खास बातचीत: पहली बार जब आनंद से मिली थी सोनम कपूर तो हुआ था ये

Updated at : 03 Feb 2019 10:22 AM (IST)
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खास बातचीत: पहली बार जब आनंद से मिली थी सोनम कपूर तो हुआ था ये

शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्म ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ में अभिनेत्री सोनम कपूर आहूजा नजर आ रही हैं. वह पहली बार अपने पिता अनिल कपूर के साथ स्क्रीन शेयर कर रही हैं. वह खुद को लकी करार देती हैं कि इस तरह की सशक्त स्क्रिप्ट वाली फिल्म में वे अपने पिता के […]

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शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्म ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ में अभिनेत्री सोनम कपूर आहूजा नजर आ रही हैं. वह पहली बार अपने पिता अनिल कपूर के साथ स्क्रीन शेयर कर रही हैं. वह खुद को लकी करार देती हैं कि इस तरह की सशक्त स्क्रिप्ट वाली फिल्म में वे अपने पिता के साथ काम कर रही हैं. पेश है सोनम कपूर की उर्मिला कोरी से हुई बातचीत के प्रमुख अंश.

यह फिल्म समलैंगिकता के मुद्दे को छूती है कमर्शियली इस विषय को आप कैसे देखती हैं?
हम ऑडियंस को मूर्ख समझते हैं, लेकिन हमें उसे क्रेडिट देना चाहिए. आज का दर्शक प्रोगेसिव तौर पर समझदार है . मेरी फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ रिलीज हुई थी तो सभी को लगा था कि ये फिल्म सिर्फ युवाओं को पसंद आयेगी, लेकिन हमें मालूम हुआ कि उम्रदराज महिलाओं को भी वह फिल्म काफी पसंद आयी.

पिता अनिल कपूर के साथ पहली बार एक्टिंग कर रही हैं?
सत्रह साल की थी जब मैं ब्लैक के सेट पर गयी थी. (हंसते हुए) मुझे लगता है कि मैं पहली अभिनेत्री हूं जो अपनी उम्र को सामने से कबूलती है. इस इंडस्ट्री में सोलह साल हो गये हैं. मैंने शुरुआत में ये बात तय कर ली थी कि मैं अपने पिता के साथ काम नहीं करूंगी, क्योंकि लोगों को लगता था कि ये सोनम कपूर है कि तो पैदा होते के साथ ही चांदी का चम्मच मिल गया होगा. मैं अपने आप अपने कैरियर ग्राफ को ऊपर करना चाहती थी. मुझे लगता है कि आज जब मुझे ये फिल्म मिली है तो मैंने इंडस्ट्री में अपना मुकाम बना लिया है. आपको शुरुआत की एक दो फिल्में परिवार के नाम पर मिल सकती हैं, लेकिन अब नहीं क्योंकि आखिरकार फिल्म एक बिजनेस है और कोई आप पर ऐसी ही पैसे नहीं लगायेगा.

अनिल कपूर ने हाल ही में कहा कि हमारे घर में कोई एक्टर बन सकता है तो वह सोनम है.
मेरी जो फितरत है वो डायरेक्टर वाली है. मुझे सभी एक्टर्स बहुत पसंद हैं. मैं किसी हीरोइन को देखकर प्रतिस्पर्धा नहीं करती हूं. मुझे नहीं लगता कि मैं तो इससे अच्छा करुंगी. मुझे लगता है कि यार ये क्या काम कर रही है. ये वाला रोल भी वह बखूबी कर सकती है. मेरा दिमाग ऐसे चलता है. मैं ये भी कहूंगी कि मुझे एक्टिंग बहुत पसंद है. मुझे मेरे इस जॉब से बहुत प्यार है. अक्सर एक्टर्स बहुत ही ज्यादा प्रतिस्पर्धा रखते हैं. उन्हें बस अपने से मतलब होता है. वह चीजों को बडे परिदृश्य में नहीं देखते हैं. यही वजह है कि मैं संजू और पैडमैन जैसी फिल्में भी कर लेती हूं. मुझे एक अच्छी फिल्म का हिस्सा बनना है. हमेशा मेरे जेहन में बस अपना रोल नहीं रहता है.

आप निर्देशन की कुर्सी कब संभाल रही हैं?
अभी तो मेरा एक्टिंग कैरियर बहुत अच्छा चल रहा है. रोल इतने अच्छे आ रहे हैं. मुझे एक दो साल आॅफ लेना पडेगा. अगर मुझे कुछ अच्छा लिखना है या कुछ डेवलप करना है तो.

जब आपको आनंद ने पहली बार देखा था तो उनका क्या रिएक्शन था?
मैं जब पहली बार आनंद को मिली थी तो मैं बहुत ही बुरे स्निकर पहनी हुयी थी. उनके हिसाब से. उन्होंने कहा कि मैं तुम्हारे लिए नये स्निकर लेकर आता हूं. आनंद को शूज से बहुत ही ज्यादा लगाव है. उन्होंने तुरंत एडिडास के नये शूज लाकर मुझे दिये थे. पहली बार में मेरा रिएक्शन था कि बहुत हैंडसम है. जब मेरी पहली मुलाकात हुई थी तो आनंद के बहुत बाल थे. अब तक बाल है, लेकिन आनंद अपने बालों को शेव कर लेते हैं क्योंकि उन्हें एक्सरसाइज बहुत पसंद है तो बहुत गर्मी लगती है एक्सरसाइज के दौरान. अभी वे फिर से मेरे लिए बाल बढ़ा रहे हैं क्योंकि बढ़े बाल में वो मुझे ज्यादा अच्छे लगते हैं. आनंद से जब मैं दूसरी बार मिली थी तो वे एक योगी की तरह लगे क्योंकि उसने दाढी और बाल दोनों मुडवा लिए थे. मेरे पास वो तस्वीर आज भी है.

आनंद की कौन सी बातें आपको खास लगती हैं
वह बहुत धैर्यवाले इंसान हैं. वो कभी गुस्सा नहीं होते हैं. बहुत ही लिबरल और अच्छे इंसान हैं. अच्छा इंसान मिलना बहुत मुश्किल है.

इस फिल्म में आपके पापा के साथ जूही चावला भी हैं. क्या आपने उनलोगों से कुछ सीखा?
डैड और जूही मैम की सबसे खास बात ये है कि वे लोग परफेक्शनिस्ट हैं. हमारे जेनेरेशन की सबसे खराब बात ये है कि हमारा रवैया चलताऊ टाइप का है. वे लोग कुछ नहीं छोड़ते हैं. हमें अपने पुराने जनरेशन से सीखने की जरूरत है. वो अपने काम को लेकर बहुत ही जागरूक होते हैं. मेरे से भी जो यंगर जेनेरेशन हैं. मुझे लगता है कि यंगर जेनेरेशन में चीजों को सुनने और समझने की रुचि और धैर्यता कम होती जा रही है. पुराने दौर में जो जुनून था वो सीखने की जरुरत है. आजकल लंंबे-लंबे आर्टिकल, किताबें कोई नहीं पढ़ता. लंबी फिल्में कोई नहीं देखता. सबकुछ शॉर्ट है. जो गलत है.

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