मेगालिथ स्थल से सूर्य के उत्तरायण से दक्षिनायण की ओर जाने के रोमांच को देखने जुटे लोग, अब धीरे- धीरे बढ़ेगी ठंड

Updated at : 23 Sep 2020 6:12 PM (IST)
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मेगालिथ स्थल से सूर्य के उत्तरायण से दक्षिनायण की ओर जाने के रोमांच को देखने जुटे लोग, अब धीरे- धीरे बढ़ेगी ठंड

Jharkhand news, Hazaribagh news : झारखंड के हजारीबाग जिले बड़कागांव प्रखंड स्थित पंकरी बरवाडीह के मेगालिथ स्थल से सूर्य को उत्तरायण से दक्षिणायन की ओर करवट लेते हुए देखा गया. सूर्य की इस नजारे को देखने के लिए लोग बुधवार को सुबह से जुटे हुए थे. हालांकि, कोरोना वायरस संक्रमण और बादलों के कारण पिछले वर्षों की अपेक्षा जहां इस वर्ष विशेषज्ञ एवं खगोल शास्त्री नहीं आ सके, वहीं सूर्य के इस अद्भुत नजारों को लोग साफ से नहीं देख पायें. बादलों के कारण खगोल प्रेमी कुछ देर निराश तो हुए, पर आखिरकार सूर्य ने इन खगोल प्रेमियों को खुश कर ही दिया. उत्तरायण से दक्षिणायन जाने के सूर्य के इस नजारे को देख काफी खुश हो उठे.

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Jharkhand news, Hazaribagh news : बड़कागांव (संजय सागर) : झारखंड के हजारीबाग जिले बड़कागांव प्रखंड स्थित पंकरी बरवाडीह के मेगालिथ स्थल से सूर्य को उत्तरायण से दक्षिणायन की ओर करवट लेते हुए देखा गया. सूर्य की इस नजारे को देखने के लिए लोग बुधवार को सुबह से जुटे हुए थे. हालांकि, कोरोना वायरस संक्रमण और बादलों के कारण पिछले वर्षों की अपेक्षा जहां इस वर्ष विशेषज्ञ एवं खगोल शास्त्री नहीं आ सके, वहीं सूर्य के इस अद्भुत नजारों को लोग साफ से नहीं देख पायें. बादलों के कारण खगोल प्रेमी कुछ देर निराश तो हुए, पर आखिरकार सूर्य ने इन खगोल प्रेमियों को खुश कर ही दिया. उत्तरायण से दक्षिणायन जाने के सूर्य के इस नजारे को देख काफी खुश हो उठे.

लोग निराश होकर लौटने लगे, वैसे ही बादल छटने लगे

पंकरी बरवाडीह के मेगालिथ स्थल पर खगोल प्रेमी बुधवार (23 सितंबर, 2020) को 5:00 बजे सुबह से ही जुटे हुए थे. बादल छटने का लोग इंतजार कर रहे थे, लेकिन बादल छटने का नाम ही नहीं ले रहा था. सुबह 5:58 पर रिमझिम बारिश होनी शुरू हो गयी, तो अधिकांश खगोल प्रेमी निराश होकर वापस घर लौटने लगे. लेकिन, जैसे ही एकाएक बादल छटने लगी वैसे ही लोगों के पांव फिर पीछे की ओर मुड़ने लगा.

…और बादलों को चीरते हुए निकला सूर्य

लोगों ने देखा कि सूर्य बादल को चीरते हुए क्षितिज से ऊपर चढ़ रहा था. इसे देख लोग काफी खुश हुए. इक्विनॉक्स प्वाइंट (Equinox point) पर स्थित दो मेगालिथ पत्थरों के बीच बने वी आकार से सूरज का अद्भुत नजारा दिखाई दे रहा था. युवा वर्ग सूर्य को अपने- अपने कैमरे में कैद कर रहे थे. इसी दौरान काले बादल छाने लगे और थोड़ी देर के लिए सूरज उसकी ओट में छिप गया, लेकिन थोड़ी ही देर बाद सूर्यदेव फिर से प्रकट हुए और लोगों के चेहरे पर खुशी लौट आयी. इक्विनॉक्स के कारण होनेवाली ऐसी खगोलीय घटना बेल्जियम, इंगलैंड, मध्य अमेरिका में भी देखा जाता है. वहीं, झारखंड के बड़कागांव के पंकरी बरवाडीह में ऐसा नजारा देखने को मिलता है. इतिहासकारों के अनुसार, यह स्थल मध्य अमेरिका के माया सभ्यता एजटेक सभ्यता से मिलती- जुलती है, जो 35 हजार ईसापूर्व माना जाता है.

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खगोल प्रेमियों ने मेगालिथ स्थल की सुरक्षा की मांग की

बनारस विश्वविद्यालय के स्कॉलर विपिन कुमार निराला ,महेंद्र महतो, राम नरेश मिश्रा, विवेक कुमार शर्मा, शिक्षक रंजीत प्रसाद, शिवनारायण कुमार, परी कुमारी, शिया कुमारी, धनेश्वर साव, खिरोधर साव, प्यासा मोसोमात ने इस स्थल को सुरक्षा एवं सुंदरीकरण करने की मांग केंद्र एवं राज्य सरकार से की है.

क्या है इक्विनॉक्स

खगोल शास्त्र के अनुसार, हर 21 मार्च एवं 23 सितंबर को रात- दिन बराबर होने के कारण सूर्य की किरणें विषुवत वृत्त पर सीधी पड़ती है. ऐसी स्थिति में कोई भी धुर्व सूर्य की ओर नहीं झुका होता है. इस कारण पृथ्वी पर दिन एवं रात बराबर होते हैं. 23 सितंबर को उतरी गोलार्द्ध में शरद ऋतु होती है, जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध में वसंत ऋतु होती है. 21 मार्च को स्थिति इसके विपरीत होती है. जब उतरी गोलार्र्द्ध में वसंत ऋतु एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में शरद ऋतु होती है. इस कारण पृथ्वी की घूर्णन एवं परिक्रमण गति के कारण दिन- रात एवं ऋतुओं में परिवर्तन होता है. यही कारण है कि 21 मार्च को दिन और रात बराबर होती है. इसलिए सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर करवट लेते दिखाई पड़ता है.

पहाड़ों में बादलों को उमड़ते देख लोग लगा लेते हैं मौसम का अनुमान

बड़कागांव के पहाड़ों एवं पर्वतों में उमड़ते -घुमड़ते बादल, चारों तरफ हरियाली बरबस ही लोगों का मन-मोह ले रहा है. पहाड़ों एवं पर्वतों में उमड़ते बादलों को देखकर ऐसा लगता है जैसे कश्मीर के पर्वतों की तरह बर्फ बिछा हुआ है. इसके अलावे और भी खासियत है. यहां के पहाड़ों एवं पर्वतों में उमड़ते- घुमड़ते हुए बादलों को देखकर लोग मौसम का अनुमान भी लगा लेते हैं. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है.

बड़कागांव के 85 वर्षीय देवल भुइयां और 65 वर्षीय सोमरी मोसोमात का कहना है कि जब हमलोगों के पास पहले घड़ी नहीं था, तो दिन में सूरज और रात में तीन तारा (सप्तऋषि तारा) को देखकर समय का पता कर लिया करते थे. ठीक उसी प्रकार बड़कागांव के महोदी पहाड़ में उमड़ते- घुमड़ते बादल को देखकर हमलोग समझ जाते थे कि बारिश अब नहीं होगी. वहीं, पश्चिमोत्तर दिशा के कोने में स्थित लोटावा पहाड़ में जब बादल मंडराते हैं, तो समझा जाता है कि बारिश होगी.

मालमू हो कि बड़कागांव में 21 सितंबर एवं 22 सितंबर को बारिश हुई थी. बारिश के बाद शाम 4 बजे से बड़कागांव प्रखंड के दक्षिण दिशा में स्थित महोदी पर्वत में बादल उमड़ने- घुमड़ने लगा था. इसे देखकर पुराने बुजुर्ग लोगों ने कहा कि अब बारिश नहीं होगी. बुजुर्गों के बताये बातों के अनुसार, 22 सितंबर से लेकर 23 सितंबर तक बारिश नहीं हुई.

Posted By : Samir Ranjan.

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