IAS Namami Bansal Success Story: कई घरों में रोजी रोटी की चिंता बच्चों के सपनों को छोटा कर देती है. लेकिन ऋषिकेश की नमामि बंसल ने हालात के आगे झुकने के बजाय उनसे टकराने का फैसला किया. जिस घर में पिता बर्तन बेचकर परिवार चलाते थे, उसी घर से एक दिन IAS बनने का सपना निकला. उत्तराखंड के ऋषिकेश से निकलकर ऑल इंडिया रैंक 17 हासिल करना उनके संघर्ष और मेहनत की सच्ची कहानी बयां करता है.
IAS Namami Bansal Success Story: कौन हैं नमामि बंसल?
नमामि बंसल का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ. उनके पिता बर्तन बेचने का काम करते थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी. इसके बावजूद घर में पढ़ाई को हमेशा सबसे ज्यादा अहमियत दी गई. नमामि के माता पिता ने कभी हालात को उनकी उड़ान के बीच नहीं आने दिया. परिवार पर बोझ न बनते हुए नमामि ने खुद को आगे बढ़ाने का फैसला किया.
पढ़ाई में काफी तेज
नमामि बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज थीं. उन्होंने कक्षा 10वीं में 92.4 प्रतिशत और इंटरमीडिएट में 94.8 प्रतिशत अंक हासिल किए. इसके बाद उन्होंने दिल्ली जाकर लेडी श्रीराम कॉलेज से इकोनॉमिक्स ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया. पढ़ाई के प्रति उनका समर्पण यहीं नहीं रुका. उन्होंने ओपन यूनिवर्सिटी से एमए इकोनॉमिक्स किया और वहां टॉपर रहीं. उनकी मेहनत का नतीजा यह रहा कि उन्हें राज्यपाल द्वारा गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया.
UPSC का सपना
एमए पूरा करने के बाद नमामि ने अपने बचपन के सपने UPSC की तैयारी शुरू की. पढ़ाई में हमेशा टॉपर रहने के बावजूद UPSC की राह आसान नहीं थी. उन्हें लगातार तीन बार असफलता का सामना करना पड़ा. कई बार मन टूटने की स्थिति आई, लेकिन उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया. बिना कोचिंग के उन्होंने सेल्फ स्टडी पर भरोसा रखा और अपनी गलतियों से सीखते हुए तैयारी को और मजबूत किया.
अनुशासन और आत्मविश्वास का नतीजा आखिरकार सामने आया. UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2017 में नमामि बंसल ने ऑल इंडिया रैंक 17 हासिल कर ली. उनका नाम देश के टॉप IAS अधिकारियों में शामिल हो गया. नमामि सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और छात्रों को मोटिवेट करती हैं.
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