गढ़वा में सिस्टम फेल: इलाज के अभाव में बुजुर्ग महिला ने तोड़ा दम, अंतिम संस्कार के लिए भी जुटाया गया चंदा

महिला की मौत के बाद मेराल में जुटे लोग
Garhwa Health System: गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड में बुनियादी सुविधाओं और इलाज के अभाव में महादलित बुजुर्ग पार्वती मुसहर की मौत हो गई है. स्थिति ये थी कि चंदा जुटाकर अंतिम संस्कार किया गया. जिसके वजह से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. पढ़ें, क्या है पूरा मामला.
मेराल से संजय तिवारी की रिपोर्ट
Garhwa Health System, गढ़वा: विकास के ऊंचे दावों के बीच गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड की पूर्वी पंचायत स्थित खेरवार टोला से एक बेहद दर्दनाक और प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है. यहां रहने वाली 63 वर्षीय बुजुर्ग पार्वती मुसहर की रविवार दोपहर इलाज और बुनियादी सुविधाओं के घोर अभाव में मौत हो गई. परिजनों के अनुसार, पार्वती लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार चल रही थीं, लेकिन घर की अत्यधिक गरीबी के कारण उन्हें समय पर उचित स्वास्थ्य सुविधा या दवा उपलब्ध नहीं हो सकी. सही इलाज न मिलने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः उन्होंने अपने जर्जर घर में दम तोड़ दिया. इस घटना के बाद से पूरे टोले में मातम पसरा हुआ है और स्थानीय लोगों में प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ गहरा आक्रोश देखा जा रहा है.
कफन-दफन के लिए भी नहीं थे पैसे
महादलित परिवार की पार्वती मुसहर की मृत्यु के बाद इस परिवार की बदहाली और बेबसी का जो मंजर सामने आया, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया. परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी ज्यादा कमजोर थी कि मृतका के शव के विधिवत अंतिम संस्कार और कफन-लकड़ी के लिए भी परिजनों के पास पर्याप्त संसाधन या पैसे उपलब्ध नहीं थे. जब इस मर्मांतक स्थिति की जानकारी स्थानीय ग्रामीणों, समाजसेवियों और पंचायत प्रशासन को मिली, तो उन्होंने तुरंत संवेदनशीलता दिखाई. समाजसेवी देवव्रत मेहता, देव कुमार राम, विनेश मेहता, दिनेश महतो, विनोद चौधरी तथा पंचायत सचिव राधा कुमारी ने तत्काल मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार को आर्थिक और अन्य आवश्यक सहयोग प्रदान किया. इन सभी के सामूहिक प्रयास, तत्परता और चंदे की बदौलत ही पार्वती मुसहर का विधिवत अंतिम संस्कार संपन्न कराया जा सका.
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आदिम युग जैसी जिंदगी जीने को मजबूर मुसहर समुदाय
इस दुखद घटना ने खेरवार टोला में रहने वाले मुसहर समुदाय की बदहाली को पूरी तरह उजागर कर दिया है. स्थानीय ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि वर्षों से इस अंचल में रहने के बावजूद लोग मूलभूत सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए आज भी दर-दर भटक रहे हैं. चुनाव आते हैं और नेता बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता. ग्रामीणों के अनुसार, खेरवार टोला में रहने वाला यह पूरा समुदाय आज के डिजिटल और आधुनिक दौर में भी आदिम युग जैसी अभावग्रस्त जिंदगी जीने को विवश है. टोले के अधिकांश अत्यंत पिछड़े परिवारों के पास सिर छुपाने के लिए न तो पक्का आवास है, न रोशनी के लिए बिजली का कनेक्शन, न पेट भरने के लिए राशन कार्ड और न ही स्वच्छ पेयजल की कोई समुचित व्यवस्था है.
प्रशासन से उठी मांग
बुजुर्ग महिला की इस तरह तड़प-तड़प कर हुई मौत के बाद टोले के ग्रामीणों में व्यवस्था के प्रति गहरा असंतोष है. पीड़ित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, उपायुक्त गढ़वा और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से पुरजोर मांग की है कि मुसहर समुदाय की इस बदहाली और दुर्दशा पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए. उन्होंने जिला प्रशासन से अविलंब इस पूरे टोले में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देने, सभी वंचित परिवारों के नए राशन कार्ड बनाने, टोले में बिजली के खंभे गाड़कर आपूर्ति बहाल करने, स्वच्छ पेयजल के लिए चापाकल लगवाने और सुदूरवर्ती क्षेत्र में नियमित रूप से सरकारी स्वास्थ्य शिविर (मेडिकल कैंप) लगाने की गुहार लगाई है, ताकि भविष्य में किसी अन्य असहाय और गरीब परिवार को ऐसी मर्मांतक परिस्थितियों का सामना न करना पड़े.
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लेखक के बारे में
By समीर उरांव
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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