World Hepatitis Day 2023: हेपाटाइटिस के जानें इसके लक्षण, प्रकार व बचने के उपाय

Published by : Shradha Chhetry Updated At : 28 Jul 2023 9:29 AM

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हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपाटाइटिस दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है. इस बीमारी का परीक्षण कराना और उन्हें इलाज मुहैया कराना है. हेपेटाइटिस वायरस के कई प्रकार हैं, जैसे हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, हेपेटाइटिस डी और हेपेटाइटिस ई.

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हेपेटाइटिस वायरल इन्फेक्शन्स का एक समूह है, जो हमारे लिवर को प्रभावित करता है. वक्त रहते इन संक्रमणों का पता लगाना बहुत जरूरी है. क्योंकि यह हर साल कई मौतों के लिए जिम्मेदार होता है. हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपाटाइटिस दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है. इस बीमारी का परीक्षण कराना और उन्हें इलाज मुहैया कराना है. हेपेटाइटिस वायरस के कई प्रकार हैं, जैसे हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, हेपेटाइटिस डी और हेपेटाइटिस ई. ये सभी प्रकार लिवर को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर सकते हैं.

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हेपेटाइटिस ए और ईः दूषित पेयजल और अस्वच्छ खाद्य पदार्थों को ग्रहण करना इन दोनों हेपेटाइटिस से ग्रस्त होने के प्रमुख कारण हैं. हेपेटाइटिस ए और इ, हेपेटाइटिस बी और सी की तुलना में लिवर को कम क्षति पहुंचाते हैं. खान-पान में संयम और समुचित इलाज कराने पर इन दोनों से छुटकारा मिल जाता है.

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हेपेटाइटिस बी और सीः लिवर को गंभीर रूप से क्षति हेपेटाइटिस बी और सी से पहुंचती है. गलत तरीके से रक्त चढ़वाने, संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं, जैसे- टूथब्रश और रेजर आदि के इस्तेमाल से वायरस अन्य स्वस्थ लोगों को भी संक्रमित कर सकता है. वहीं जो लोग नशे का इंजेक्शन लेते हैं या फिर असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करते हैं, उनमें हेपेटाइटिस बी और सी होने का खतरा कहीं ज्यादा होता है.

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हेपेटाइटिस डी : आमतौर पर अगर कोई व्यक्ति हेपेटाइटिस बी और सी से ग्रस्त है, तो उसे हेपेटाइटिस डी से संक्रमित होने का खतरा भी कहीं ज्यादा होता है. हेपेटाइटिस डी के मामले में लिवर में सूजन लंबे समय तक बनी रहती है.

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हेपेटाइटिस ए और इ का पता करने के लिए ‘आइजीएम’ एंटीबॉडी टेस्ट कराया जाता है. हेपेटाइटिस बी वायरस का पता करने के लिए डीएनए लेवेल टेस्ट किया जाता है. वहीं, हेपेटाइटिस सी के लिए आरएनए टेस्ट और जीनोटाइपिंग टेस्ट कराये जाते हैं. इसके अलावा लिवर फंक्शन टेस्ट, सीबीसी, किडनी फंक्शन टेस्ट भी कराते हैं.

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हेपेटाइटिस से बचने के लिए वैक्सीन एक महत्वपूर्ण उपाय है. हेपेटाइटिस बी वैक्सीन विशेष रूप से प्रभावशाली है और इसे बच्चों और वयस्कों को दिया जा सकता है. हेपेटाइटिस के लक्षण दिखने पर इन्हें नजरअंदाज न करें. समय-समय पर इसकी नियमित जांच कराना जरूरी है ताकि जल्दी से सही इलाज करवाया जा सके.

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