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खास बातचीत में बोले रणबीर कपूर -जब आप गलत लोगों की संगत में पड़ते हैं तो गलतियां करते हैं

Updated at : 17 Jun 2018 8:21 AM (IST)
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खास बातचीत में बोले रणबीर कपूर -जब आप गलत लोगों की संगत में पड़ते हैं तो गलतियां करते हैं

संजय दत्त की बायोपिक ‘संजू’ में रणबीर कपूर लीड रोल में हैं. वह बताते हैं कि उन्हें आज तक किसी फिल्म के ट्रेलर लांच के बाद इस तरह का जबरदस्त रिस्पांस नहीं मिला है. संजू के निर्देशक राजकुमार हिरानी हैं इसलिए फिल्म को ऐसा रिस्पांस मिल रहा है. उन्होंने बताया कि अब तक छोटे शहर […]

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संजय दत्त की बायोपिक ‘संजू’ में रणबीर कपूर लीड रोल में हैं. वह बताते हैं कि उन्हें आज तक किसी फिल्म के ट्रेलर लांच के बाद इस तरह का जबरदस्त रिस्पांस नहीं मिला है. संजू के निर्देशक राजकुमार हिरानी हैं इसलिए फिल्म को ऐसा रिस्पांस मिल रहा है. उन्होंने बताया कि अब तक छोटे शहर के लोग मुझे मेरी फिल्मों से नहीं बल्कि मेरी एड फिल्मों की वजह से ही जानते थे. मुझे उम्मीद है कि इससे अब आम दर्शकों से भी मुझे जुड़ेगे. मैं एक बार फिर जीरो से शुरू कर रहा हूं. पेश है रणबीर कपूर की उर्मिला कोरी से हुई बातचीत के प्रमुख अंश.

-बतौर एक्टर फिल्म ‘संजू’ से जुड़ा सबसे बड़ा चैलेंज क्या था?

ये बहुत बड़ा चैलेंज था कि लोगों को ये महसूस हो कि मैं संजय दत्त हूं. फिल्म के ट्रेलर लांच के बाद से ही बहुत हल्का महसूस हो रहा है क्योंकि अभी जब लोग फिल्म देखेंगे तो उनके जेहन में ये सवाल नहीं आयेगा कि रणबीर कपूर संजय दत्त की भूमिका कैसे निभा पायेगा. उस टेस्ट में, मैं ट्रेलर लांच के बाद ही पास हो गया. अभी फिल्म देखेंगे तो फिल्म ही देखेंगे.

-निर्देशक राजकुमार हिरानी के साथ फिल्में करना हर एक्टर की ख्वाहिश होती है.

राजू सर से मैं कई साल से बात कर रहा था. उन्होंने मुझे थ्री इडियट में आमिर वाला रोल भी आॅफर किया था, लेकिन उनको पता नहीं था कि वह युवा अभिनेता को लेकर या ओल्ड एक्टर के साथ फिल्म करें. क्योंकि उस फिल्म में दो एज फेजेस थे. एक युवा दूसरा 40 साल का. उन्हें लगा कि ओल्ड अभिनेता को कास्ट करना सही रहेगा. मेरे साथ ज्यादा नहीं दो तीन मीटिंग ही हुई थी, लेकिन मैं तो इतना खुश था कि तय कर लिया था कि किसी और फिल्म में काम नहीं करूंगा. उसी फिल्म को पूरा समय दूंगा, लेकिन मेरी ख्वाहिश उस वक्त पूरी नहीं हुई. संजू ने उस चाहत को पूरा किया. इस फिल्म के लिए उन्होंने मुझे मैसेज किया कि ये फिल्म है. उस वक्त अफवाहें फैल रही थी कि संजू सर पर फिल्म है तो मेरा ये रिएक्शन था कि संजू सर पर फिल्म कैसे बनेगी और मैं कैसे कर पाऊंगा. मैंने उन्हें जवाब दिया कि सर आशा करता हूं कि ये संजय दत्त की बायोपिक नहीं होगी. उन्होंने मुझे स्क्रिप्ट पढ़ने को कहा और मैंने जब फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी फिर तो सोने पर सुहागा. एक तो मुझे राजकुमार हिरानी के साथ काम करने का मौका मिला दूसरा संजय दत्त का रोल. मुझे लगता है कि ऐसा मौका जिंदगी में एक बार ही मिलता है.

-फिल्म में संजय दत्त का किरदार ड्रग एडिक्ट का है क्या आपको कुछ रिसर्च करना पड़ा था?

मैं इतना बड़ा मेथड़ एक्टर नहीं हूं कि किरदार जीने के लिए ड्रग लेने लगूं. वैसे निजी जिंदगी में मैंने एक बार ड्रग ट्राय किया है. जब मैं कॉलेज में था. जब आप गलत लोगों की संगत में पड़ते हैं तो गलतियां करते हैं, लेकिन फिर मैं तुरंत संभल गया और समझ गया कि मैं गलत कर रहा हूं. इस फिल्म में ड्रग्स पर काफी अच्छी बात सामने लायी गयी है जो यूथ के लिए एक संदेश है कि कुछ मिनट के मजे के लिए आप अपनी जिंदगी तबाह कर रहे हो.

-आपको कभी किसी चीज का एडिक्शन रहा है?

हां! बहुत सालों से मुझे सिगरेट का एडिक्शन था, लेकिन अब मैं उसे छोड़ चुका हूं. मिठाई मुझे बहुत पसंद है. मुझे लगता है कि उसका एडिक्शन बुरा नहीं है. जो लोग बुरी लत को पकड़े हुए हैं उन्हें भी मैं यही कहूंगा कि आपको अपने परेशानी खत्म करनी है तो आपको फैमिली और फ्रेंडस को अपनी परेशानी बतानी होगी.

-संजय दत्त और अपनी जिंदगी में आप क्या समानता पाते हैं?

हम दोनों ही एक्टर हैं और हमारे पिता भी एक्टर्स हैं और हम दोनों का ही अपने पिता से दोस्ती वाला रिश्ता नहीं है. प्यार है, लेकिन उसमें रिसपेक्ट और डर भी शामिल है. वैसे मेरे पिता मेरे कैरियर के शुरुआती दिनों में मेरे मैनेजर रहे हैं. मेरी वैल्यू उस वक्त एक रुपये की थी, लेकिन वो दस रुपये का काम मेरे लिए लाते थे.

-फिल्म के ट्रेलर में संजय अपनी गर्लफ्रेंडस का खुलासा करते हैं. क्या आप ऐसा कर पायेंगे?

संजय दत्त सर की तरह मुझमें इतना गट्स और कॉफिडेंस नहीं हैं कि मैं सबकुछ बता पाऊं. वैसे मेरी जिंदगी में गर्लफ्रेंड दस से कम रही हैं.

-कुछ समय से आपका नाम आलिया के साथ जोड़ा जा रहा है.

आलिया और अपने रिश्ते के बारे में बात करने को लेकर मैं राजी नहीं हूं. हां को-एक्टर के तौर वह बेहतरीन हैं.न्यू एनर्जी है.अपने काम के प्रति बहुत ही समर्पित और ईमानदार हैं. बहुत ही सर्पोटिव हैं. जिस तरह से वह अपने सीन में क्यूज देती हैं वैसे ही दूसरे एक्टर के सीन में भी देती हैं. उम्मीद करता हूं कि आॅनस्क्रीन हम बेहतरीन जोड़ी साबित हों.

-क्या आपको लगता है कि अगर आपके दादाजी जिंदा होते तो आपकी फिल्मों का चुनाव बेहतर कर पाते.

मैं अपने दादाजी को बहुत मिस करता हूं, लेकिन मैं अपनी फिल्मों का चुनाव खुद करता हूं क्योंकि जब मैं अपनी फिल्म और किरदार चुनता हूं तो उससे एक जुड़ाव महसूस करने के बाद ही चुनता हूं. अपने पिता के कहने पर मैं किसी फिल्म को हां कह दूं तो मैं उस फिल्म से जुड़ाव महसूस नहीं कर पाऊंगा. अपने दादाजी को मैं उनकी फिल्मों की वजह से ज्यादा जानता हूं. अगर मेरे दादाजी जिंदा होते तो मैं उन्हें अपने लिए फिल्म निर्देशित करने को कहता.

-क्या आपको लगता है कि राजकपूर की भी एक बायोपिक बननी चाहिए?

हां! बननी तो चाहिए, लेकिन मैं महसूस करता हूं कि उनकी जिंदगी में बहुत कुछ ऐसा था जो मेरे परिवार को दिखाना पसंद न आये. मैं एक बात जानता हूं. बायोपिक बननी चाहिए तो पूरी ईमानदारी से बननी चाहिए. उसे प्रोपेगेंडा फिल्म नहीं बननी चाहिए. इंसान हैं तो खामियां हैं. वहीं इंसान को इंसान बनाता है. अगर आप इंसान को भगवान दिखाना चाहेंगे तो फिर वह गलत होगा. ऑनेस्टी के साथ अगर मेरे दादाजी पर फिल्म बनेगी तो बहुत दिलचस्प कहानी होगी.

-मीडिया की निजी जिंदगी में दखलअंदाजी से क्या आपको गुस्सा आता है?

मैं गुस्सा नहीं करता हूं. मैंने न मार खाया है न किसी को मारा है. सिर्फ मेरी मां ने मुझे मारा है. मेरा वो स्वभाव ही नहीं है. आप कुछ भी कह सकते हैं. मैं आज जो कुछ भी हूं. उसमें मीडिया का भी हाथ है इसलिए वह चाहे तो मेरा मजाक भी बना सकते हैं मैं फिल्मों में काम कर रहा हूं. दुनिया बचाने नहीं निकला हूं. मैं बॉलीवुड को बदलना नहीं चाहता हूं. मुझे उसका हिस्सा बनना है. बस थोड़ा इंप्रूव करना चाहता हूं. पहले हमेशा सोचता था कि फिल्में हिट हो जाये, लेकिन अब मैं वो भी नहीं सोचता हूं.

-क्या आप आध्यात्मिक भी हैं?

बहुत लोग बोलते हैं कि मैं बहुत शांत हूं. नॉन अफेक्टेड हूं. मैं अपने घर की बालकनी से घंटों बाहर देख सकता हूं. बिना कुछ सोचे. इसे आप मेरा आलस भी कह सकते हैं, लेकिन मुझे यही चीज सुकून देती हैं. मैं मेडिटेशन नहीं करता हूं. हर कोई आध्यात्मिक है बस उनके अध्यात्म का तरीका अलग है.

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