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Premanand Ji Maharaj: कोटा के छात्र ने महाराज जी से पूछा असफलता के डर से कैसे बाहर निकलें

Updated at : 06 Nov 2024 4:39 PM (IST)
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Premanand Ji Maharaj

Premanand Ji Maharaj

Premanand Ji Maharaj: इस लेख में आपको यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि जब महाराज जी से कोटा में पढ़ रहे एक छात्र ने असफलता से संबंधित प्रश्न किया तो, महाराज जी ने उसका क्या उत्तर दिया.

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Premanand Ji Maharaj: वृंदावन में रहने वाले प्रेमानंद जी महाराज से मिलकर भक्त अपने मन में चल रहे हर मुश्किल प्रश्नों का उत्तर जानना चाहते हैं, ये प्रश्न कभी व्यक्ति के सांसारिक जीवन से संबंधित होते हैं, तो कभी व्यक्ति के आध्यात्मिक जीवन से संबंधित होते हैं. जिस भी व्यक्ति को महाराज जी से मिलने का सौभाग्य प्राप्त होता है, वो उनसे मिलकर भक्ति के मार्ग में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करने का प्रयास करते हैं. इस लेख में आपको यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि जब महाराज जी से कोटा में पढ़ रहे एक छात्र ने असफलता से संबंधित प्रश्न किया तो, महाराज जी ने उसका क्या उत्तर दिया.

छात्र ने पूछा यह प्रश्न

महाराज जी अपने सत्संग के दौरान व्यक्ति का कई तरीकों से मार्गदर्शन करने का प्रयास करते हैं और भक्तों के मन में चल रहे सवालों को भी सुनते हैं. महाराज जी के एक सत्संग के दौरान उनसे कोटा में पढ़ने वाले एक छात्र ने प्रश्न किया कि वह कोटा में दो सालों से पढ़ाई कर रहा है, उसके मन में हमेशा असफलता का डर सताता रहता है और उसे यह समझ नहीं आता है कि आगे क्या करे.

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महाराज जी ने दिया यह उत्तर

छात्र के प्रश्न को सुनकर महात्मा जी ने कहा कि, असफल होने से कभी-कभी डरना नहीं चाहिए और अपने मन में कभी-भी तनाव का भाव नहीं आने देना चाहिए, खुद को भगवान का अंश समझना चाहिए, क्योंकि यह भाव आपके मन में किसी भी प्रकार का डर पनपने नहीं देती है. कुछ बच्चे असफलता के डर से अपने शरीर का त्याग कर देते हैं, ऐसे बच्चे मूर्ख होते हैं, क्योंकि मनुष्य का जीवन पाना बहुत सौभाग्य की बात होती है, इसे केवल परीक्षा के डर से खत्म करना मूर्खता है.

भगवान से न करें ये प्रार्थना

छात्र ने अपने प्रश्न को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वह भगवान से हमेशा अपने सफल होने की प्रार्थना करता है. इस पर महाराज जी ने कहा कि भगवान से कभी-भी सफलता की मांग नहीं करनी चाहिए. बस सही कर्म करते रहना चाहिए और भगवान से बस इतना कहना चाहिए कि आपको जैसा ठीक लगे मेरे साथ वैसा व्यवहार करिए, मैं खुद को आपके सामने समर्पित करता हूँ.

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Tanvi

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