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''तारक मेहता...'' की इस एक्‍ट्रेस की पहाड़ों पर हुई ऐसी हालत, दो दिन में ही लौटना पड़ा...सुनाई आपबीती

Updated at : 13 Jul 2019 9:36 AM (IST)
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''तारक मेहता...'' की इस एक्‍ट्रेस की पहाड़ों पर हुई ऐसी हालत, दो दिन में ही लौटना पड़ा...सुनाई आपबीती

‘तारक मे‍‍हता का उलटा चश्‍मा’ (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) टीवी शो लगातार टीआरपी की लिस्‍ट में हमेशा टॉप पर बना रहता है. इस बार शो चौथे पायदान पर है. इस शो का दर्शकों के बीच काफी क्रेज है. इस शो में दयाबेन से लेकर जेठालाल तक हर किरदार को बेहद पसंद किया जाता है. […]

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‘तारक मे‍‍हता का उलटा चश्‍मा’ (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) टीवी शो लगातार टीआरपी की लिस्‍ट में हमेशा टॉप पर बना रहता है. इस बार शो चौथे पायदान पर है. इस शो का दर्शकों के बीच काफी क्रेज है. इस शो में दयाबेन से लेकर जेठालाल तक हर किरदार को बेहद पसंद किया जाता है. ‘तारक मेहता’ में बबीता जी का रोल प्‍ले करनेवाली अभिनेत्री मुनमुन दत्‍ता हाल ही में घूमने गई थीं लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि आनन-फानन में वापस लौट आईं. दरअसल वे तंजानिया में किलिमंजारो पहाड़ पर ट्रैकिंग के लिए गई थीं.

मुनमुन ने खुद इंस्‍टाग्राम पर इस बात का खुलासा किया है. उन्‍होंने सोशल मीडिया पर ट्रिप की कुछ तसवीरें शेयर करते हुए आपबीती बताई. उन्‍होंने लिखा,’ पहाड़ पर जब चढ़ाई शुरू की पूरा यकीन था कि शारीरीक और मानसिक तौर पर अपने ग्रुप की सबसे ताकतवर सदस्‍य हूं.’

https://www.instagram.com/p/BzXr3X4B0DT/

उन्‍होंने आगे लिखा,’ बहुत सी चीजें ऐसी है जिसकी तैयारी आप कभी नहीं कर सकते. चढ़ाई शुरू होने के दो दिन बाद ही वापस लौटना पड़ा जिसकी वजह क्लौस्ट्रफ़ोबिया है. (क्लौस्ट्रफोबिया का मतलब है कि किसी खास जगह पर डर महसूस करना).’

अभिनेत्री ने बताया,’ क्लौस्ट्रफ़ोबिया मेरे लिए गंभीर मामला है जिसे मैंने चढ़ाई करने से पहले नहीं गिना था. लेकिन पहाड़ ने मुझे सिखाया. पहाड़ पर गहरा अंधेरा मुझे गंभीर रूप से परेशान कर रहा था. इसके बाद धड़कन तेज हो गई और कल रात को मैं अपने तम्बू के बाहर लगभग बेहोश हो गई. फिर मैंने इस अभियान से बाहर निकलने का फैसला किया.’

https://www.instagram.com/p/Bzki2iZB7IA/

उन्‍होंने अपनी टीम को धन्‍यवाद करते हुए लिखा,’ मौत के अनुभव से मुझे बचाने के लिए @kiliwarriors की टीम को धन्‍यवाद कहने के लिए मेरे पास पर्याप्त शब्‍द नहीं है. पोर्टर्स, गाइड्स सभी ने बैग पैक करने में मदद की, मेरे साथ अंधेरे में 5 घंटे ठंड में 1 घंटा पैदल चलकर मुझे ऐसी पहाड़ से नीने एक ऐसी जगह लेकर आये जहाँ कार आकर मुझे ले जा सके.’

उन्‍होंने लिखा,’ किसी दिन जब मैं अपने क्लस्ट्रोफोबिया से निपटना सीख जाउंगी तो मैं मैं KILIMANJARO पर वापस आऊंगी लेकिन @kiliwarriors की टीम के बिना नहीं.

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