बिहार में बरसाना! एक ऐसा गांव जहां लठमार नहीं, कंधे पर चढ़ कर मनाई जाती है अलबेली 'घुमौर' होली

Published by : Preeti Dayal Updated At : 02 Mar 2026 1:39 PM

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सहरसा जिले की घुमौर होली

Bihar Holi Special: राधा-कृष्ण की लीलाओं के लिए मशहूर बरसाना की होली अगर कभी देखी होगी, तो बिहार के सहरसा जिले का बनगांव आपको उसी रंग में रंगा हुआ महसूस होगा. फर्क बस इतना है कि यहां लठ नहीं, कंधों पर चढ़कर होली खेली जाती है. जो सिर्फ सौहार्द नहीं आपसी प्रेम जताने का भी माध्‍यम बन जाता है. बनगांव की ‘घुमौर होली’ कोई नई परंपरा नहीं, मगर इसकी जड़ें 1810 की गहराई से जुड़ी हैं.

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Bihar Holi Special: (कुमार आशीष) सहरसा जिले की बनगांव की घुमौर होली का इतिहास 200 साल पुराना है. संत लक्ष्मीनाथ गोसाईं ने 1810 में शुरू की. होली की यह परंपरा आज भी कायम है और सालों के बाद आज भी सांप्रदायिक एकता का प्रतीक है. यहां होली में सभी जाति और धर्म के लोग शामिल होकर एकसाथ इस पर्व को मनाते हैं. होली को लेकर सालों पहले बनाई गई परंपरा को कायम रखते हुए देश और विदेश को आपसी भाईचारे का संदेश देते हैं.

अलग-अलग हिस्सों में टोली बनाकर खेलते हैं होली

जाति धर्म का भेदभाव भूलकर होली के दिन लोग गांव के अलग-अलग हिस्सों से अलग-अलग टोली बनाकर मदमस्त हो ‘होली है…’ कहते हुए एक-दूसरे के कंधे पर चढ़कर होली खेलते हैं. गांव के डिहली बंगला, बंगला गाछी, ललित झा बंगला, मयूरी खां आड़, मनसाराम खां दरवाजा, विषहरी स्थान, खोखा बाबू चौक सहित अन्य चिह्नित जगहों पर इकट्ठा होकर सभी मिलकर होली खेलते हैं. सभी बंगले पर पानी और रंग की फुहार बहती रहती है. लोग एक-दूसरे से गले मिलकर होली की शुभकामनाएं देते हैं.

क्यों कहते हैं घुमौर होली?

गांव में सभी बंगले पर होली खेलने के बाद हजारों लोग भगवती स्थान परिसर पहुंचते हैं, जहां एक-दूसरे के कंधे पर चढ़ गले मिलकर होली खेलते हैं. होली वाले दिन यह नजारा बहुत ही अद्भुत दिखता है. भगवती मंदिर के ऊपर लगे फव्वारे से पानी की बारिश होती रहती है और नीचे हजारों की संख्या में लोग गोल-गोल घूमते रहते हैं. इसी कारण इसे घुमौर होली कहा जाता है.

बनगांव में हिंदू, मुस्लिम सहित सभी जाति के लोग सभी बैर भुलाकर होली खेलते हैं. ऊंच-नीच, छूत-अछूत कोई भी भेद होली में यहां नहीं दिखता है. होली खेल रहे लोग बाबाजी कुटी जाकर गोसाईं जी सहित अन्य देवताओं को प्रणाम कर इसका समापन करते हैं.

एक दिन पहले ही खेली जाती है यहां होली

सामान्य तौर से फाल्गुन पूर्णिमा को सम्मत जलाने और चैत्र प्रतिपदा को होली खेलने की परंपरा है. लेकिन बनगांव में एक दिन पहले यानी पूर्णिमा के दिन ही होली खेली जाती है. होली खेलने के बाद शास्त्र में दिए गए समय के अनुसार ही सम्मत जलाया जाता है. इस बार शहर में चार मार्च को होली मनाई जायेगी, जबकि बनगांव में यह त्यौहार दो मार्च को ही मनाया जाएगा.

बनगांव के होली के महत्व को देखते हुए बिहार सरकार का कला संस्कृति विभाग यहां तीन दिवसीय होली महोत्सव का आयोजन करता है. इस बार भी तीनों दिन अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे. मुख्य आकर्षण लोक गायिका देवी की गायिकी होगी.

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प्रीति दयाल, प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहीं हैं. यूट्यूब पोर्टल सिटी पोस्ट लाइव से पत्रकारिता की शुरुआत की. इसके बाद डेलीहंट और दर्श न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में काम कर चुकीं हैं. डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग में साढ़े 3 साल का अनुभव है. खबरें लिखना, वेब कंटेंट तैयार करने और ट्रेंडिंग सब्जेक्ट पर सटीक और प्रभावी खबरें लिखने का काम कर रहीं हैं. प्रीति दयाल ने पत्रकारिता की पढ़ाई संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से की. इस दौरान पत्रकारिता से जुड़ी कई विधाओं को सीखा. मीडिया संस्थानों में काम करने के दौरान डिजिटल जर्नलिज्म से जुड़े नए टूल्स, तकनीकों और मीडिया ट्रेंड्स को सीखा. पहली बार लोकसभा चुनाव 2024 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे बड़े चुनावी कवरेज में काम करने का अवसर मिला. इस दौरान बिहार की राजनीति, चुनावी रणनीतियों, राजनीतिक दलों और प्रमुख नेताओं से जुड़े कई प्रभावशाली और पाठकों की रुचि के अनुसार कंटेंट तैयार किए. चुनावी माहौल को समझते हुए राजनीतिक विश्लेषण और ट्रेंडिंग मुद्दों पर आधारित खबरों को आसान और प्रभावी भाषा में तैयार करना कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. कंटेंट रिसर्च, SEO आधारित लेखन, सोशल मीडिया फ्रेंडली कंटेंट तैयार करना और तेजी से बदलते न्यूज वातावरण में काम करना प्रमुख क्षमताओं में शामिल है. बिहार की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, सिनेमा और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण घटनाओं पर रुचि और समझ है. टीम के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना और समय सीमा के अंदर गुणवत्तापूर्ण काम पूरा करना कार्यशैली का हिस्सा है. प्रीति दयाल का उद्देश्य डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लगातार सीखते हुए अपनी पत्रकारिता कौशल को और बेहतर बनाना और पाठकों तक विश्वसनीय और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है.

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