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भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री बढ़ रही है शून्यता की ओर, एक दिन होगा अचानक परिवर्तन, पढ़ें किसने कहा

Updated at : 27 Oct 2018 10:43 AM (IST)
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भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री बढ़ रही है शून्यता की ओर, एक दिन होगा अचानक परिवर्तन, पढ़ें किसने कहा

प्रभात खबर कार्यालय पहुंची बॉलीवुड हस्तियांजमशेदपुर : शुक्रवार की शाम को काशीडीह स्थित प्रभात खबर कार्यालय पहुंचे बॉलीवुड हस्तियों – अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा व आदित्य श्रीवास्तव, निर्देशक पवन शर्मा और राजेश जैश ने मीडियाकर्मियों से रोचक और आत्मीय बातचीत की. सिनेमा, टीवी और थियेटर संबंधी मुद्दों पर विस्तृत बातचीत की. अपने अनुभव साझा करते हुए […]

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प्रभात खबर कार्यालय पहुंची बॉलीवुड हस्तियां
जमशेदपुर : शुक्रवार की शाम को काशीडीह स्थित प्रभात खबर कार्यालय पहुंचे बॉलीवुड हस्तियों – अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा व आदित्य श्रीवास्तव, निर्देशक पवन शर्मा और राजेश जैश ने मीडियाकर्मियों से रोचक और आत्मीय बातचीत की. सिनेमा, टीवी और थियेटर संबंधी मुद्दों पर विस्तृत बातचीत की. अपने अनुभव साझा करते हुए अखिलेंद्र मिश्रा ने कहा कि थियेटर ऐसी खेती है जिसकी फसल कलाकार फिल्मों व टीवी के लिए काम करते हुए काटते हैं. यानि, थियेटर में जो कमाते हैं उसे ही फिल्मों में खर्च करते हैं.

गानों में छुप जाती है कहानी : बिहार से ताल्लुक रखने वाले जाने-माने अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा ने एक सवाल के जवाब में भोजपुरी फिल्मों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पास भोजपुरी फिल्मों के कई ऑफर आते हैं, लेकिन अच्छी स्क्रिप्ट के अभाव में वे इस ऑफर को ठुकरा देते हैं. उन्होंने कहा कि दरसअल यह दौर भोजपुरी फिल्मों में सिंगर एक्टर का है. गायक ही हीरो है. इन फिल्मों में गानों की इतनी भरमार होती है कि कहानी का स्काेप ही नहीं बचता. आज अधिकांश भोजपुरी फिल्में या तो हिंदी या दक्षिण भारतीय फिल्मों की कॉपी बन रही है. ऐसी फिल्मों का लगातार अभाव होता जा रहा जिसे आप परिवार के साथ बैठकर देख पायें. हालांकि देसवा व नचनिया जैसी कुछेक अच्छी फिल्में भी बन रही हैं. उन्होंने कहा कि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री शून्यता की ओर बढ़ रही है. यहां एक दिन अचानक परिवर्तन आयेगा.

पाश्चात्य संगीत हावी होता जा रहा : हाल में ही रिलीज हुई फिल्म ‘काशी’ के एक्टर अखिलेंद्र मिश्रा ने कहा कि हमारी युवा पीढ़ी पाश्चात्य संगीत (वेस्टर्न म्यूजिक) से काफी प्रभावित है. इस संगीत में भारतीय शास्त्रीय संगीत वाली बात नहीं. पुरानी फिल्मों के गीतों को याद करते हुए कहा कि आज के गाने ज्यादा दिन तक याद नहीं रहते. पुराने गानों के बोल व संगीत की बात ही कुछ और है. संगीत की महत्ता बताते हुए कहा कि यह एक तरह से चिकित्सा भी है. शरीर में 72 नाड़ी है और संगीत के 72 राग हैं. संगीत का हमारे मन-मस्तिष्क पर गहरा असर होता है. गलत म्यूजिक सुनने से डिप्रेशन हो सकता है. यही वजह है वेस्टर्न कंट्री के अधिकांश पॉप व जैज सिंगर नशा करने के आदी हो जाते हैं.

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