नीरजा भनोट का जन्मदिन है आज : याद करें उस बेटी को जिसकी बहादुरी के चर्चे आज भी जिंदा हैं!
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Sep 2017 5:26 PM
7 सितंबर 1964 को चंडीगढ़ में जन्मीं नीरजा भनोट का बचपन भी आम लड़कियों की तरह ही बीता था. पत्रकार पिता और गृहिणी मां की लाडली नीरजा खूबसूरत थी, चुलबुली थी और इन सब से बढ़कर वह बहुत हिम्मती थी. यह नीरजा भनोट की हिम्मत ही थी, जिसके बलबूते उसने मात्र 23 साल की उम्र […]
7 सितंबर 1964 को चंडीगढ़ में जन्मीं नीरजा भनोट का बचपन भी आम लड़कियों की तरह ही बीता था. पत्रकार पिता और गृहिणी मां की लाडली नीरजा खूबसूरत थी, चुलबुली थी और इन सब से बढ़कर वह बहुत हिम्मती थी.
यह नीरजा भनोट की हिम्मत ही थी, जिसके बलबूते उसने मात्र 23 साल की उम्र में वह कर गयी कि उसके प्रभाव में सिर्फ भारत ही नहीं, अमेरिका और पाकिस्तान ने भी साल 1986 का वीरता पुरस्कार उसको समर्पित कर दिया था.
5 सितंबर 1986 को पैन अमेरिका 73 एयरलाइंस का प्लेन कराची एयरपोर्ट से हाईजैक हो जाने के बाद उस विमान की एयर होस्टेस नीरजा भनोट ने 17 घंटे तक आतंकियों से जूझते हुए 359 लोगों की जान बचायी, लेकिन इस जंग में वह अपनी जान गंवा बैठी थी.
नीरजा के बलिदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘अशोक चक्र’ प्रदान किया, तो वहीं पाकिस्तान की सरकार ने नीरजा को ‘तमगा-ए-इन्सानियत’ से नवाजा.
आइए जानें भारत की इस बहादुर बेटी के जीवन-सफर को –
- नीरजा भनोट का जन्म 7 सितंबर 1964 को चंडीगढ़ में हुआ था.
- उनके पिता का नाम हरीश भनोट और मां का नाम रमा भनोट था.
- नीरजा का बचपन मुंबई में बीता. स्कूली शिक्षा बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से हुई और सेंट जेवियर्स कॉलेज से ग्रैजुएशन की डिग्री ली.
- नीरजा भनोट की शादी 1985 में हो गयी थी, लेकिन दहेज के दबाव के कारण उनके रिश्तों में खटास आ गयी. वह शादी के दो महीने बाद मुंबई लौट आयी थीं.
- 1986 में मॉडल के रूप में उन्होंने टीवी और प्रिंट विज्ञापन करने शुरू कर दिये. इनमें बिनाका टूथपेस्ट, विको टरमरिक क्रीम, गोदरेज सोप जैसे ब्रांड्स शामिल थे.
- नीरजा को बचपन से हवा में उड़ने का शौक था. अपने इस शौक को पूरा करने के लिए नीरजा ने एयर होस्टेस के तौर पर बाद में पैन एम 73 एयरलाइंस जॉइन कर लिया.
ऐसे बनी हीरोइन ऑफ हाइजैक –
- 5 सितंबर 1986 को अमेरिकी एयरवेज का हवाई जहाज पैन एम 73 लगभग 380 यात्रियों के साथ पाकिस्तान के कराची एयरपोर्ट पर पायलट का इंतजार कर रहा था. अचानक उसमें चार हथियारबंद आतंकवादी घुस गये और सभी यात्रियों को गन पॉइंट पर अपने कब्जे में ले लिया.
- आतंकियों ने पाक सरकार से पायलट भेजने की मांग की, ताकि वो विमान को अपने मन मुताबिक जगह पर ले जा सकें. लेकिन पाक सरकार ने मना कर दिया. इससे गुस्साये आतंकियों ने विमान में बैठे यात्रियों को मारने का फैसला कर लिया.
- फ्लाइट अटेंडेंट नीरजा भनोट ने ऐसा नहीं होने दिया. उन्होंने अपनी सूझबूझ और हिम्मत दिखाते हुए फ्लाइट पर सवार 359 लोगों को तो बचा लिया, लेकिन 20 लोग और खुद नीरजा भी आतंकियों की गोली का शिकार हो गयी.
- यह काफी दुखद रहा कि इस घटना के दो दिन बाद, यानी 7 सितंबर 1986 को नीरजा अपना 23वां जन्मदिन मनाने वाली थीं.
बहादुरी को सलाम –
- नीरजा को भारत सरकार ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘अशोक चक्र’ प्रदान किया और पाकिस्तान की सरकार ने उन्हें ‘तमगा-ए-इन्सानियत’ से नवाजा.
- नीरजा भनोट के नाम पर हर साल ब्रेवरी अवार्ड भी दिया जाता है.
- नीरजा भनोट के बलिदान को सलाम करते हुए बॉलीवुड में एक फिल्म ‘नीरजा’ बनायी गयी. इसमें नीरजा का किरदार सोनम कपूर ने निभाया. इस फिल्म को बनाने में फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारों सहित लगभग 200 कलाकारों ने सहयोग दिया.
- ‘नीरजा’ ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीता. आईफा 2017 में बेस्ट मूवी का अवार्ड भी इसे मिला.
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