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Demonetisation Anniversary: नोटबंदी के 7 साल, बदल रही भारत की तस्वीर, जानिए 2016 से पहले कब हुई नोटबंदी

Updated at : 08 Nov 2023 1:45 AM (IST)
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Demonetisation Anniversary: नोटबंदी के 7 साल, बदल रही भारत की तस्वीर, जानिए 2016 से पहले कब हुई नोटबंदी

Demonetisation Anniversary: वर्ष 2016, रात आठ बजे अचानक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का देशवासियों के नाम संबोधन और एक ऐतिहासिक फैसला. रातों -रात नोटबंदी के फैसले ने देशवसियों को चौंका दिया. नोटबंदी के इस निर्णय में 500 और 1000 रुपये के नोट को बंद कर दिया गया था मकसद कालेधन पर शिकंजा कसना था.

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नोटबंदी के निर्णय के बाद दो हजार के नोट जारी किए साथ ही 200, पांच सौ के नए नोट जारी किए. नोटबंदी की घोषणा में 500 और 1000 रुपये के नोट को बंद कर दिया गया था. उसके बाद शुरू हुआ था नोट बदलने की तयसीमा और समयसीमा का दौर।

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नोटबंदी के निर्णय का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन में वृद्धि करने के साथ अवैध गतिविधियों नकली नोटों, काले धन और आतंकवाद को निधि जैसी घटनाओं को रोकना था. ऐसा नहीं है नोटबंदी का यह पहला फैसला था इससे पहले भी 1946 और 1978 में भी नोटबंदी की गई थी.

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2023 में आरबीआई ने 2000 रुपये के नोट की वापसी का फैसला किया .ग्राहकों को 23 मई से लेकर 30 सितंबर के बीच किसी भी बैंक में जाकर 2000 रुपये के नोट बदलने की सुविधा दी गई.

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साल 2016 की नोटबंदी के निर्णय से देश की उस वक्त की तस्वीर बदल गई थी. बैंक और एटीएम के बाहर लंबी लाइनें और नोट बंदलने की जद्दोजहद करते लोग.

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8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नोटबंदी का ऐलान किया जिसके बाद आधी रात से 500 और 1000 के नोट चलन से बाहर कर दिए गए.

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भारतीय इतिहास में 8 नवंबर देश में एक बड़े फैसले और बदलाव की तारीख की गवाह है. आधी रात से 500 और 1000 के नोट का चलन बंद होना फिर नए नोट करेंसी मार्केट में आए 2000, 500 और 200 के नए नोट चलन में आए

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नोटबंदी के 7 साल के बाद अब डिजिटल पेमेंट या कैशलेस पेमेंट में भी खासी तेजी आई है, कोरोना काल में इसे और बढ़ावा मिला. फिलहाल, देश में डिजिटल पेमेंट के ढेरों विकल्प लोगों के पास हैं.

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नोटबंदी के फैसले पर राजनीतिक रूप से काफी चर्चा में रहे इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया है कि इसमें कोई त्रुटि नहीं थी.

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देश में पहली नोटबंदी साल 1946 में हुई थी. भारत के वायसराय और गर्वनर जनरल सर आर्चीबाल्ड वेवेल ने 12 जनवरी 1946 में हाई करेंसी वाले बैंक नोट डिमोनेटाइज करने को लेकर अध्यादेश प्रस्तावित किया था 26 जनवरी रात 12 बजे के बाद से ब्रिटिश काल में जारी 500 रुपये, 1000 रुपये और 10,000 रुपये के हाई करेंसी के नोट प्रचलन से बाहर हो गए थे. Black Money खत्म करने के लिए भारत में साल 1978 में भी नोटबंदी हुई थी. आजाद भारत की यह पहली नोटबंदी थी. इसे कालेधन को खत्म करने के साथ करप्शन रोकने और इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए किया गया था. सरकार ने 16 जनवरी 1978 को 1000 रुपये, 5000 रुपये और 10 हजार रुपये के नोटों को बंद करने की घोषणा की थी

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Meenakshi Rai

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Meenakshi Rai is a contributor at Prabhat Khabar.

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