Breast Cancer due to Hormonal Imbalance : क्या हार्मोनल इंबैलेंस से भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा?

Published by : Shreya Ojha Updated At : 25 Jul 2024 8:52 PM

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Breast Cancer due to Hormonal Imbalance : ब्रेस्ट कैंसर एक बहुत ही जटिल और कई कारकों द्वारा होने वाला कैंसर है जिसने, वैश्विक स्तर पर कोहराम मचा रखा है.

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Breast Cancer due to Hormonal Imbalance : ब्रेस्ट कैंसर एक बहुत ही जटिल और कई कारकों द्वारा होने वाला कैंसर है, जिसने वैश्विक स्तर पर कोहराम मचा रखा है. महिलाओं में होने वाले सभी कैंसर में विश्व भर में ब्रेस्ट कैंसर की केसेस बहुत ज्यादा देखे जा रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रेस्ट कैंसर के पीछे का एक बहुत बड़ा कारण होता है शरीर में हारमोंस का असंतुलित होना. इसीलिए ब्रेस्ट कैंसर और हार्मोनल इंबैलेंस के बीच कि कड़ी जानना इस घातक बीमारी के इलाज और बचाव के तरीके का पता लगाने के लिए बहुत जरूरी है. चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

Breast Cancer due to Hormonal Imbalance : कौन से हार्मोन होते हैं जिम्मेदार?

महिलाओं के शरीर में उनके अंडाशय मैं बनने वाले दो हारमोंस एस्ट्रोजन और प्रोगैस्टरॉन स्तन कैंसर के विकास एवं होने का एक बहुत बड़ा कारण होते हैं. एस्ट्रोजन टिशूज के विकास और विभाजन को उत्तेजित करने में सहायक होता है, जिसके कारण बेस्ट टिशूज में कैंसर होने वाले म्यूटेशंस भी संभव होते हैं. इसके अलावा प्रोजेस्टेरोन हार्मोन भी स्तन के विकास में और मासिक धर्म के चक्र को नियंत्रित करने में सहायक होता है.

Breast Cancer due to Hormonal Imbalance : शरीर में हार्माेनरल इंबैलेंस होने के कारक.

हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एच आर टी)

लंबे समय तक हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी जिसमें विशेष रूप से एस्ट्रोजन प्रोजेस्टेरोन थेरेपी लेने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. महिलाएं जो हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेती है उन्हें उसके फायदे एवं नुकसान के बारे में अपने डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद ही थेरेपी का चुनाव करना चाहिए.

प्रजनन संबंधी कारक

कुछ प्रजनन संबंधी कारक जैसे की माहवारी का 12 वर्ष से पहले होना, मेनूपॉज का बचपन की उम्र तक विलंब होना, उम्र बढ़ने पर पहली बार गर्भावस्था का धारण करना और बांझपन भी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को काफी ज्यादा बढ़ा देते हैं, क्योंकि इन स्थितियों में भी शरीर में हारमोंस का संतुलन बिगाड़ सकता है.

मदिरापान करना

नियमित रूप से और अत्यधिक मदिरापान करने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करने के लिए शराब का सेवन कम कर देना चाहिए या फिर एकदम से बंद कर देना भी उपयुक्त चुनाव होता है.

मोटापा और शारीरिक गतिविधियां ना करना

मोटापा, खास करके मेनू पॉज के बाद वाला मोटापा ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को काफी ज्यादा बढ़ा देता है. शरीर में ऐडिपोस टिशु के बढ़ने से शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का सेक्रेशन भी बढ़ जाता है और एस्ट्रोजन हार्मोन का बढ़ता स्तर ब्रेस्ट कैंसर के टीशूज के विकास को बढ़ावा देता है. लगातार शारीरिक गतिविधियों में सम्मिलित न होने से भी इसका खतरा बढ़ जाता है वजन में संतुलन बनाए रखने से और संतुलित आहार के सेवन एवं लगातार शारीरिक व्यायाम करने से ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को काम किया जा सकता है.

पर्यावरणीय प्रभाव

लंबे समय तक आयनाइजिंग रेडिएशन, मेडिकल इमेजिंग टेस्ट और रेडिएशन थेरेपी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा काफी हद तक बढ़ा देती है. इसके अलावा फैक्ट्रीयों में काम करने वाली महिलाएं जो रासायनिक प्रदूषण के संपर्क में आती है या पर्यावरण में प्रदूषण भी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ावा देता है. ऐसी जगह के कम संपर्क में रहने से और जरूरी बचावों के नियमों का पालन करने से ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को काम किया जा सकता है.

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