Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य एक अर्थशास्त्री के साथ कुशल राजनीतिज्ञ और रणनीतिकार थे. उन्होंने शिक्षा और अपनी जिंदगी के अनुभव के आधार पर एक ग्रंथ की रचना की, जो कि चाणक्य नीति के नाम से प्रसिद्ध है. इसमें उन्होंने राजनीति, धर्म, समाज और निजी जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की है. जो व्यक्ति चाणक्य नीति का अध्ययन करता है, उसे जीवन जीने का नया नजरिया मिलता है. इस ग्रंथ में चाणक्य ने पति-पत्नी, माता-पिता, पुत्र और मित्र सभी सामाजिक बंधनों का जिक्र किया है. ऐसे में चाणक्य ने लिखा है कि दोस्ती करते समय व्यक्ति को खास ख्याल रखना पड़ता है. कुछ लोगों से दोस्ती कभी नहीं करनी चाहिए. ऐसे लोगों को हमेशा उसी घड़े की तरह त्याग करना चाहिए, जिसके मुंह पर दूध जरूर होता है, लेकिन घड़े के अंदर विष भरा हुआ होता है.
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नहीं होते भरोसे के काबिल
चाणक्य नीति के एक श्लोक में बताया गया है कि व्यक्ति को खोटे लोगों से दोस्ती नहीं करनी चाहिए. ये लोग भरोसे के काबिल नहीं होते हैं. इस बात का हमेशा डर बना रहता है कि आपसे लड़ाई होने पर ये लोग आपके राज कभी भी उजागर कर सकते हैं. ये लोग तनाव कम करने के बजाय बढ़ाने का काम करते हैं. ऐसे में इन लोगों से भूलकर भी दोस्ती नहीं करनी चाहिए.
हमेशा संकट में घिरे रहेंगे
चाणक्य नीति के अनुसार, मूर्ख लोगों से दोस्ती करना खतरे से खाली नहीं होता है. जो लोग मूर्ख लोगों से दोस्ती करते हैं, वे हमेशा संकटों से घिरे हुए रहते हैं. चाणक्य कहते हैं कि मूर्ख व्यक्ति से बुद्धिमान व्यक्ति की शत्रुता ही ठीक होती है.
आपकी भावनाओं की नहीं करते कद्र
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अहंकारी लोगों से हमेशा दूरी बनाकर ही रहना चाहिए, क्योंकि अपने को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए ये लोग आपकी भावनाओं की कोई कद्र नहीं करते हैं. ये आपकी छवि और इज्जत को बर्बाद कर सकते हैं. इन लोगों की न तो शत्रुता ही अच्छी होती है और न ही दोस्ती ही. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि इन लोगों से दोस्ती के बजाय आपको अकेले रहना ही सही होगा.
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