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हेल्दी लंग्स के माध्यम से बच्चों में अस्थमा के बारे में जागरूकता फैलाने का संकल्प, पढ़ें क्या है अभियान

Updated at : 14 Nov 2022 4:57 PM (IST)
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हेल्दी लंग्स के माध्यम से बच्चों में अस्थमा के बारे में जागरूकता फैलाने का संकल्प, पढ़ें क्या है अभियान

Healthy Lungs: इस बाल दिवस पर हेल्दी लंग्स ने माता-पिता तक सही जानकारियां पहुंचाने का निर्णय लिया है ताकि वे अपने बच्चों के बारे में बेहतर निर्णय ले सकें. जानें इस अभियान के बारे में पूरी डिटेल.

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Healthy Lungs: बच्चे परिवार के सबसे नाजुक और मासूम सदस्य होते हैं और उन्हें बड़ों से विशेष देखभाल और ध्यान देने की आवश्यकता होती है. राष्ट्रीय बाल दिवस बच्चों के कल्याण के बारे में जागरूकता बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है कि उनका भविष्य बेहतर हो. बाल दिवस पर, अल्केम ने अपनी पहल “हेल्दी लंग्स” के माध्यम से बच्चों में अस्थमा के बारे में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया है.

www.thehealthylungs.com पर ले सकते हैं फेफड़ों से जुड‍़ी बीमारी की जानकारी

हेल्दी लंग्स पोर्टल (www.thehealthylungs.com) एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां आपको फेफड़ों से संबंधित बीमारियों की जानकारियां एक ही स्थान पर मिल जाएंगी. यह पोर्टल मरीजों के लिए भी अपने अनुभव साझा करने की सुविधा उपलब्ध कराता है, ताकि रोगी समुदाय तक भी पहुंच संभव हो सके.

बच्चों में होने वाली सबसे सामान्य बीमारी है अस्थमा

अस्थमा एक प्रमुख गैर-संचारी रोग (एनसीडी) है, जो बच्चों और वयस्कों दोनों को प्रभावित करता है और बच्चों में होने वाली यह सबसे सामान्य दीर्घकालिक बीमारी है. अस्थमा के अधिकतर मामलों में इसका समय पर निदान और उचित उपचार नहीं किया जाता है, विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में. डॉक्टरों ने बच्चों में अस्थमा के बेहतर प्रबंधन के लिए सटीक जानकारियों तक पहुंच के महत्व पर प्रकाश डाला है. इस बाल दिवस पर हेल्दी लंग्स ने माता-पिता तक सही जानकारियां पहुंचाने का निर्णय लिया है ताकि वे अपने बच्चों के बारे में बेहतर निर्णय ले सकें.

भारत में अस्थमा के 3 करोड़ 78 लाख मामले

अस्थमा पर हाल ही में प्रकाशित महामारी विज्ञान के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में अस्थमा के 3 करोड़ 78 लाख मामले हैं और भारत अस्थमा से होने वाली वैश्विक मौतों में 42 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है. बचपन में अस्थमा और एलर्जी के अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन (आईएसएएसी) में, सांस लेते समय घरघर की आवाज आने के मामले वैश्विक स्तर पर 6-7 साल के बच्चों में 11.6 प्रतिशत और 13-14 साल के बच्चों में 13.7 प्रतिशत होने का अनुमान है.

बच्चों में अस्थमा के कारण

भारत में, अस्थमा के कारण हर साल बच्चों की एक करोड़ दिन की स्कूल की छुट्टी हो जाती है और यह बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने का तीसरा प्रमुख कारण है. नवजात शिशुओं और स्कूल नहीं जाने वाले छोटे बच्चों में इनडोर और आउटडोर वायु प्रदूषण और सेकेंड हैंड धुम्रपान के एक्सपोजर के कारण अस्थमा जैसी दीर्घकालिक सांस की बीमारियों का जोखिम जीवनभर के लिए बढ़ जाता है. भारत बच्चों में यातायात से संबंधित प्रदूषण के कारण अस्थमा के मामलों में दूसरे स्थान पर है. विश्वभर में, 5 साल और उससे अधिक उम्र के 11-14 प्रतिशत बच्चे वर्तमान में अस्थमा के लक्षणों की शिकायत करते हैं और इनमें से अनुमानित 44 प्रतशित पर्यावरणीय जोखिम से संबंधित हैं. समय रहते उपचार न कराने से अस्थमा गंभीर हो सकता है और अक्सर फेफड़ों के दौरे का कारण बनता है जिसके लिए तत्काल अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है.

अस्थमा फेफड़े की बीमारी से संबंधित समस्या

अस्थमा बार-बार होने वाली फेफड़े की सूजन से संबंधित विकार है जिसमें कुछ ट्रिगर वायुमार्ग की सूजन का कारण बनते हैं और उन्हें अस्थायी रूप से संकरा कर देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप सांस लेने में कठिनाई होती है. निदान इस पर आधारित होता है कि बच्चा कितनी बार घरघर की आवाज के साथ सांस लेता है, अस्थमा का पारिवारिक इतिहास है या नहीं और फेफड़े कितनी अच्छी तरह काम कर रहे हैं उसके लिए की जाने वाली जांचों के परिणाम क्या हैं. हालांकि, अक्सर अस्थमा के ट्रिगर्स से बचकर लक्षणों को रोका जा सकता है, वैसे स्वस्थ जीवन जीने के लिए इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स और ब्रोन्कोडायलेटर्स जैसे दीर्घकालिक उपचारों की आवश्यकता होती है.

अस्थमा को मैनेज करने में चुनौतियां

बच्चों में अस्थमा के प्रबंधन में प्रमुख चुनौतियों में से एक है, माता-पिता को अपने बच्चों में श्वसन संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जल्द से जल्द बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए. बच्चों के अस्थमा को नियंत्रण में रखने के लिए माता-पिता को इनहेलेशन उपकरणों के प्रभावी और नियमित इस्तेमाल के बारे में शिक्षित करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है.

अल्केम लेबोरेटरीज लिमिटेड के बारे में जानें

1973 में स्थापित और मुंबई में स्थित मुख्यालय, अल्केम (एनएसई: अल्केम, बीएसई: 539523, ब्लूमबर्ग: अल्केम.इन, रॉयटज: अल्के.एनएस) एक प्रमुख भारतीय दवा कंपनी है, जो औषधियों और पौष्टिक औषधीय उत्पादों के विकास, निर्माण और बिक्री में लगी हुई है. कंपनी ब्रांडेड जेनरिक, जेनेरिक दवाओं, सक्रिय औषधीय सामग्री (एपीआई) और पौष्टिक औषधीय उत्पादों का उत्पादन करती है, जिसका वह भारत और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में विपणन करती है. भारत में 800 से अधिक ब्रांडों के पोर्टफोलियो के साथ, अल्केम घरेलू बिक्री के मामले में भारत की पांचवीं सबसे बड़ी दवा कंपनी है (स्रोत: आईक्युवीआईके मार्च 2021). कंपनी की 40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी उपस्थिति है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका इसका प्रमुख बाजार है.

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