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Eid-Al-Fitr And Eid-Al-Adha: ईद-अल-फित्र और ईद-अल-अधा के बीच क्या है अंतर

Updated at : 11 Jun 2024 12:12 PM (IST)
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Eid-Al-Fitr And Eid-Al-Adha

Eid-Al-Fitr And Eid-Al-Adha

Eid-Al-Fitr And Eid-Al-Adha: इस त्योहार के लिए एक और महत्वपूर्ण रिवाज़ है नमाज़ से पहले ज़कात अल-फ़ित्र, दान का एक रूप अदा करना. इसके बाद, परिवार और दोस्त जश्न मनाने के लिए एक साथ मिलते हैं और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं और उत्सव के भोजन का आनंद लेते हैं.

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Eid-Al-Fitr And Eid-Al-Adha: ईद-अल-फ़ित्र और ईद-अल-अधा, दो इस्लामी त्योहारों के बीच कई बुनियादी मुख्य अंतर हैं. इस लेख के माध्यम से हम यह जानेंगे कि ये त्योहार कैसे अलग हैं. ईद-अल-फ़ित्र और ईद-अल-अधा, दो प्रमुख इस्लामी त्योहार हैं, जिन्हें दुनिया भर के मुसलमान मनाते हैं. दोनों त्योहारों का धार्मिक महत्व है और दोनों में ही आस्थावानों द्वारा सामूहिक प्रार्थना और उत्सव मनाया जाता है. इन दोनों के बीच अंतर उनके अर्थ, अनुष्ठान और प्रथाओं के आधार पर है. यहां कुछ मुख्य अंतर दिए गए हैं.

ईद-अल-फित्र और ईद-अल-अधा का अर्थ और महत्व


उपवास तोड़ने का त्योहार, ईद-अल-फ़ित्र, इस्लाम धर्म में उपवास के पवित्र महीने, रमज़ान के महीने के खत्म होने का उत्सव है. पूरा महीना जश्न से भरा होता है और ईद महीने भर के उपवासों के सफल समापन के लिए आभार व्यक्त करने का दिन है. इस बीच बलिदान का त्योहार, ईद-अल-अधा पैगंबर इब्राहिम (अब्राहम) द्वारा ईश्वर की भक्ति में अपने बेटे की बलि देने की इच्छा और उनके प्रति आज्ञाकारिता के रूप में मनाया जाता है. विश्वासी बलिदान की अवधारणा का सम्मान करते हैं जो बदले में ईश्वर के प्रति उनकी भक्ति को भी प्रदर्शित करता है.

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ईद-अल-फ़ित्र बनाम ईद-अल-अधा: अनुष्ठान और प्रथाएं


भक्त ईद-अल-फ़ित्र के उत्सव की शुरुआत सलात अल-ईद नामक एक विशेष प्रार्थना के साथ करते हैं. यह विशेष उत्सव प्रार्थना मस्जिदों या खुले प्रार्थना स्थलों में सामूहिक रूप से की जाती है. इस त्योहार के लिए एक और महत्वपूर्ण रिवाज़ है नमाज़ से पहले ज़कात अल-फ़ित्र, दान का एक रूप अदा करना. इसके बाद, परिवार और दोस्त जश्न मनाने के लिए एक साथ मिलते हैं और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं और उत्सव के भोजन का आनंद लेते हैं. इस बीच ईद-अल-अज़हा की शुरुआत भी सलात अल-ईद से होती है, हालांकि, इसके तुरंत बाद बलि देने की प्रथा होती है. इसे कुर्बानी के रूप में जाना जाता है और फिर मांस को तीन अनुपातों में बांटते हैं, जैसे- गरीब लोग, रिश्तेदार और खुद या परिवार. माना जाता है कि यह प्रथा साझा करने और दान की भावना पर जोर देती है.

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Bimla Kumari

लेखक के बारे में

By Bimla Kumari

I Bimla Kumari have been associated with journalism for the last 7 years. During this period, I have worked in digital media at Kashish News Ranchi, News 11 Bharat Ranchi and ETV Hyderabad. Currently, I work on education, lifestyle and religious news in digital media in Prabhat Khabar. Apart from this, I also do reporting with voice over and anchoring.

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