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Mars Mission: Mangalyaan ने चुपचाप कहा अलविदा, बैटरी और ईंधन खत्म होने से टूटा संपर्क

Updated at : 03 Oct 2022 5:51 PM (IST)
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Mars Mission: Mangalyaan ने चुपचाप कहा अलविदा, बैटरी और ईंधन खत्म होने से टूटा संपर्क

Mars Mission: मार्स ऑर्बिटर मिशन (MOM), जिसे मंगलयान के नाम से जाना जाता है, को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा 5 नवंबर 2013 को लॉन्च किया गया था. 8 साल की सेवा के बाद अलविदा कहता है क्योंकि इसका ईंधन खत्म हो गया था और बैटरी एक सुरक्षित सीमा से अधिक समय तक चलने के बाद खत्म हो गई है.

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Mars Mission: भारत का मार्स ऑर्बिटर मंगलयान (Mangalyaan) 8 साल की सेवा के बाद अलविदा कहता है क्योंकि इसका ईंधन खत्म हो गया था और बैटरी एक सुरक्षित सीमा से अधिक समय तक चलने के बाद खत्म हो गई है, जिससे इसरो का मंगलयान से संपर्क टूट गया है. मंगलयान मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी. इसने सतह के भूविज्ञान, आकृति विज्ञान, वायुमंडलीय प्रक्रियाओं, सतह के तापमान और वायुमंडलीय पलायन तंत्र सहित मंगल ग्रह के परिदृश्य के अध्ययन में योगदान दिया.

मंगलयान क्या है?

मार्स ऑर्बिटर मिशन (MOM), जिसे मंगलयान के नाम से जाना जाता है, को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा 5 नवंबर 2013 को लॉन्च किया गया था.

मंगलयान भारत का पहला इंटरप्लेनेटरी मिशन था. इंटरप्लेनेटरी मिशन ग्रहों के बीच मौजूद माध्यम के गुणों के साथ-साथ ग्रहों, धूमकेतु और अन्य सौर मंडल की वस्तुओं की विशेषताओं की जांच करते हैं.

केवल 6 महीने तक चलने के लिए निर्मित, मंगलयान ने अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा की जांच की, जिससे भारत अपने पहले प्रयास में सफल होने वाला दुनिया का पहला देश बन गया. स्वदेश में विकसित अंतरिक्ष यान 24 सितंबर 2014 से मंगल की परिक्रमा कर रहा है.

अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण के साथ, भारत रूस के ROSCOSMOS, संयुक्त राज्य अमेरिका के NASA और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के बाद मंगल पर पहुंचने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया. भारत ऐसा करने वाला पहला एशियाई राष्ट्र भी बन गया, क्योंकि इससे पहले कोई अन्य एशियाई राष्ट्र ग्रह पर नहीं पहुंचा था.

क्षमता से ज्यादा किया काम

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक मार्स आर्बिटर मिशन अपना वक्त पूरा कर चुका है. इस ऑर्बिटर ने 8 वर्षों तक काम किया, जबकि इसे सिर्फ 6 महीने तक काम करने की क्षमता के हिसाब से बनाया गया था. यानी कि मिशन उम्मीद से ज्यादा सफल रहा. मंगलयान की सफलता के ऊपर मिशन मंगल नाम से फिल्म भी बनी है.

क्या हुआ था मंगलयान को

अप्रैल 2022 में, अंतरिक्ष यान ने एक लंबी ग्रहण अवधि में प्रवेश किया जिसे इसे झेलने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया था. अंतत: 2 अक्टूबर, 2022 को इसने संचार खो दिया. इसरो के सूत्रों के अनुसार, मंगलयान के काम करना बंद करने की उम्मीद है क्योंकि इसमें ईंधन और बैटरी खत्म हो गई है.

मंगलयान मिशन ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान समुदाय के लिए एक नई सुबह की शुरुआत की. इसे चीन द्वारा “एशिया का गौरव” माना जाता था. 2024 में इसरो द्वारा मार्स ऑर्बिटर मिशन 2, एमओएम -2 या मंगलयान -2 नामक एक अनुवर्ती परियोजना शुरू होने की उम्मीद है.

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