Parenting Tips: स्मार्टफोन और टीवी के साथ चिपका रहता है बच्चा? स्क्रीन टाइम कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये ट्रिक्स

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pic credits: pexels

Parenting Tips: टीवी और स्मार्टफोन बच्चों के लिए पूरी तरह खराब नहीं हैं, लेकिन उनकी लत नुकसानदेह जरूर है. पेरेंट्स अगर सही तरीके से बच्चों का स्क्रीन टाइम कंट्रोल करें, ऑप्शनल एक्टिविटीज का मौका दें और खुद रोल मॉडल बनें, तो बच्चे इस लत से आसानी से दूर हो सकते हैं.

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Parenting Tips: आजकल बच्चों का ज्यादातर समय टीवी, स्मार्टफोन या कम्प्यूटर पर बीतता है. ऑनलाइन गेम्स, कार्टून, सोशल मीडिया और वीडियो की वजह से बच्चे बाहर खेलने या किताबों से दूर हो जाते हैं. धीरे-धीरे यह आदत लत में बदल जाती है और बच्चों की सेहत, पढ़ाई और नींद पर बुरा असर डालती है. ऐसे में पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे सही तरीके अपनाकर बच्चों को इस लत से बचाएं. अगर आपके घर पर भी छोटे बच्चे हैं और वे अपना ज्यादातर समय टीवी और स्मार्टफोन के बीच बिताते हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है. आज हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने बच्चे को टीवी और स्मार्टफोन से दूर रहना सिखा सकते हैं. तो आइए जानते हैं कुछ आसान और असरदार टिप्स.

खुद बनें बच्चे के रोल मॉडल

बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने पेरेंट्स को करते हुए देखते हैं. अगर आप खुद हर समय मोबाइल पर रहेंगे तो बच्चा भी ऐसा ही करेगा. कोशिश करें कि बच्चों के सामने स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम करें और टीवी देखने का समय भी लिमिट करें.

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टाइम लिमिट सेट करें

बच्चों को मोबाइल या टीवी से पूरी तरह दूर रखना पॉसिबल नहीं है लेकिन, आप इसके लिए टाइम लिमिट बना सकते हैं. जैसे दिन में सिर्फ 30 मिनट कार्टून या एक घंटे गेमिंग. जब बच्चे को पता होगा कि स्क्रीन टाइम लिमिटेड है, तो वह खुद भी इसे कंट्रोल करना सीखेगा.

बच्चों को ऑप्शनल एक्टिविटी दें

अक्सर बच्चे बोरियत के कारण मोबाइल या टीवी की तरफ भागते हैं. अगर आप उन्हें दूसरी इंटरेस्टिंग एक्टिविटीज देंगे तो उनकी दिलचस्पी बदल सकती है. जैसे ड्रॉइंग, पेंटिंग, पजल गेम्स, म्यूजिक, डांस या आउटडोर स्पोर्ट्स. जब आप ऐसा करते हैं तो उनका ध्यान खुद-ब-खुद स्क्रीन से हटेगा.

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बच्चों के साथ समय बिताएं

कई बार पेरेंट्स बिजी होने की वजह से बच्चे मोबाइल पर ज्यादा वक्त बिताने लगते हैं. कोशिश करें कि आप डेली बेसिस पर बच्चों के साथ कुछ समय बिताएं. उनसे बातें करें, उनके साथ स्पोर्ट्स या कोई एक्टिविटी करें. जब बच्चों को आपका साथ मिलेगा तो वे अकेलेपन में मोबाइल का सहारा नहीं लेंगे.

पढ़ाई और स्क्रीन को कम्बाइन

अगर बच्चा मोबाइल से बिल्कुल नहीं हट रहा है तो उसे पढ़ाई और लर्निंग से जोड़ें. जैसे एजुकेशनल ऐप्स, पिक्चर बुक्स या डॉक्यूमेंट्री वीडियो. इससे बच्चे का स्क्रीन टाइम भी प्रोडक्टिव होगा और वह नई चीजें सीख भी पाएगा.

घर में नो मोबाइल जोन बनाएं

घर में कुछ जगह और समय को नो मोबाइल जोन घोषित करें. जैसे डाइनिंग टेबल पर मोबाइल नहीं, सोने से एक घंटे पहले मोबाइल नहीं. जब आप ऐसा करते हैं तो धीरे-धीरे बच्चों को डिसिप्लिन की आदत पड़ जाएगी.

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सौरभ पोद्दार

लेखक के बारे में

By सौरभ पोद्दार

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन टॉपिक्स पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की हिंदी में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और SEO-फ्रेंडली होते हैं.

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