बिहार: बढ़ती गर्मी से बढ़ा डायरिया व पीलिया का खतरा, दो दिन में 310 भर्ती, बचाव के लिए इन बातों का रखें ख्याल
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 18 Apr 2023 11:08 PM
राज्य में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है. बढ़ती गर्मी के साथ बिमारियों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है. इसी बीच मुजफ्फरपुर जिले में गर्मी के लगातार बढ़ने से बड़ी संख्या में बच्चे डायरिया व पीलिया के शिकार हो रहे हैं. पिछले दो दिनों में सरकारी अस्पतालों में 310 बीमार बच्चे भर्ती किये गये हैं.
बिहार: राज्य में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है. बढ़ती गर्मी के साथ बिमारियों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है. इसी बीच मुजफ्फरपुर जिले में गर्मी के लगातार बढ़ने से बड़ी संख्या में बच्चे डायरिया व पीलिया के शिकार हो रहे हैं. पिछले दो दिनों में सरकारी अस्पतालों में 310 बीमार बच्चे भर्ती किये गये हैं. इनमें सदर अस्पताल, एसकेएमसीएच व शहरी चार पीएचसी शामिल हैं. सदर अस्पताल व एसकेएमसीएच के बच्चा वार्ड में भर्ती बच्चों में 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे डायरिया से पीड़ित हैं. इसके अलावा मेल व फीमेल वार्ड में भी डायरिया व पीलिया से पीड़ित होकर लोग भर्ती हैं.
वायरल हेपेटाइटिस या जॉन्डिस को आमतौर पर लोग पीलिया कहते हैं. यह सूक्ष्म विषाणुओं से होता है. शुरुआती तौर पर लक्षण नहीं दिखाई देते, लेकिन कुछ समय बाद इसके उग्र तेवर देखने को मिलते हैं. इससे रोगी की आंखें व नाखून पीला दिखाई देने लगते हैं. जिस वाइरस से यह होता है, उसके आधार पर पीलिया तीन प्रकार की होती है, वायरल हेपेटाइटिस ए, वायरल हेपेटाइटिस बी और वायरल हेपेटाइटिस नान ए व नान बी. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ चिन्मयी बताते हैं कि यह रोग ऐसे स्थान पर होता है जहां के लोग साफ-सफाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देते. आमतौर पर प्रदूषित पानी, दूध और भोजन या फिर पीड़ित व्यक्ति के मल से इसका प्रसार होता है.
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शरीर में पीलापन.
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रोगी को बुखार रहना.
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भूख न लगना.
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जी मिचलाना और उल्टियां होना.
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सिर में दर्द.
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पेशाब पीला होना.
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अत्यधिक कमजोरी और थका-थका सा होना.
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चिकनाई वाले भोजन से अरुचि.
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साफ पानी पीएं.
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उबालकर पीना उत्तम.
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ताजा व शुद्ध गर्म भोजन करें.
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स्वच्छ शौचालय का प्रयोग करें.
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खाना बनाते समय, खाते समय साबुन से हाथ साफ रखें.
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भोजन जालीदार ढक्कन से ढंककर ही रखें, ताकि मक्खियां उसे प्रदूषित न कर सकें.
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शरीर में पीलापन होने पर डॉक्टर से संपर्क करें.
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डॉक्टर की सलाह पर प्रोटीन और कार्बोज युक्त भोजन लें.
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नीबू, संतरे तथा अन्य फलों का रस फायदेमंद होता है.
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वसायुक्त गरिष्ठ भोजन का सेवन नुकसानदायक.
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चावल, दलिया, खिचड़ी, उबले आलू, चीनी, ग्लूकोज और गुण का सेवन करना चाहिए.
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गंदे पानी का सेवन.
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प्रदूषित खाद्य पदार्थ का सेवन.
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गंदगी के बीच रहन-सहन.
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अंतड़ियों में अधिक द्रव का जमा होना.
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अतड़ियों में मल का तेजी से गुजरना.
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शुद्ध पानी पीएं.
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उबालकर पीना उत्तम रहेगा.
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हमेशा ताजा और गर्म खाना खाएं.
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साफ-सुधरे माहौल में रहें.
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बाजार के खाद्य पदार्थो का कम से कम सेवन करें.
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सड़े-गले या कटे हुए फलों का न करें इस्तेमाल.
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