सावधान! बार-बार पेट में दर्द गॉल ब्लाडर कैंसर का हो सकता है लक्षण

Updated at : 17 Jun 2017 7:53 AM (IST)
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सावधान! बार-बार पेट में दर्द गॉल ब्लाडर कैंसर का हो सकता है लक्षण

पटना : इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाज कराने आ रहे कैंसर पीड़ित मरीजों में बीते एक साल चार माह में 750 मरीजों की मौत हो चुकी है. इनमें सबसे अधिक गॉल ब्लाडर कैंसर के मरीज हैं. इसके बाद बच्चेदानी और फिर ब्रेस्ट कैंसर के मरीज शामिल हैं. यह आंकड़ा आइजीआइएमएस गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, कैंसर विभाग, स्त्री […]

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पटना : इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाज कराने आ रहे कैंसर पीड़ित मरीजों में बीते एक साल चार माह में 750 मरीजों की मौत हो चुकी है. इनमें सबसे अधिक गॉल ब्लाडर कैंसर के मरीज हैं. इसके बाद बच्चेदानी और फिर ब्रेस्ट कैंसर के मरीज शामिल हैं. यह आंकड़ा आइजीआइएमएस गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, कैंसर विभाग, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग व डेंटल में आये मरीज व इलाज के दौरान मौतोंकी संख्या के आधार पर जारी किया गया है. कैंसर से मौत के आंकड़े ने संस्थान प्रशासन को भी सोचने को मजबूर कर दिया है. डॉक्टरों का कहना है कि मौत का सबसे बड़ा कारण मरीजों का तीसरे व चौथे स्टेज के कैंसर होने पर अस्पताल पहुंचना है. यह आंकड़ा जनवरी, 2016 से अप्रैल, 2017 का है.
दिखें लक्षण तो तुरंत कराएं अल्ट्रासाउंड इंडोस्कोपी जांच : कैंसर रोग विभाग के हेड डॉ राजेश कुमार ने कहा कि अगर पेट में हल्का दर्द, गैस बनता है या फिर खाना पचने में समस्या हो रही हो, तो अल्ट्रासाउंड जांच करा कर डॉक्टर से संपर्क करें.
इस जांच में शुरुआती लक्षण
मिल सकते हैं. इसके अलावा अल्ट्रासाउंड इंडोस्कोपी से भी पेट के कैंसर, पथरी आदि की पहचान की जा सकती है. उन्होंने कहा कि सामान्य अल्ट्रासाउंड से कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलने में दिक्कत होती है. लेकिन, अब इंडोस्कोपी अल्ट्रासाउंड से ऐसी कोशिकाओं को डॉक्टर आसानी से देख सकते हैं, जिससे शुरुआती दौर के कैंसर की पहचान हो सकती है. उन्होंने कहा कि यह सुविधा आइजीआइएमएस पटना में भी उपलब्ध हो गयी है.
गॉल ब्लाडर कैंसर से 450 की मौत
आइजीआइएमएस में सबसे अधिक गॉल ब्लाडर कैंसर के मरीज आ रहे हैं. यहां के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग ने अभी हाल ही में एक साल (2016) का आंकड़ा पेश किया है. इस दौरान यहां 500 ऐसे मरीज आये, जिन्हें गॉल ब्लाडर कैंसर पाया गया. बड़ी बात तो यह है कि इन 500 मरीजों में 450 मरीजों की मौत भी हो गयी. यह स्थिति पिछले पांच साल से लगातार चल रही है. डॉक्टरों का कहना है कि पहले या फिर दूसरे स्टेज के करीब 100 मरीज अस्पताल पहुंच जाते हैं, जिन्हें इलाज के दौरान बचाया जा रहा है.
कैंसर के लक्षण
पेट में लगातार दर्द
पेट फूलना
गांठ, दर्द, स्तन में बदलाव या जलन
स्तन का जरूरत से ज्यादा
कठोर होना
निप्पल से तरल पदार्थ का स्राव
लंबे समय तक खांसी
शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ
उल्टी-दस्त के साथ खून आना, खाने में परेशानी
हड्डी में दर्द
लगातार बुखार
मुंंह का छाला ठीक नहीं होना
बचाव के उपाय
स्तनपान कराएं
संतुलित आहार लें
प्रदूषण से बचें
40 वर्ष के बाद लगातार स्वास्थ्य जांच कराएं
गुटका, तंबाकू व शराब से दूर रहें
तली-भुनी चीजों का अधिक प्रयोग न करें
घी-तेल का प्रयोग कम करें
केमिकल युक्त सब्जी का प्रयोग न करें
रंग युक्त सब्जी खाने से बचें
ऐसे हो सकता है इलाज
ब्रेस्ट, प्रोस्टेट, गर्भाशय, पेट, नाक, कान, गला व पित्त की थैली
कैसर जांच की सुविधाएं
आइजीआइएमएस
एम्स पटना
पीएमसीएच
महावीर कैंसर संस्थान
कैंसर जांच के तरीके
सूई के माध्यम से
इंडोस्कोपी अल्ट्रासाउंड
मेमोग्राफी
पैट सीटी स्कैन
अधिकारी बोले
पिछले कुछ वर्षों से कैंसर के मरीज अधिक आ रहे हैं. सबसे अधिक गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग में मरीज आते हैं. मौत के पीछे सबसे बड़ा कारण मरीज का तीसरे व चौथे स्टेज में अस्पताल पहुंचना है, जो मरीज शुरुआती लक्षण में आ जाते हैं, उनको बचा लिया जाता है. इसके प्रति लोगों को जागरूक होना होगा.
डॉ मनीष मंडल, चिकित्सा अधिकारी, आइजीआइएमएस
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