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आमिर खान ने लगान की कहानी सुनते ही कर दिया था रिजेक्‍ट, लेकिन फिर...

Updated at : 02 Aug 2018 7:44 AM (IST)
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आमिर खान ने लगान की कहानी सुनते ही कर दिया था रिजेक्‍ट, लेकिन फिर...

मुंबई : आमिर खान की पहचान हिन्दी सिनेमा में बड़ा बदलाव लाने वाले अभिनेता के तौर पर है और वह ऑस्कर नामांकन पाने वालों में भी शुमार हैं. लेकिन अभिनेता ने हाल ही में खुलासा किया कि शुरू में उन्हें ‘लगान’ फिल्म का विचार पसंद नहीं आया था, क्योंकि उन्हें इसकी कहानी थोड़ी ‘अजीब’ लगी […]

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मुंबई : आमिर खान की पहचान हिन्दी सिनेमा में बड़ा बदलाव लाने वाले अभिनेता के तौर पर है और वह ऑस्कर नामांकन पाने वालों में भी शुमार हैं. लेकिन अभिनेता ने हाल ही में खुलासा किया कि शुरू में उन्हें ‘लगान’ फिल्म का विचार पसंद नहीं आया था, क्योंकि उन्हें इसकी कहानी थोड़ी ‘अजीब’ लगी थी. आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन में खेल की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म को समीक्षकों से काफी तारीफ मिली. वर्ष 2001 में आयी यह फिल्म बेहद सफल भी रही.

‘लगान’ अकादमी पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म वर्ग के लिये नामांकित भी हुई. इंडियन स्क्रिप्टराइटर्स एसोसिएशन के दूसरे संस्करण से इतर आमिर ने कहा, ‘‘जब मैंने ‘लगान’ की कहानी सुनी तो 5 मिनट बाद ही इसे नकार दिया.’

उन्‍होंने आगे कहा,’ जब मैंने सुना कि यह फिल्म ऐसे लोगों की कहानी है जो बारिश नहीं होने के कारण ‘लगान’ नहीं चुका पा रहे हैं और फिर वे ब्रिटिश लोगों के साथ क्रिकेट खेलते हैं. मैंने सोचा ‘‘ये कैसी अजीब सोच है?’ मैंने आशुतोष से कहा, ‘‘यह बहुत अजीब कहानी है. मैंने उनसे कुछ अलग कहानी लाने के लिये कहा.’

तीन महीने बाद गोवारिकर ने उसी कहानी के साथ आमिर से फिर संपर्क किया लेकिन उस वक्त तक वह पूरी पटकथा लिख चुके थे. आमिर ने कहा कि शुरू में वह चिढ़े, लेकिन गोवारिकर ने इस काम को जारी रखा. उन्होंने कहा, ‘‘जब मैंने कहानी सुनी, तब मैं उसमें खो गया. ‘लगान’ की अंतिम पटकथा मुझे बेहद पसंद आयी और मुझे यह अविश्वसनीय लगा. मैंने उनसे कहा कि यह लाजवाब कहानी है और मुख्यधारा सिनेमा का रिकॉर्ड तोड़ेगी. लेकिन मैं इसके लिये हां कहने से डर रहा हूं. मैं इसे नहीं कर सकता.’

53 वर्षीय अभिनेता ने गोवारिकर को फिल्म के लिये अन्य अभिनेताओं से संपर्क करने को कहा और फिल्म की पटकथा में कुछ बदलाव लाने का सुझाव दिया. इस वाकये को एक साल बीत गया, लेकिन अब आमिर के मन में यह अंदेशा आने लगा कि वह एक अच्छी फिल्म छोड़ रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘मैं अक्सर यही सोचता कि मैं यह फिल्म क्यों नहीं कर रहा हूं?’ आमिर ने कहा कि खतरा मोल लेने का साहस रखने वाले बिमल रॉय और गुरुदत्त जैसे फिल्मकारों से प्रभावित होने के कारण मैंने फिल्म करने का फैसला किया. उन्होंने कहा, ‘मैंने आशुतोष को यह कहानी अपने माता पिता को सुनाने के लिये कहा. कहानी सुनकर उनकी आंखें भर आयीं और उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे यह फिल्म करनी चाहिए. और… बाकी सबकुछ आपके सामने है, जैसा कि लोग कहते हैं कि फिल्म ने इतिहास रच दिया.’

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