जन्मदिन पर विशेष: बॉलीवुड के मशहूर गायक, संगीतकार और निर्देशक थे हेमंत कुमार

मुंबई: 50 के दशक का वह गाना ‘है अपना दिल तो आवारा ना जाने किस पे आएगा’ उस दौर का सबसे लोकप्रिय गाना था जिसे आज भी लोग याद करते हैं. इस गाने पर अभिनय मशहूर अभिनेता देवआनंद ने किया और गाने को आवाज दी उस दौर के मशहूर गायक,संगीत निर्देशक और संगीतकार हेमंत कुमार […]
मुंबई: 50 के दशक का वह गाना ‘है अपना दिल तो आवारा ना जाने किस पे आएगा’ उस दौर का सबसे लोकप्रिय गाना था जिसे आज भी लोग याद करते हैं. इस गाने पर अभिनय मशहूर अभिनेता देवआनंद ने किया और गाने को आवाज दी उस दौर के मशहूर गायक,संगीत निर्देशक और संगीतकार हेमंत कुमार ने. हेमंत कुमार ने गाना गाने की शुरुआत हिंदी से पहले बंगाली गानों से की थी. उन्होंने अपने जीवन काल में लगभग 2000 गाने गाये.
हेमंत कुमार का जन्म 16 जून 1920 को बनारस (वाराणसी) में हुआ था हालांकि उसका परिवार मूल रूप से पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखता था. हेमंत कुमार ने जादवपुर विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी लेकिन कहते हैं ना कि आपकी किस्मत में जो होता है वही आपको मिलता है. हेमंत कुमार की किस्मत में संगीतकार बनना ही लिखा था. संगीत में हेमंत कुमार की रूचि बचपन से ही थी. महज केवल 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने 1933 में अखिल भारतीय रेडियो में अपना पहला गीत गाया था.
उन्होंने प्लेबैक गायक के रूप में करियर की शुरुआत बंगाली फिल्म "नीमा सान्यास से किया गया था.इसके बाद उन्होंने कई अन्य बंगाली फिल्मों के लिए प्लेबैक किया था.बॉलीवुड में उन्होंने अपनी आवाज फिल्म इरादा में दिया था. उन्हें ख्याति 50 और 60 के दशक के दौरान मिली. 1955 में उन्होंने सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता, फिल्म थी ‘नागिन’.
फिल्म नागिन का गाना ‘मन डोले मेरा तन डोले’ हेमंत कुमार द्वारा कंपोज किया गया वही गाना था जिसकी बदौलत हेमंत कुमार को एक संगीत निर्देशक के रूप में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई थी. इस गाने एक दिलचस्प वाक्या जुड़ा हुआ है, इस गाने को आवाज लता मंगेशकर ने दी थी. इस गाने की रिकार्डिंग के दौरान लता ने कहा था कि यह गाना नहीं चलेगा पर इसके विपरीत यह गाना उस दौर में काफी लोकप्रिय हुआ था. 1950 के दशक में, हेमंत कुमार ने विविध कलात्मक जीवन जीया था. बंगाल में उन्हें रवींद्र संगीत के एक प्रमुख अंग के रूप में जाना जाता था. उस दौर में हेमंत एक सफल प्लेबैक गायक के रूप में जाने जाते थे और दूसरों के लिए वह एक संगीत निर्देशक भी थे. हालांकि यह पहचान उसके लिए पर्याप्त नहीं था,उन्होंने अपने जीवन में इसके अलावा कुछ और भी करना था. इसके बाद उन्होंने अपना रुख फिल्म निर्माण की ओर किया. जिसके लिए उन्होंने हेमाता-बेला के नाम से एक फिल्म कंपनी की स्थापना भी की थी जिसका पहला उत्पादन बंगाली ‘नील अक्षर नीचा’ (1959)था. बाद में इस फिल्म कंपनी का नाम बदलकर गीतांजलि प्रोडक्शंस रखा गया,इस बैनर के तहत, ‘बीस साल बाद’ और ‘खामोशी‘ जैसी फिल्मों को रिलीज किया गया था.
70 के दशक के दौरान गीतांजलि प्रोडक्शंस को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था. जिसके बाद हेमंत दा ने अपना रुख वापस बंबई से कोलकाता की ओर कर लिया था.1989 को दिल के दौरे के कारण उनकी मौत हो गई थी. भले ही उन्होंने यह दुनिया छोड़ दी है पर आज भी वह अपने संगीत के माध्यम से लोगों के बीच जिंदा हैं. उनकी विरासत अभी भी उनके द्वारा गाये गीतों, उनके द्वारा बनाई गई संगीतों और उन कई पुरुष गायकों के माध्यम से जीवित है जो अपनी गायन शैली में उनका अनुकरण करते हैं. हेमंत कुमार संगीत की दुनिया के उन हस्तियों में से हैं जिन्हें संगीत जगत में हमेशा याद किया जाता रहेगा.
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