क्या आप जानते हैं कहां है भारत का ‘गुड़ का कटोरा’, जहां तैयार होता है सबसे शुद्ध देसी गुड़

भारत का गुड़ का कटोरा (image: AI generated)
Jaggery Bowl of India: क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा जिला भी है जिसे “गुड़ का कटोरा” कहा जाता है? यहां तैयार होने वाला गुड़ अपनी शुद्धता, देसी स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. खास बात यह है कि इस इलाके के गुड़ को जीआई टैग (GI Tag) भी मिल चुका है, जो इसकी पहचान और खासियत को दर्शाता है. आइए जानते हैं कौन स है वो जिला.
Jaggery Bowl of India: भारत का एक ऐसा जिला जो पूरे देश में गुड़ का कटोरा के नाम से जाना जाता है. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में बड़े पैमाने पर गन्ना उगाया जाता है और उसी से पारंपरिक व आधुनिक तरीकों से गुड़ तैयार किया जाता है. यहां का गुड़ अपने स्वाद, शुद्धता और गुणवत्ता के कारण देशभर में पहचाना जाता है. यही वजह है कि इस जिले को “गुड़ का कटोरा” कहा जाता है और यह कृषि व व्यापार दोनों दृष्टि से एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है.
क्यों कहा जाता है गुड़ का कटोरा
मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में स्थित एक प्रमुख कृषि क्षेत्र है, जो खासतौर पर गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है. यहां की मिट्टी बहुत उपजाऊ (दोमट) है और जलवायु भी गन्ने की फसल के लिए बेहद अनुकूल रहती है. पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं और नदियों का पानी किसानों को अच्छी पैदावार करने में मदद करता है. इस जिले में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होने के कारण यहां गुड़ बनाने का काम भी खूब होता है. गांव-गांव में पारंपरिक कोल्हू और भट्टियां लगी होती हैं, जहां ताजा गन्ने के रस से गुड़ तैयार किया जाता है. यहां बनने वाला गुड़ अपने स्वाद, शुद्धता और गुणवत्ता के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. मुजफ्फरनगर में इतनी बड़ी मात्रा में गुड़ का उत्पादन होता है कि इसे देश के कई राज्यों में भेजा जाता है. यही वजह है कि इस जिले को “गुड़ का कटोरा” कहा जाता है यानि ऐसा स्थान जहां गुड़ की भरपूर मात्रा मिलती है.
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आर्थिक स्थिति पर क्या होता है असर
मुजफ्फरनगर में गुड़ उत्पादन का स्तर काफी बड़ा और विविधतापूर्ण है. यहां लगभग 118 तरह की गुड़ की वैरायटी तैयार की जाती हैं, जो अपने स्वाद और गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं. इस उद्योग का वार्षिक कारोबार करीब 4500 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है, जो इसकी आर्थिक मजबूती को दर्शाता है. यह इलाका देश के कुल गुड़ उत्पादन में भी अहम योगदान देता है. यहां पारंपरिक तरीकों और आधुनिक तकनीक का बेहतरीन मेल देखने को मिलता है, जिससे गुड़ का स्वाद, रंग और गुणवत्ता खास बनती है और बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ती रहती है. जिले में 3500 से ज्यादा कोल्हू सक्रिय हैं, जहां बड़े पैमाने पर गुड़ बनाया जाता है.
रोजाना कितना गुड़ का होता है उत्पाद
अनुमान के अनुसार, यहां रोजाना करीब 80 हजार कट्टों तक गुड़ का उत्पादन होता है. यही कारण है कि यह क्षेत्र किसानों के साथ-साथ व्यापारियों के लिए भी आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है. इसके अलावा, सरकार की ‘एक जनपद–एक उत्पाद’ (ODOP) योजना ने भी यहां के गुड़ को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
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By Prerna
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