Dating Apps से क्यों दूर भाग रहे हैं Gen Z? वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

Edited by Smita Dey
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सांकेतिक फोटो (AI Generated)

Dating Apps Culture: क्या युवाओं में डेटिंग ऐप्स का क्रेज खत्म हो रहा है. जानिए क्यों Gen Z अब ऑनलाइन स्वाइप करने के बजाय असली दुनिया (In-Person Connection) में रिश्ते बनाने को ज्यादा महत्व दे रही है.

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Dating Apps Culture: कुछ साल पहले तक अगर किसी को नए लोगों से मिलना होता था या रिलेशनशिप की शुरुआत करनी होती थी, तो डेटिंग ऐप्स को सबसे आसान और बेस्ट तरीका माना जाता था. फोन उठाया, राइट-लेफ्ट स्वाइप किया और बात बन गई. लेकिन अब Dating Apps Culture की तस्वीर धीरे-धीरे बदलती नजर आ रही है.

Gen Z (लगभग 18 से 28 साल की उम्र के युवा) अब ऑनलाइन डेटिंग को लेकर पहले जितने एक्साइटेड नहीं हैं. इसके बजाय वे लोगों से वास्तविक जीवन में मिलने और रिश्ते बनाने को ज्यादा महत्व देने लगे हैं. आइए जानते हैं कि आखिर क्यों डिजिटल दौर की यह पीढ़ी अब स्क्रीन से हटकर आमने-सामने के कनेक्शन को ज्यादा पसंद कर रही है.

लगातार स्वाइप करने की थकान

Gen Z का एक बहुत बड़ा हिस्सा इस बात को मानता है कि डेटिंग ऐप्स (Dating Apps Culture) पर लगातार स्वाइप करने की यह प्रोसेस कई बार मानसिक रूप से बहुत थका देती है. फोन की स्क्रीन पर हजारों ऑप्शन होने के बावजूद, एक अच्छी और सार्थक बातचीत होना बहुत मुश्किल हो जाता है. लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते बनाना तो दूर की बात लगती है. बहुत से युवाओं को लगता है कि इन ऐप्स पर बातचीत सिर्फ सतही (superficial) रह जाती है और किसी को गहराई से जानने का मौका यहां बहुत कम मिलता है.

मैच और चैट के इंतजार का स्ट्रेस

डेटिंग ऐप्स (Dating Apps Culture) का यूज करना कई बार एक अलग ही लेवल का तनाव देने लगता है. पहले तो किसी के साथ मैच होने का इंतजार करो, फिर चैट शुरू करो और उसके बाद सामने वाले के रिप्लाई के लिए बार-बार फोन चेक करो. यह पूरा लूप युवाओं को मानसिक रूप से थका देता है. इन ऐप्स पर मौजूद रहने से कई बार युवाओं के अंदर दूसरों से खुद की तुलना करने और असुरक्षा (Insecurity) की भावना भी बढ़ने लगती है, जो उनकी मेंटल हेल्थ के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है.

अब किस तरीके से बन रहे हैं रिश्ते? 

हाल के सालों में “इन-पर्सन कनेक्शन” यानी आमने-सामने मिलकर रिश्ते बनाने का ट्रेंड तेजी से वापस आया है. Gen Z के कई युवा अब दोस्तों के जरिए, कॉलेज, ऑफिस, सामाजिक कार्यक्रमों, हॉबी क्लब्स और अलग-अलग कम्युनिटी इवेंट्स में नए लोगों से मिलना पसंद कर रहे हैं. जब आप किसी से असली जिंदगी में मिलते हैं, तो उसकी बॉडी लैंग्वेज, व्यवहार और उसकी असली पर्सनैलिटी को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं. इससे बने रिश्ते बहुत ही स्वाभाविक और मजबूत महसूस होते हैं.

PC: AI Generated

फोटो नहीं, अब साझा रुचियों को मिल रहा है महत्व

आज की युवा पीढ़ी सिर्फ किसी की सुंदर प्रोफाइल फोटो देखकर या बायो पढ़कर फैसला लेने के मूड में नहीं है. वे अब उन लोगों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनकी सोच और पसंद उनसे मिलती-जुलती हो. यही वजह है कि अब बुक क्लब, फिटनेस ग्रुप, ट्रैवल कम्युनिटी, आर्ट वर्कशॉप और दूसरी सोशल एक्टिविटीज युवाओं के मिलने का नया ठिकाना बन रही हैं. ऐसी जगहों पर उन्हें अपनी जैसी लाइफस्टाइल और पसंद वाले लोग आसानी से मिल जाते हैं, जिससे बात आगे बढ़ाना बहुत सहज हो जाता है.

Dating Apps Culture: क्या सच में खत्म हो रहा है डेटिंग ऐप्स का दौर?

आज भी भारत सहित दुनिया भर में लाखों-करोड़ों लोग इन ऐप्स का यूज कर रहे हैं और कई सफल व खुशनुमा रिश्ते भी वहीं से शुरू होते हैं. हालांकि, Gen Z के एक बड़े हिस्से में यह सोच जरूर मजबूत हो रही है कि रिश्तों की असली गर्माहट सिर्फ मोबाइल की स्क्रीन पर नहीं, बल्कि वास्तविक दुनिया में कदम रखने से ही महसूस की जा सकती है.

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Smita Dey

लेखक के बारे में

By Smita Dey

स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग का शौक रखने वाली स्मिता युवाओं को बेहतर करियर गाइड करना और नौकरी के लिए प्रोत्साहित करना पसंद करती हैं.

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