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Health News: 30 से 35 साल की महिलाएं कमर दर्द को हल्के में न लें, जानें इसके कारण और निवारण

कमर दर्द को नजरअंदाज करने से यह बीमारी के रूप में उभरकर सामने आती है. इसके अलावा महिलाओं को हर माह आने वाली मासिक की वजह से भी कमर दर्द की शिकायत होती है. इस दौरान सामान्य से ज्यादा होने वाले दर्द को डिस्मेनोरिया कहते हैं.

मौजूदा समय में महिलाओं में कमर दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है. 30 से 35 साल की उम्र की महिलाओं में कमर दर्द की समस्या अधिक होती है. इसे महिलाएं हल्के में लेती हैं. ऐसा करना उनके लिए घातक हो सकता है. मांसपेशियों को ओवरस्ट्रेच करना, शरीर को गलत तरीके से मूव करना, गलत तरीके से बैठना, उठना, संतुलित आहार न लेना, एक्सरसाइज न करना कमर दर्द के मूल कारण हैं.

कमर दर्द को करेंगे नजरअंदाज तो हो जायेगी बीमारी

कमर दर्द को नजरअंदाज करने से यह बीमारी के रूप में उभरकर सामने आती है. इसके अलावा महिलाओं को हर माह आने वाली मासिक की वजह से भी कमर दर्द की शिकायत होती है. इस दौरान सामान्य से ज्यादा होने वाले दर्द को डिस्मेनोरिया कहते हैं. इसकी वजह से दर्द पेट के नीचे, पीठ के निचले हिस्से और कमर में होता है.

कमर दर्द के कारण

गलत बिस्तर का चयन व गलत तरीके से बैठना, अचानक खड़े होना, आगे की तरफ गलत तरह से झुकना या गलत तरीके से की गई एक्सरसाइज, ओवर वेट होना, हड्डियों के कमजोर होने पर भी कमर दर्द होता है.

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यूट्रस में इंफेक्शन से भी होता है कमर दर्द

स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ निकिता सिन्हा कहती हैं कि महिलाओं में यूट्रस की समस्या कॉमन है. इसमें इंफेक्शन होने पर भी कमर में दर्द होता है. बच्चेदानी का अपनी जगह से खिसक जाना, बच्चेदानी में गांठ, उसमें सूजन होना होने पर कमर दर्द की समस्या बढ़ जाती है. संक्रमण के कारण व्हाइट डिस्चार्ज होता है. धीरे धीरे यह समस्या बढ़ने लगती है. ऐसे में फौरन चिकित्सकीय परामर्श लें. बच्चेदानी में गांठ होने पर भी कमर दर्द की समस्या होती है. ये गांठे जब बढ़ने लगती है, तब दर्द भी बढ़ने लगता है. गांठ को गलाने के लिए दवा की जगह सर्जरी कराना ज्यादा लाभदायक है. दूरबीन से आसानी से सर्जरी हो जाती है. अगर परिवार पूरा हो गया हो तो यूट्रस निकलवा दें. प्रेगनेंसी के दौरान भी कमर दर्द होती है. गर्भावस्था में पांचवे महीने में कमर दर्द ज्यादा बढ़ जाता है.

लें संतुलित आहार

डायटीशियन मनीषा मीनू ने कहना है कि प्रेग्नेंसी में पीरियड्स की समस्या या महिलाओं में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से कैल्शियम डिप्लीशन या कैल्शियम की कमी हड्डी में अक्सर पायी जाती है. इससे बचने के लिए खाने में पर्याप्त मात्रा में सब्जी और फल लें. विटामिन सी युक्त भोजन जैसे आंवला अमरूद, संतरा, डायट में शामिल करें. सोयाबीन, ग्रीन वेजिटेबल्स, स्प्राउट्स में सही मात्रा में विटामिन और मैग्नीशियम मिलता है. दूध से बनी हुई चीजों से कैल्शियम मिलता हे. रागी में भी काफी कैल्शियम होता है. इसे भी डायट में शामिल करें.

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फिजिकल एक्टिविटी, एक्सरसाइज से बचाव

फिजियोथेरेपिस्ट अंशु गिरि का कहना है कि हाई सोसाइटी व मीडियम सोसाइटी की महिलाओं में कमर दर्द, पीठ दर्द की समस्या अधिक पायी जा रही है. हमारे पास प्रतिदिन तीन से चार महिलाएं कमर दर्द की समस्या लेकर आती हैं. इससे बचने के लिए फिजिकल एक्टिविटी के साथ रोज की एक्सरसाइज जरूरी है. मार्निंग वॉक करें. महिलाओं में मसल वीकनेस बहुत जल्दी आती है, क्योंकि बोन डेंसिटी वीक होती है. मांसपेशियों में तनाव है या किसी चोट की वजह से दर्द हो रहा है तो आइस पैक का इस्तेमाल करें. हीटिंग पैड से ब्लड सर्क्युलेशन बेहतर होता है. इससे कमर की मांसपेशियों को आराम मिलता है.

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