इंस्टाग्राम पर इश्क और हनीट्रैप का जाल, हमीम की गर्लफ्रेंड अर्पिता सरकार पर जांच एजेंसियों का खुलासा

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अर्पिता सरकार.

अर्पिता सरकार.

जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी हामिद मंडल उर्फ हमीम और उसकी प्रेमिका अर्पिता सरकार से जुड़े मामले में नये खुलासे हुए हैं. सोशल मीडिया, प्रेम संबंध और हनीट्रैप का गठजोड़ सामने आया है, जिसमें एक मंत्री के बेटे को भी निशाना बनाने का दावा किया गया है. इससे पहले कि मंत्री के बेटे का ये लोग अपहरण कर पाते, एसआईटी ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया.

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बर्धमान/पानागढ़ से मुकेश तिवारी की रिपोर्ट

बर्धमान शहर से गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध आतंकवादी हामिद मंडल उर्फ हमीम से पूछताछ में कई नये तथ्य एसआईटी के हाथ लगे हैं. इसी दौरान सोशल मीडिया, प्रेम संबंध और हनीट्रैप का गठजोड़ सामने आया है. पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बताया है कि अर्पिता सरकार का पैतृक घर झारखंड में है. उसके परिवार का मुर्शिदाबाद के फरक्का क्षेत्र से भी संबंध है.

मॉडलिंग और रील बनाने की शौकीन है अर्पिता

अर्पिता ने पूछताछ में एसटीएफ को बताया है कि शुरुआती शिक्षा के बाद उसने झारखंड के साहिबगंज जिले में स्नातक तक की पढ़ाई पूरी की. कॉलेज के दिनों से ही अर्पिता को मॉडलिंग, फोटोग्राफी और सोशल मीडिया पर रील बनाने का शौक था. वह अक्सर बाइक से आसपास के इलाकों में घूमती और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करती थी.

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सोशल मीडिया पर हमीम से हुआ संपर्क

लोकल लेवल पर उसकी पहचान एक आधुनिक और सोशल मीडिया पर सक्रिय युवती के रूप में थी. जांच एजेंसी का दावा है कि सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता के दौरान ही उसकी पहचान हमीम मंडल से हुई. इसके बाद दोनों में कथित तौर पर प्रेम हो गया. इसके बाद वह हमीम की गतिविधियों में मदद करने लगी. पुलिस इसकी जांच में जुट गयी है.

4 साल पहले इंस्टाग्राम पर शुरू हुई दोस्ती

एसटीएफ के अनुसार, करीब 4 वर्ष पहले इंस्टाग्राम पर हमीम मंडल और अर्पिता सरकार की पहचान हुई. हमीम ने खुद को व्यवसायी बताया. बातचीत बढ़ी. व्हाट्सऐप पर संपर्क हुआ. दोनों के बीच कथित प्रेम संबंध बन गये. जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी रिश्ते का इस्तेमाल उसने नेटवर्क तैयार करने में किया.

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मंत्री के बेटे को निशाना बनाने का दावा

जांच एजेंसियों का दावा है कि अर्पिता एक मंत्री के बेटे से कई महीने तक सोशल मीडिया पर संपर्क में रही. अर्पिता ने कथित तौर पर मंत्री के बेटे को प्रेमजाल में फंसाया और ब्लैकमेल करने के बाद मोटी रकम वसूली. बाद में उसके अपहरण की योजना बनायी गयी. हालांकि, इन आरोपों की अदालत में पुष्टि होना बाकी है. जांच जारी है.

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सिर्फ पैसों का खेल या बड़ा नेटवर्क?

एसटीएफ को आशंका है कि यह मामला केवल वसूली तक सीमित नहीं था. जांच इस पहलू पर भी केंद्रित है कि क्या कथित नेटवर्क का इस्तेमाल प्रभावशाली लोगों की पहचान, उनकी गतिविधियों पर नजर रखने और संगठित आपराधिक या आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था. जांच एजेंसियां अब अर्पिता के डिजिटल कॉन्टैक्ट्स और चैट की भी जांच कर रही है.

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सीमा पार कनेक्शन की भी पड़ताल

एसटीएफ की टीम हमीम के कथित विदेशी संपर्कों और सीमा पार बैठे हैंडलरों से जुड़े संभावित लिंक की भी जांच कर रही है. एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस कथित नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे. क्या अलग-अलग राज्यों में इसके नेटवर्क हैं.


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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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