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शहीद निर्मल महतो की पुण्यतिथि कल, JMM सुप्रीमो शिबू सोरेन इनकी किस छवि से थे प्रभावित

Updated at : 07 Aug 2021 3:17 PM (IST)
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शहीद निर्मल महतो की पुण्यतिथि कल, JMM सुप्रीमो शिबू सोरेन इनकी किस छवि से थे प्रभावित

झामुमो (झारखंड मुक्ति मोर्चा) सुप्रीमो व दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने शहीद निर्मल महतो की आंदोलनकारी छवि को देखते हुए इन्हें 1980 में पार्टी में शामिल किया था. इसमें पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने अहम भूमिका निभाई थी. 8 अगस्त को निर्मल दा की पुण्यतिथि है.

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Nirmal Mahto Death Anniversary 2021, हजारीबाग न्यूज (संजय सागर) : झारखंड के शहीद निर्मल महतो की पुण्यतिथि 8 अगस्त को है. सूदखोरों के खिलाफ आंदोलन चलाने वाले निर्मल दा ने झारखंड अलग राज्य के लिए चलाये गये आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी. झारखंड के दिशोम गुरु शिबू सोरेन इनके आक्रामक छवि से काफी प्रभावित थे.

निर्मल महतो ने झारखंड के लिए आंदोलन चलाया था और सूदखोरों के खिलाफ आंदोलन किया था. आज अगर संयुक्त बिहार से झारखंड अलग हुआ और सूदखोरों एवं सामंतों से ग्रामीणों को राहत मिली है, तो इसमें इनकी मुहिम का भी असर रहा. झारखंड के सबसे बड़े छात्र संगठन आजसू का जन्म इन्हीं के अथक प्रयास से हुआ था. झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन (दिशोम गुरु) ने इनकी आंदोलनकारी छवि को देखते हुए निर्मल महतो को 1980 में पार्टी में शामिल किया था. इसमें पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने अहम भूमिका निभाई थी.

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निर्मल महतो ने शोषण के विरुद्ध एवं गरीबों ,मजदूरों, किसानों के हक के लिए आवाज उठायी. शिबू सोरेन निर्मल महतो से इतने प्रभावित हुए कि तीन वर्ष बाद ही उन्होंने निर्मल महतो को झामुमो का केंद्रीय अध्यक्ष बना दिया और खुद महासचिव बन गए. 25 दिसंबर 1950 को जन्मे निर्मल महतो ने पार्टी की कमान संभालते ही सबसे पहले छात्र संगठन ‘ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन’ का गठन किया. उन्होंने इसकी कमान प्रभाकर तिर्की व सूर्य सिंह बेसरा को सौंप दी थी.

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तय हुआ था कि झारखंड मुक्ति मोर्चा वैचारिक लड़ाई लड़ेगी, जबकि जमीनी स्तर पर युवाओं को जोड़ने का काम आजसू के जिम्मे रहेगा. उन्होंने आजसू के नेताओं को आंदोलन की बारीकियों से अवगत कराने के लिए दार्जिलिंग में सुभाष घीसिंग और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के नेता प्रफुल्ल कुमार महंत व भृगु कुमार फूकन से मिलने असम भी भेजा.

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झारखंड अलग राज्य के लिए आंदोलन ने इस कदर रफ्तार पकड़ ली कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी व तत्कालीन गृह मंत्री बूटा सिंह को दिल्ली में कई बार आजसू से वार्ता करनी पड़ी. आखिरकार झारखंड स्वायत्तशाषी परिषद, फिर झारखंड अलग राज्य का गठन हुआ, लेकिन यह देखने के लिए निर्मल महतो जीवित नहीं रहे. 8 अगस्त 1987 को निर्मल महतो ( निर्मल दा) की हत्या कर दी गई थी.

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Posted By : Guru Swarup Mishra

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