Jharkhand News : चाइल्ड ट्रैफिकिंग की रोकथाम को लेकर गढ़वा में जनसंवाद, पीड़ित ने सुनायी आपबीती

Jharkhand News, Garhwa News, गढ़वा न्यूज : चाइल्ड ट्रैफिकिंग की रोकथाम और लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से गढ़वा के समाहरणालय स्थित जिला परिषद के सभाकक्ष में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित हुए. इस जनसंवाद का आयोजन कैलाश सत्यर्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन की ओर से किया गया. इस कार्यक्रम के माध्यम से गढ़वा जिले में हो रही बाल तस्करी, बाल श्रम, बाल हिंसा, बाल उत्पीड़न एवं बाल अधिकारों को लेकर समन्वय बनाकर काम करने पर चर्चा हुई. इस कार्यक्रम में वैसे बच्चे एवं उनके परिवार के लोग भी शामिल हुए जो इसके शिकार रहे हैं. इस अवसर पर बंधुआ बाल मजदूर के रूप में काम कर चुके जमुआ नगरउंटारी के पीड़ित ने भी अपनी आपबीती सुनायी.
Jharkhand News, Garhwa News, गढ़वा न्यूज : चाइल्ड ट्रैफिकिंग की रोकथाम और लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से गढ़वा के समाहरणालय स्थित जिला परिषद के सभाकक्ष में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित हुए. इस जनसंवाद का आयोजन कैलाश सत्यर्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन की ओर से किया गया. इस कार्यक्रम के माध्यम से गढ़वा जिले में हो रही बाल तस्करी, बाल श्रम, बाल हिंसा, बाल उत्पीड़न एवं बाल अधिकारों को लेकर समन्वय बनाकर काम करने पर चर्चा हुई. इस कार्यक्रम में वैसे बच्चे एवं उनके परिवार के लोग भी शामिल हुए जो इसके शिकार रहे हैं. इस अवसर पर बंधुआ बाल मजदूर के रूप में काम कर चुके जमुआ नगरउंटारी के पीड़ित ने भी अपनी आपबीती सुनायी.
चाइल्ड ट्रैफिकिंग की रोकथाम और जागरूकता लाने के उद्देश्य से आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में बचपन बचाओ आंदोलन बिहार के संयोजक मोख्तारूल हक ने कहा कि काम करने के लिए जानवरों से भी सस्ते एवं सुलभ तरीके से बच्चे मिल रहे हैं. इसलिए इसका प्रचलन बढ़ गया है. खासकर झारखंड- बिहार के बच्चे और बच्चियां महानगरों में होटलों, ढाबों, गैरेज के साथ-साथ घरेलू नौकर के रूप में काम करने के लिए ले जाये जा रहे हैं. इससे उनका बचपना तो छीन ही रहा है, उनका जीवन भी पूरी तरह से अंधेरे में चला जाता है़ इसको रोकने के लिए सभी इकाईयों को साथ मिलकर काम करने की जरूरत है.
झारखंड राज्य बाल श्रम आयोग की पूर्व अध्यक्ष शांति किंडो ने कहा कि चाइल्ड ट्रैफिकिंग गढ़वा जिला सहित पूरे झारखंड में बढ़ गयी है. यह एक संज्ञेय अपराध है. उन्होंने कहा कि इस अपराध में शामिल दलाल, मालिक और माता- पिता भी अपराधी की श्रेणी में आते हैं और उन्हें कम से कम 7 साल तक की सजा हो सकती है. उन्होंने कहा कि 14 साल से कम उम्र के बच्चे को मजदूर के रूप में काम पर नहीं रखा जा सकता है.
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स्थायी लोक अदालत के चेयरमैन कमल नयन पांडेय ने कहा कि थाना में मौजूद बाल पुलिस कल्याण पदाधिकारियों को चाइल्ड ट्रैफिकिंग से जुड़ी सभी कानूनी पहलुओं की जानकारियां होनी चाहिए तभी इस पर बेहतर तरीके से काम कर इस अपराध को रोका जा सकता है. इस अवसर पर CWC चेयरमैन उपेंद्रनाथ दूबे ने कहा कि गढ़वा से लगातार बाहर ले जायी गयी लड़कियों एवं लड़कों का रेस्क्यू किया जा रहा है. लेकिन, इसमें थाना को और बेहतर करने की जरूरत है.
कार्यक्रम का संचालन अभियान के जिला संयोजक आलोक उपाध्याय ने किया, जबकि कार्यक्रम में गढ़वा SDPO सुदर्शन कुमार आस्तिक, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रमेश चंचल एवं पूर्व चेयरमैन CWC राकेश त्रिपाठी उपस्थित थे़
Posted By : Samir Ranjan.
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