#InternationalWomensDay: पद्म पुरस्कार लाकर इन्होंने बढ़ाया बिहार का मान
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Mar 2019 10:30 AM
पद्म पुरस्कारों को हासिल करने में बिहारी महिलाएं काफी आगे हैं. पद्मभूषण से लेकर पद्मश्री पाने वाली ज्यादातर महिलाएं कलाकार रही हैं, किसी ने पेंटिंग, किसी ने गायकी में लोहा मनवाया है तो किसी ने कृषि और समाजसेवा में मुकाम हासिल किया है. पद्मभूषण शारदा सिन्हा: मैथिली, भोजपुरी व मगही की मशहूर गायिका शारदा सिन्हा […]
पद्म पुरस्कारों को हासिल करने में बिहारी महिलाएं काफी आगे हैं. पद्मभूषण से लेकर पद्मश्री पाने वाली ज्यादातर महिलाएं कलाकार रही हैं, किसी ने पेंटिंग, किसी ने गायकी में लोहा मनवाया है तो किसी ने कृषि और समाजसेवा में मुकाम हासिल किया है.
पद्मभूषण शारदा सिन्हा: मैथिली, भोजपुरी व मगही की मशहूर गायिका शारदा सिन्हा को 2018 में ही कला व संगीत क्षेत्र में पद्मभूषण सम्मान से नवाजा गया था. शारदा सिन्हा ने मैथिली, बज्जिका, भोजपुरी के अलावा हिंदी गीत भी गाये हैं. फिल्म मैंने प्यार किया तथा हम आपके हैं कौन जैसी फिल्मों में इनके गाये गीत काफी लोकप्रिय रहे हैं. वहीं दुल्हिन, पीरितिया, मेंहदी जैसे गानों के इनके एलबम भी काफी मशहूर रहे हैं. बिहार से बाहर भी शारदा सिन्हा के गाये गीत अक्सर सुनायी देते हैं.
पद्मश्री उषा किरण खान : हिंदी और मैथिली की जानी-मानी लेखिका और पद्मश्री से सम्मानित डॉ उषा किरण खान पद्मश्री सम्मान के लिए चुनी गयी थीं. उन्होंने कहा था कि पुरस्कार से रचनात्मकता पर कोई असर नहीं पड़ता. साहित्यकार तो बस अपनी धुन में लिखते चले जाते हैं. उषा जी कहती हैं कि लिखने की रुचि बचपन से थी. बाद में बाबा नागार्जुन ने उत्साहित किया. उन्होंने कहा, तुम अच्छा लिखती हो. इसके बाद मैं कविताएं लिखने लगी. बाबा के साथ कई स्थानों पर जाकर कविता पाठ करने का मौका भी मिला.
पद्मश्री भागीरथी देवी : इसी बरस भाजपा विधायक भागीरथी देवी को समाज सेवा के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है. नरकटियागंज प्रखंड में संघर्षरत भागीरथी देवी रामनगर से चार बार विधायक रही हैं और क्षेत्र में उनकी पहचान उनके अच्छे कार्यों के चलते हैं. भागीरथी देवी ने लड़कियों की शिक्षा के लिए कई काम किये हैं. अपने ही घर में उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र खोलने की अनुमति दी.
पद्मश्री बौआ देवी : मधुबनी के जितवारपुर गांव की बौआ देवी लगभग साठ वर्षों से भी अधिक समय से मिथिला पेंटिंग से जुड़ी हुई हैं. इनको 1985-86 में नेशनल अवार्ड मिल चुका है. वह मिथिला म्यूजियम जापान 11 बार जा चुकीं हैं. इसके अलावा फ्रांस, जर्मनी, बार्सिलोना सहित कई अन्य देशों में भी जाकर कला का परचम लहराया है. बौआ देवी करीब तेरह वर्ष की उम्र से ही मिथिला पेंटिंग बना रही हैं.
राजकुमारी देवी उर्फ “किसान चाची” : पद्मश्री राजकुमारी देवी पूरे देश में किसान चाची के नाम से मशहूर हैं. आधुनिक तकनीक से खेती करने से लेकर, घर में ही अचार-मुरब्बा बनाकर साइकिल से बाजार में बेचने तक का काम किया. बिहार सरकार ने भी इन्हें किसानश्री सम्मान से सम्मानित किया है. एक समय साइकिल से अपने उत्पादों को बेचने के लिए तिरस्कार झेल चुकी किसान चाची अब अपने उत्पाद निर्यात भी कर रही हैं.
पद्मश्री गोदावरी दत्ता : मिथिला पेंटर गोदावरी दत्ता कहती हैं कि कभी सोचा ही नहीं कि मुझे पद्म सम्मान भी मिलेगा. बस एक ही धुन थी कि कैसे मिथिला पेंटिंग के लिए बेहतर से बेहतर करना है. मैं बस लगातार अपने काम को करने में लगी रही. उन्होंने कहा कि मिथिला पेंटिंग महज एक पेंटिंग नहीं है. एक साधना करने के जैसा है.
इनके अलावा स्व जगदंबा देवी को 1975 में, स्व सीता देवी को 1981 में, स्व गंगा देवी को 1984 में, स्व महासुंदरी देवी को 2011 में पद्मश्री मिल चुका है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










