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मां-पिता की मौत के बाद कुपोषित पोते के दूध के लिए दादी ने रख दी थी जमीन गिरवी, अब खुद करेंगी परवरिश

Updated at : 01 Aug 2021 1:23 PM (IST)
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मां-पिता की मौत के बाद कुपोषित पोते के दूध के लिए दादी ने रख दी थी जमीन गिरवी, अब खुद करेंगी परवरिश

Jharkhand News, गुमला न्यूज (दुर्जय पासवान) : माता-पिता की मौत के बाद जब पोते आलोक के लिए दादी के पास दूध के भी पैसे नहीं थे, तो दादी ने जमीन गिरवी रख दी थी. कुपोषित आलोक की बेहतर परवरिश के लिए दो साल दूर रही, लेकिन जैसे ही हंसते हुए वह गोद में आया. दादी खुशी से झूम उठी.अब वह खुद इसकी परवरिश करेंगी.

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Jharkhand News, गुमला न्यूज (दुर्जय पासवान) : माता-पिता की मौत के बाद जब पोते आलोक के लिए दादी के पास दूध के भी पैसे नहीं थे, तो दादी ने जमीन गिरवी रख दी थी. कुपोषित आलोक की बेहतर परवरिश के लिए दो साल दूर रही, लेकिन जैसे ही हंसते हुए वह गोद में आया. दादी खुशी से झूम उठी.अब वह खुद इसकी परवरिश करेंगी.

यह कहानी एक दादी क्लारा कुल्लू व मासूम पोते आलोक की है. किस प्रकार भूख व बीमारी से जूझ रहे पोते को बचाने के लिए दादी ने दूध खरीदने के लिए जमीन गिरवी रख दी थी. यहां तक कि पोते को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा व देखभाल मिले. इसके लिए दो साल तक पोते से दूर रही. परंतु शुक्रवार (30 जुलाई 2021) को उस समय दादी की खुशी का ठिकाना नहीं था. जब पोता आलोक हंसते खिलखिलाते दौड़ते हुए अपनी दादी की गोद में जा लिपटा. जब आलोक आठ माह का था. तब दादी ने उसे सीडब्ल्यूसी गुमला को सौंप दिया था.

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इसके बाद आलोक की परवरिश मिशनरीज ऑफ चैरिटी गुमला में हुई. मिशनरीज की धर्मबहनों से मिले प्यार व देखरेख से आज आलोक स्वस्थ है. आलोक को गंभीर स्थिति में मिशनरीज ऑफ चैरिटी को सौंपा गया था. परंतु अब आलोक हर प्रकार की बीमारी से मुक्त है. शनिवार को क्लारा कुल्लू सीडब्ल्यूसी गुमला पहुंची और कागजी कार्रवाई के बाद उसे अपने साथ घर ले गयी. दादी क्लारा ने कहा कि अब वह अपने पोते को पालेगी. आलोक की परवरिश में उसकी फूआ भी मदद करेगी.

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यह मामला गुमला जिले के रायडीह प्रखंड के सन्याकोना बगडाड़ गांव का है. वर्ष 2019 में आठ माह के पोते आलोक कुल्लू (अब तीन साल हो गया है) के दूध के लिए उसकी दादी क्लारा कुल्लू ने अपनी जमीन गिरवी रख दी थी. दादी के प्यार व बलिदान के कारण आज आलोक कुपोषण की बीमारी से लड़कर स्वस्थ हो गया है. आलोक के पिता स्वर्गीय पतरस कुल्लू व मां स्वर्गीय मोनिका कुल्लू है. आलोक के जन्म के 18 दिन बाद उसकी मां मोनिका कुल्लू की बीमारी से मौत हो गयी थी. पत्नी की मौत के बाद उसका पति पतरस सदमे में आ गया था.

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सदमे में आने के बाद छह फरवरी 2019 को पतरस की भी मौत हो गयी थी. मां व पिता की मौत के बाद मासूम आलोक अनाथ हो गया था. अभी वह होश भी संभाल नहीं पाया था और मां पिता का साया सिर से उठ गया था. मां व पिता के निधन के बाद आलोक की परविरश की जिम्मेवारी बूढ़ी दादी क्लारा कुल्लू पर आ गयी. घर पर कुछ पैसे थे तो बहू व बेटे के अंतिम संस्कार में खत्म हो गया था. पोते की भूख मिटाने के लिए दूध खरीदने के लिए क्लारा के पास पैसा नहीं था. वह गरीब है. वृद्ध भी है.

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वृद्ध होने के कारण वह मजदूरी नहीं कर सकती है. इसलिए उसने अपनी जमीन को गिरवी रख दी थी. उससे जो पैसे मिले, वह दूध खरीदकर अपने पोते को पिलाकर भूख मिटाते रही. लेकिन मां का दूध नहीं मिल पाने के कारण आलोक कुपोषण का शिकार हो गया था. तभी गांव के लोगों ने इसकी सूचना सीडब्ल्यूसी गुमला को दिया था. सीडब्ल्यूसी ने पहल कर दादी व पोते को बगडाड़ गांव से गुमला लाने की व्यवस्था कराया. इसके बाद आलोक की जांच गुमला सदर अस्पताल में कराया गया.

जांच में आलोक कुपोषित मिला था. डॉक्टर ने उसे अपनी निगरानी में रखकर अस्पताल में भरती कर इलाज किया. पांच दिन के इलाज के बाद अब आलोक स्वस्थ हुआ. लेकिन बदलते मौसम के कारण उसे बुखार रहने लगा. इसके बाद दादी की अनुमति लेकर आलोक को मिशनरीज ऑफ चैरिटी में रखा गया. जहां आलोक दो साल तक रहने के बाद पूरी तरह स्वस्थ हो गया.

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वर्ष 2019 के जुलाई माह में मामला जब सुर्खियों में आया, तो प्रशासन हरकत में आया. अधिकारियों की टीम बगडाड़ गांव गयी. वृद्ध दादी को खाने-पीने का सामान दिया गया. गिरवी जमीन को भी मुक्त कराया गया. राशन कार्ड बनाया. परंतु प्रशासन ने पीएम आवास व वृद्धावस्था पेंशन दिलाने का जो वादा किया. उसे अभी तक पूरा नहीं किया. हालांकि प्रशासन का कहना है कि वृद्धावस्था पेंशन के लिए क्लारा कुल्लू को बैंक में खाता खुलाने के लिए लाया गया था. परंतु उसका फिंगर प्रिंट काम नहीं करने के कारण वृद्धावस्था पेंशन अबतक नहीं बन पाया. न ही प्रशासन ने उसे पक्का घर बनाकर दिया.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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