायक रामनारायण मंडल से उनका नजदीकी लगाव था. इनके आवास पर अक्सर प्रेस कांफ्रेंस और भोजन के लिए पधारते रहे. पूर्व मंत्री श्री मंडल बताते हैं कि एक बार क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर बांका में ही रोड मार्च का आयोजन था. लेकिन, उसी दौरान तेज और भारी बारिश होने लगी. इसी बारिश में करीब हजारों कार्यकर्ताओं और बड़े नेताओं के साथ वह डोकानियां धर्मशाला से समाहरणालय तक पैदल ही निकल पडे़. बारिश में वे भीगते हुए समारहणालय पहुंचे. यह घटना वर्ष 2000 के करीब की है. उन्होंने प्रमुख समस्याओं से तत्कालीन डीएम को अवगत कराया था. यह देखकर सभी नेता दंग रह गये थे. कार्यकर्ताओं में अपार जोश का सृजन हुआ था. बताया जाता है कि सुशील मोदी ऐसे नेता थे जिनका बांका के बड़े लीडरों के साथ ही नहीं आम कार्यकर्ताओं के साथ भी नजदीकी परिचय था. वह सैकड़ों कार्यकर्ताओं को नाम और गांव से पहचानते थे. अलबत्ता, जब भी उनके आने की सूचना होती थी, उनसे भेंट करने भारी लोगों की जमघट लग जाती थी.
सात्विक थे सुशील मोदी, शाकाहारी भोजन था प्रिय
भाजपा के वरिष्ठ नेता उगेंद्र मंडल बताते हैं कि सुशील कुमार मोदी सात्विक नेता थे. शत प्रतिशत ईमानदार. उनका उनसे पुराना परिचय था. सुशील मोदी एक दम शाकाहारी भोजन करते थे. एक मुट्ठी चावल, दो रोटी, दाल, रस वाली सब्जी वे खाते थे. तेल और मसालेदार भोजन से वह दूर रहते थे. नशे का लत नहीं था. एक सुपाड़ी तक नहीं चबाते थे.2.जंगल राज की समाप्ति सुमो का अहम योगदानः रामनारायण
फोटो- पटना एयरपोर्ट पर सुशील कुमार मोदी के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देते पूर्व मंत्री व बांका विधायक रामनारायण मंडल प्रतिनिधि, बांका. के पूर्व मंत्री सह बांका विधायक रामनारायण मंडल ने पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार के निधन पर गहरी शोक संवेदना प्रकट की है. उन्होंने मंगलवार को पटना एयरपोर्ट पर पार्थिव शरीर का दर्शन कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किया. साथ ही कहा कि दिवंगत मोदी से उनका व्यक्तिगत संबंध था. यह उनकी निजी क्षति है. कहा कि वे छात्र जीवन से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और राष्ट्रीय स्वयं सेवक को के पूर्णकालिक सदस्य रहे. जयप्रकाश आंदोलन में बहुत ही सक्रिय भूमिका निभायी. आजीवन भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते रहे. राजद के जंगल राज की समाप्ति में इनका अहम योगदान रहा. बदहाल बिहार को तरक्की की तरफ ले जाने में इनका कुशल वित्तीय प्रबंधन कबीले तारीफ रहा. उनका व्यक्तित्व सुशासन, सूचिता, आचरण के मापदंड से भरा हुआ था. सूबे के आम जनों को इनकी कमी सदा खलती रहेगी. श्री मंडल ने प्रभु से प्रार्थना कि इनको अपने श्री चरणों में शाश्वत स्थान प्रदान करें. वहीं सुशील कुमार के निधन पर उगेंद्र मंडल, मनेाज यादव, राघवेंद्र झा, अनिल कुमार सिंह, विकास सिंह, प्रदेश कार्य समिति के सदस्य मृगेंद्र सिंह, केदार सिंह, मुकेश सिन्हा, अजय दास, रंजीत यादव, उज्जवल सिंहा सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भी गहरी शोक संवेदना प्रकट की है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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