जानिए क्यों भर आयी महानायक अमिताभ की आंखें

Updated at : 18 Sep 2014 12:51 PM (IST)
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जानिए क्यों भर आयी महानायक अमिताभ की आंखें

अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में बुधवार को जिन्दगी की कुछ सच्चाई को बयां किया. उन्होंने अपने ब्लॉग के जरिये उन बच्चों को हाईलाईट किया है जो जीवन के कष्‍ट से भरे क्षणों में भी मुस्कुराते रहते हैं. बिग बी ने लिखा है कि ट्रैफिक के सिग्नल में एक गाड़ी रुकती है. यह एक रात […]

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अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में बुधवार को जिन्दगी की कुछ सच्चाई को बयां किया. उन्होंने अपने ब्लॉग के जरिये उन बच्चों को हाईलाईट किया है जो जीवन के कष्‍ट से भरे क्षणों में भी मुस्कुराते रहते हैं. बिग बी ने लिखा है कि ट्रैफिक के सिग्नल में एक गाड़ी रुकती है. यह एक रात है जो थोड़ी धूंधली है.

कुछ बच्चे सड़क पर दौड़ रहे हैं. उनको देखकर लगता है कि वे काफी गरीबी से गुजर रहे हैं. उनके कपड़े शरीर को ठीक ढंग से ढंक नहीं पा रहे हैं.उनके बाल बड़े हैं चेहरे पर धब्बे हैं फिर भी वह अपने चेहरे से मुस्कान नहीं छोड़ रहे हैं. ऐसा हम दिन में केवल तीन-चार मिनट ही कर पाते हैं. इन बच्चों के पैरों में चप्पल तक नहीं हैं वे नंगे पांव दौड़ रहे हैं. हो सकता है कि वे बारिश के कारण बीमार भी पड़ जायें.

ये सभी बच्चे अपने हाथों में कुछ न कुछ पकडें हुए हैं. जैसे फूल, पेन, बैलून आदि. जिसे वे बेचने का प्रयास कर रहे हैं. इसके लिए वे हर कार की खिड़की का दरवाजा खटखटाते हैं. शायद किसी को उनपर दया आ जाये और उनके भोजन का जुगाड़ हो जाये.वे लगातार मुस्कुराते चले जा रहे हैं. उनकी मुस्कान में किसी प्रकार की कंजूसी न‍हीं झलक रही है. वे छोटे से ग्रुप में हैं. जब उनकी चीजें बिकेंगी तो वे अपना भोजन कर पायेंगे. यह उनके दिन का खेल होता है वहीं इनकी रातें भी इसी प्रकार से मनोरंजक होतीं हैं.

इसी प्रकार एक प्लेटफार्म का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि कुछ लोग प्लेटफार्म पर आने जाने वाले लोगों के रहमो करम पर रहते हैं. इसी प्रकार के दो बच्चों को जब मैंने एक बार प्लेटफार्म पर देखा तो उन्हें कुछ खाने को दिया और 100 रुपये का नोट दिया. वे बिना मेरी ओर देखे ये लेकर भागे. उन्होंने इससे कुछ सामान खरीदे. यह मैं अपनी जिंदगी में कभी नहीं भूल पाऊंगा.

उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा कि इसी प्रकार बीती रात जब मैं काम से लौट रहा था तो मेरी कार की खिड़की के पास एक बच्ची आई. उसके हाथ में बॉल पेन थे. वह उसे बेचने का प्रयास कर रही थी. मैंने बिना कुछ पूछे उसके बॉल पेन लेकर पैसे दिये. मेरे द्वारा दिये गये पैसे उसकी मुस्कान से कम थे. शायद ही मैं इन बॉल पेन का उपयोग कर पाऊं लेकिन मैं इन्हें अपने करीब रखूंगा. ऐसे ही कई बातों को याद करके मेरी आंखे भर आती है.

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