दूसरों के नीचा दिखाने से हो जाते हैं दुखी तो गीता का यह श्लोक पढ़े लें, पूरी तरह मन हो जाएगा शांत

Published by : Sameer Oraon Updated At : 25 May 2025 8:07 PM

विज्ञापन

Gita Updesh

Gita Updesh: भगवद गीता के अनुसार, दूसरों को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति अहंकार, अज्ञान और आसुरी स्वभाव की पहचान है. श्रीकृष्ण ने कहा कि आत्म-विकास का मार्ग दूसरों को गिराकर नहीं, स्वयं को सुधारने से खुलता है. जानें गीता के श्लोकों में छिपा जीवन का यह गूढ़ संदेश.

विज्ञापन

Gita Updesh: दैनिक जीवन में कई बार लोग किसी के नीचा दिखाने पर दुखी हो जाते हैं. चाहे ऑफिस में हो या अपने फ्रेंड्स सर्कल में. लेकिन भगवद गीता में ऐसे लोगों को अंहकार से भरा हुआ कहा गया है और उनकी आलोचना की गयी है. श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिए गए उपदेशों में ऐसे लोगों की प्रवृत्ति की कड़ी निंदा करते की गई है जो दूसरों को नीचा दिखाकर स्वयं को ऊंचा साबित करने की कोशिश करते हैं.

अहंकार है विनाश का कारण

गीता के अनुसार, दूसरों को नीचा दिखाना अहंकार की निशानी है. श्रीकृष्ण ने अध्याय 16 (दैवी और आसुरी सम्पत्तियों) में बताते हैं कि जो लोग दूसरों का अपमान करते हैं, उनका मूल स्वभाव “आसुरी” होता है. वे क्रोध, घमंड, द्वेष और ईर्ष्या से भरे होते हैं.

श्लोक 16.4 में कहा गया है कि
“दम्भो दर्पो अभिमानश्च क्रोधः पारुष्यमेव च.
अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ सम्पदामासुरीम्”
(अर्थ: दिखावा, घमंड, अभिमान, क्रोध, कठोरता और अज्ञान- ये सब आसुरी स्वभाव के लक्षण हैं.)

Also Read: ओशो की इन बातों को समझा तो नहीं टूटेगा आपका प्रेम संबंध, लड़कियां Love You, Love You कहते नहीं थकेंगी

जो दूसरों को गिराते हैं, वे स्वयं नहीं उठ सकते

श्रीमद्भगवद गीता यह स्पष्ट करती है कि आत्म-उन्नति का मार्ग दूसरों को गिराकर नहीं, बल्कि स्वयं को भीतर से सुधारने से खुलता है. जबकि अध्याय 6, श्लोक 5 में कहा गया है:
“उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्.” इसका अर्थ है व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने द्वारा ही अपनों का उद्धार करें, न कि स्वयं को नीचे गिराए.) दूसरों को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति आत्महीनता और असुरक्षा से उपजती है. यह व्यक्ति को भीतर से खोखला कर देती है और उसके आत्मिक विकास में बाधा बनती है.

श्रेष्ठ वही जो सबको समान दृष्टि से देखें

गीता में बताया गया है कि ज्ञानी व्यक्ति वही है जो सभी में एक समान आत्मा को देखता है. चाहे वह ज्ञानी हो, मूर्ख हो, अमीर हो या गरीब. ऐसा व्यक्ति दूसरों को नीचा नहीं दिखाता, बल्कि समत्व (equanimity) का पालन करता है.

श्लोक 5.18 में श्रीकृष्ण कहते हैं
“विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि
शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः”
अथार्त ज्ञानी व्यक्ति ब्राह्मण, गाय, हाथी, कुत्ते और चांडाल में भी समान आत्मा को देखता है.)

Also Read: Hair Care Tips: अब महंगे हेयर ट्रीटमेंट नहीं, इस तरीके से बालों की समस्या को करें दूर

विज्ञापन
Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola