आज लोग अकेले रहना क्यों पसंद कर रहे हैं? जानिए एक्सपर्ट की राय

अकेले रहने के रुझान (image: AI Generated)
Living Alone Trends: आज के बदलते समाज में लोग परिवार से दूर रहकर अकेले रहना अधिक पसंद कर रहे हैं. पर्सनल स्पेस, करियर की प्राथमिकता, मी-टाइम की भूख, डिजिटल दुनिया का प्रभाव और आर्थिक आत्मनिर्भरता ऐसे कारण हैं जो लोगों को अकेलापन चुनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, नई पीढ़ी अपनी पहचान और मानसिक शांति को महत्व देती है, लेकिन कभी-कभी यह अकेलापन गंभीर मानसिक परेशानियों और सामाजिक जटिलताओं को भी जन्म दे सकता है.
Living Alone Trends: आज समाज तेजी से बदल रहा है. जीवनशैली, सोच और प्राथमिकताएं पहले की तुलना में काफी अलग हो चुकी हैं. जहां पहले संयुक्त परिवार और साथ रहने की परंपरा मजबूत मानी जाती थी, वहीं अब लोग अकेले रहना पसंद कर रहे हैं. इस बदलाव की वजह केवल परिस्थितियां नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता, करियर और मानसिक शांति की चाह भी है. इस आर्टिकल में हम विशेषज्ञों से समझेंगे कि आज क्यों अकेलापन चुन रहे हैं लोग और इसके क्या परिणाम सामने आ रहे हैं. प्रभात खबर से बात करते हुए साइकोलॉजी के विशेषज्ञ डॉ एम परवेज हसन ने कई महत्वपूर्ण बातें कही. जानें क्या कहते हैं वे?
पर्सनल स्पेस की चाह
आज के युवा को अपने फैसले खुद लेना पसंद है. वे अपने करियर, समय और जीवनशैली में किसी का हस्तक्षेप नहीं चाहते. अकेले रहने से उन्हें आजादी का अनुभव होता है. ऐसा इसलिए भी होता है, क्योंकि आजकल के आधिकांश बच्चे अपने घरों से बाहर या तो पढ़ाई के लिए या फिर नौकरी की तलाश में जाते हैं. इस दौरान उन्हें अपना फैसला खुद लेने की आदत पड़ जाती है. और उम्र के साथ यह आदत और मजबूत होती है. इसलिए भी लोग अकेले रहना पसंद करते हैं.
साइकोलॉजी के डीन डॉ एम परवेज़ हसन का मानना है, ‘समाज में व्यक्तिगत सोच और आत्मनिर्भरता बढ़ी है. नई पीढ़ी अपनी पहचान खुद बनाना चाहती है, इसलिए वह अकेले रहना अधिक सहज मानती है.’
करियर और पढ़ाई को प्राथमिकता
नौकरी या पढ़ाई के लिए दूसरे शहर जाना आम बात हो गई है. करियर को प्राथमिकता देने के कारण लोग परिवार से दूर रहते हैं. बेहतर करियर के लिए लगातार काम करते हैं. इस कारण समय की कमी होती है और इस व्यस्त जीवनशैली में रिश्तों के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है. इसके साथ ही अब लोग अपने परिवार के साथ रहने से ज्यादा अपने भविष्य के बारे में सोचना चाहते हैं. इस कारण वे धीरे-धीरे घर से दूर होते चले जाते हैं.
मी टाइम की भूख
कई लोगों को अकेले रहने से मानसिक शांति मिलती है. भीड़-भाड़ उन्हें पसंद नहीं. वे अपने लिए समय निकाल पाते हैं. इसे आज के समय में लोग मी-टाइम भी कहते हैं. इसमें जो उन्हें पसंद है, वे बस वही करना चाहते हैं. इस कारण से वे अकेलापन के आदि हो जाते हैं. धीरे-धीरे उन्हें उस अकेलापन से प्यार हो जाता है.
डिजिटल दुनिया का प्रभाव
सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने लोगों को व्यक्तिगत नहीं, वर्चुअल रूप से जोड़ दिया है. अब दोस्ती और बातचीत मोबाइल तक सीमित हो गई है. इससे आमने-सामने मिलने की आदत कम हो रही है. इसे हम ऐसे समझ सकते हैं कि अगर हमें किसी अपने की याद आ रही है, तो पहले हम उससे मिलने जाने के बारे में सोचते थे, लेकिन अब उसे एक मैसेज भेज कर या फोन करके ही बात कर लेते हैं. यह कारण भी अपनों के बीच दूरियों को और बढ़ा दे रहा है.
रिश्तों में बढ़ती जटिलता
इन सबके अलावा बदलती सोच और अपेक्षाओं के कारण रिश्तों में तनाव बढ़ रहा है. लोग विवाद और समझौतों से बचने के लिए अकेले रहना आसान समझते हैं. आज के समय में अगर रिश्ते में गलतफहमी पैदा हो गई, तो उसे लोग बात करके नहीं सुलझाना चाहते हैं. लोग ऐसा सोचते हैं कि बात करने से बेहतर है अकेले रहना और खुद के मन की शांति में रहना.
आर्थिक आत्मनिर्भरता
पहले आर्थिक रूप से परिवार पर निर्भरता अधिक थी. अब महिला और पुरुष दोनों आत्मनिर्भर हो रहे हैं. आर्थिक स्वतंत्रता अकेले रहने का आत्मविश्वास देती है. इस वजह से अगर कोई शादी भी टूटती है, तो महिला और पुरुष दोनों को बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि महिला को पता है उसमें इतनी काबिलियत है कि वह भविष्य में सब कुछ संभाल सकती है. इसके साथ पुरुष को भी यह मालूम है कि अगर वह आर्थिक रूप से मजबूत है और अकेले है, तो वह किसी पर आश्रित नहीं रहेगा. खुद सब कुछ कर लेगा.
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इस बदलाव को इस उदाहरण से हम समझ सकते हैं
हाल ही में बेंगलुरु के अवलाहल्ली इलाके से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई. यहां 65 वर्षीय रिटायर्ड ISRO कर्मचारी नागेश्वर राव ने कथित तौर पर अपनी पत्नी संध्या की गला घोंटकर हत्या कर दी. शुरुआती जांच में सामने आया है कि नागेश्वर राव डिप्रेशन का इलाज करा रहे थे और लंबे समय से मानसिक रूप से परेशान थे. अपनी पत्नी कि हत्या करने के बाद उन्होंने खुद भी जान देनी चाही, लेकिन एक परिचित से बात करने के बाद उन्होंने यह कदम नहीं उठाया. डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (व्हाइटफिल्ड) सैदुलु अदावथ के अनुसार, नागेश्वर राव अपनी मृत्यु के बाद पत्नी के भविष्य को लेकर चिंतित थे. इसी मानसिक स्थिति में उन्होंने यह खौफनाक कदम उठाया. दंपति की एक बेटी है जो अमेरिका में रहती है. यह घटना आज के बदलते समाज का एक कठोर सत्य है. अकेलापन और उसकी वजह से हो रही चिंता ने एक बेहतर और संपन्न परिवार को बरबाद कर दिया.
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By Prerna
मैं प्रेरणा प्रभा पिछले 4 साल से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हूं. मैंने लगभग 3 साल ग्राउन्ड रिपोर्टिंग करके सरकार से जुड़े कई मुद्दों को उठाया है, इसके साथ ही कई और बड़ी खबरों को कवर किया है. अभी फिलहाल में प्रभात खबर के लाइफस्टाइल और हेल्थ के सेक्शन में खबरें लिखती हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जो भी पाठक लाइफस्टाइल और हेल्थ के बारे में कुछ खोज रहे हो उन्हें में वो खबरें सरल और आसान भाषा में लिख कर दे सकूं.
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