Premanand Ji Maharaj: जो आपका है वह बिना पकड़े भी आपके पास आएगा- पढ़े प्रेमानंद जी महाराज के अनमोल विचार

Updated at : 19 Jan 2026 11:42 AM (IST)
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Premanand Ji Maharaj Quotes on The Art of Letting Go

Premanand Ji Maharaj Quotes on The Art of Letting Go

प्रेमानंद जी महाराज के अनमोल विचार सिखाते हैं कि जो आपका है, वह बिना पकड़े भी आपके पास आएगा - पढ़े प्रेमानंद जी महाराज के अनमोल विचार

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Premanand Ji Maharaj: जीवन की सबसे बड़ी पीड़ा है जरूरत से ज्यादा लगाव. हम लोगों, रिश्तों, अपेक्षाओं और बीते अनुभवों को इतनी मजबूती से पकड़ लेते हैं कि वही हमारे दुख का कारण बन जाते हैं. प्रेमानंद जी महाराज कहते है कि छोड़ दोगे, वही लौटकर आएगा – जीवन की एक सार्वभौमिक सच्चाई को उजागर करता है. जो आपका है, वह बिना पकड़े भी आपके पास आएगा, और जो आपका नहीं है, उसे कितनी भी कोशिश कर लें, रोक नहीं पाएंगे. जाने देना आपकी कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति है.

पकड़ने से नहीं, छोड़ने से मिलती है शांति (Premanand Ji Maharaj Quotes on The Art of Letting Go)

पकड़ने से नहीं, छोड़ने से मिलती है शांति (Premanand Ji Maharaj Quotes on The Art of Letting Go)
पकड़ने से नहीं, छोड़ने से मिलती है शांति (premanand ji maharaj quotes on the art of letting go)

प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, जब हम जबरदस्ती किसी चीज़ को थामे रहते हैं, तो मन में भय, असुरक्षा और पीड़ा जन्म लेती है. इसके विपरीत, छोड़ना मन और आत्मा को मुक्त करता है.

  1. आसक्ति (Attachment) मनुष्य को बांधती है, और छोड़ देना ही सच्ची मुक्ति का मार्ग है.
  2. खोने का भय और दर्द की आशंका मन की कल्पनाएं हैं, वास्तविकता नहीं इसे स्वीकारे.
  3. छोड़ना एक धीमी और पीड़ादायक प्रक्रिया है, पर यही स्थायी शांति प्रदान करती है.
  4. सच्ची शक्ति पकड़ने में नहीं, बल्कि उस चीज़ को समर्पित करने में है जो आत्मा को कष्ट देती है.
  5. विषाक्त रिश्तों को निभाने से पहले आत्मसम्मान और अंतःशांति को चुनना आवश्यक है.
  6. मन को बल से नहीं, विश्राम से समझाया जाता है; थकने पर ही बोध उत्पन्न होता है.
  7. मौन और एकांत में ही व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानता है और वहीं से उपचार आरंभ होता है.
  8. छोड़ना न घृणा है, न प्रतिशोध – यह जीवन की सच्चाई को स्वीकार करने की कला है.
  9. जो वास्तव में प्रेम करते हैं, वे कभी बार-बार पीड़ा या जबरन दूरी नहीं देते.
  10. जिसके भीतर संतुलन आ जाता है, वह अडिग हो जाता है और किसी पर निर्भर नहीं रहता.
  11. जीवन उन्हें ही गहरी तृप्ति और आध्यात्मिक जागरण देता है, जो छोड़ना सीख लेते हैं.

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Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Pratishtha Pawar

लेखक के बारे में

By Pratishtha Pawar

मैं लाइफस्टाइल कंटेंट राइटर हूं, मीडिया जगत में 5 साल का अनुभव है. मुझे लाइफस्टाइल, फैशन, ब्यूटी, वेलनेस और आध्यात्मिक विषयों पर आकर्षक और दिलचस्प कंटेंट लिखना पसंद है, जो पाठकों तक सही और सटीक जानकारी पहुंचा सके.

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