JoSAA में 'Float' और 'Sliding' में क्या है अंतर? सीट मिलने पर छात्र न करें ये गलती

Edited by Smita Dey
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स्टूडेंट की सांकेतिक फोटो (AI Generated)

JoSAA Counselling: जोसा में फ्लोट और स्लाइडिंग ऑप्शन को लेकर हैं कंफ्यूज. जानें दोनों का अंतर क्या है. सीट अलॉट होने के बाद छात्र भूलकर भी न करें यह गलती.

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JoSAA Counselling: इंजीनियरिंग में एडमिशन के लिए जोसा की काउंसलिंग किसी चक्रव्यूह से कम नहीं लगती. यहां हर  कदम सोच-समझकर उठाना पड़ता है. सीट अलॉट होने के बाद छात्रों के सामने तीन ऑप्शन आते हैं Freeze, Float और Sliding. अक्सर स्टूडेंट्स ‘स्लाइडिंग ऑप्शन को लेकर थोड़े कन्फ्यूज रहते हैं. आइए जानते हैं कि यह स्लाइडिंग ऑप्शन क्या है और JoSAA Counselling के दौरान इसका स्मार्ट यूज करके आप अपनी मनपसंद ब्रांच कैसे पा सकते हैं. 

क्या है JoSAA में ‘Sliding’ का ऑप्शन? 

जब आपको जोसा के किसी राउंड में कोई सीट मिलती है और आप उस इंस्टीट्यूट से तो पूरी तरह संतुष्ट हैं, लेकिन चाहते हैं कि उसी कॉलेज में आपको ऊपर की चॉइस (बेहतर ब्रांच) मिल जाए, तब आपको ‘Sliding’ ऑप्शन चुनना चाहिए. 

उदाहरण के लिए अगर आपको IIT बॉम्बे में ‘केमिकल इंजीनियरिंग’ अलॉट हुई है और आपकी प्रेफरेंस लिस्ट में ऊपर IIT बॉम्बे की ही ‘डेटा साइंस’ या ‘कंप्यूटर साइंस’ है, तो स्लाइडिंग चुनने पर अगले राउंड्स में आपको उसी IIT बॉम्बे में अपग्रेडेशन का मौका मिलेगा. इस ऑप्शन में आपको किसी दूसरे कॉलेज की सीट ट्रांसफर नहीं की जाएगी. 

JoSAA Counselling: फ्लोट और स्लाइडिंग में क्या अंतर है? 

कई छात्र इन दोनों विकल्पों में गलती कर बैठते हैं, जिससे उनके हाथ से अच्छा कॉलेज निकल जाता है. 

विशेषता (Features)Float (फ्लोट)Sliding (स्लाइडिंग)
कॉलेज बदलेगाहां, अगले राउंड में बेहतर कॉलेज मिल सकता है. नहीं, आपका कॉलेज पूरी तरह ‘लॉक’ हो जाता है. 
ब्रांच बदलेगीहां, दूसरे कॉलेज की बेहतर ब्रांच मिल सकती है. हां, लेकिन सिर्फ उसी अलॉटेड कॉलेज के अंदर. 
यह कब चुनेंजब आप कॉलेज और कोर्स दोनों अपग्रेड करना चाहते हैं. जब आपको कॉलेज पसंद हो, बस कोर्स बेहतर चाहिए. 

JoSAA Counselling में स्लाइडिंग ऑप्शन का फायदा कैसे उठाएं?

  • पसंदीदा कॉलेज मिलने पर ही चुनें: इस ऑप्शन का यूज तभी करें जब आपको अपनी पसंद का संस्थान (जैसे आपका होम-स्टेट NIT या कोई टॉप IIT) मिल चुका हो और आप शहर या कैंपस बदलने के मूड में बिल्कुल न हों. 
  • चॉइस फिलिंग लिस्ट को री-चेक करें: स्लाइडिंग तभी काम करेगी जब आपने उस कॉलेज की बेहतर ब्रांचेस को अपनी चॉइस फिलिंग लिस्ट में उस अलॉटेड सीट से ‘ऊपर’ (Higher Preference) रखा हो. अगर अच्छी ब्रांच नीचे रह गई है, तो सिस्टम उसे अपग्रेड नहीं करेगा. 
  • सीट एक्सेप्टेंस फीस और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: स्लाइडिंग का फायदा उठाने के लिए आपको पहले राउंड में मिली सीट को प्रोविजनली स्वीकार करना होगा. इसके लिए सीट एक्सेप्टेंस फीस भरें और ऑनलाइन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का प्रोसेस समय पर पूरा करें, वरना आप JoSAA काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे. 

यह भी पढ़ें: JoSAA वेरिफिकेशन में न करें ये 6 गलतियां, हाथ से निकल जाएगी IIT-NIT की सीट

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Smita Dey

लेखक के बारे में

By Smita Dey

स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग का शौक रखने वाली स्मिता युवाओं को बेहतर करियर गाइड करना और नौकरी के लिए प्रोत्साहित करना पसंद करती हैं.

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