बीमारी को दी मात, मोबाइल से पढ़कर MP के आयुष ने निकाला UPSC

Author Smita dey
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आयुष स्वामी UPSC AIR 461 (Social Media)

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Aayush Swami AIR 461: कभी बीमारी के कारण सालभर अस्पताल में रहे, फिर पैसों की तंगी के बीच मोबाइल से पढ़ाई कर MP के आयुष स्वामी ने क्रैक किया UPSC. हासिल किया ऑल इंडिया रैंक 461. जानें आयुष स्वामी की यूपीएससी की सफलता की कहानी.

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Aayush Swami AIR 461: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है. हर साल लाखों युवा एग्जाम देते हैं, लेकिन सफलता सिर्फ उन्हीं को मिलती है जो मुश्किल हालातों में भी हार नहीं मानते. ऐसी ही एक कहानी मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव के रहने वाले आयुष स्वामी (Aayush Swami AIR 461) की है.

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आयुष ने तमाम दिक्कतों, बीमारी और असफलताओं को पीछे छोड़ते हुए यूपीएससी परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 461 हासिल की है. उनकी यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. आइए जानते हैं कि आयुष ने यूपीएससी में सफलता कैसे हासिल किया.

Aayush Swami AIR 461: एक सरकारी टीचर के बेटे का बड़ा सपना

आयुष स्वामी मध्य प्रदेश के बैंडखेड़ी नाम के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले हैं. उनके पिता एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के टीचर हैं और मां हाउसवाइफ हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद आयुष के सपने हमेशा से बड़े थे. 12वीं में उन्होंने साइंस (PCM) की पढ़ाई की थी.

लेकिन, उनका लक्ष्य बिल्कुल साफ था कि उन्हें देश और समाज की सेवा करनी है. इसलिए, सिविल सर्विसेज की तैयारी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी स्ट्रीम बदल ली और सोहागपुर से बीए (Bachelor of Arts) की पढ़ाई पूरी की.

जब बीमारी ने बदल दिया जिंदगी को देखने का नजरिया

जब आयुष 10वीं क्लास में थे, तब एक गलत दवाई के रिएक्शन की वजह से उनकी तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई. हालात इतने खराब थे कि उन्हें लगभग पूरा साल भोपाल के एक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा. ठीक होने के बाद उनके पास बोर्ड परीक्षा के लिए सिर्फ एक महीना बचा था. उन्होंने अपने दम पर 10वीं में 88% मार्क्स हासिल किए.

मोबाइल फोन से की पढ़ाई, स्कॉलरशिप ने दिया सहारा

यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली जाना आयुष के परिवार के लिए आर्थिक रूप से मुमकिन नहीं था. ऐसे में उन्होंने एक स्कॉलरशिप एग्जाम पास किया, जिससे उन्हें इंदौर में मुफ्त कोचिंग मिल गई. लेकिन तभी कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन लग गया.

आयुष को वापस अपने गांव लौटना पड़ा. उन्होंने हार मानने के बजाय अपने मोबाइल फोन, गूगल सर्च और ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग करके करीब दो साल तक घर पर ही पढ़ाई की. इस दौरान उनके छोटे भाई ने भी नौकरी और पढ़ाई को बैलेंस करते हुए आयुष का पूरा साथ दिया.

इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद प्रीलिम्स में फेल होना

आयुष की UPSC की जर्नी आसान नहीं थी. अपने पहले ही प्रयास में वह इंटरव्यू राउंड तक पहुंच गए और उन्होंने 175 मार्क्स स्कोर किए, लेकिन अंतिम लिस्ट में जगह बनाने से सिर्फ 9 से 10 नंबर से चूक गए. इसके बाद दूसरे प्रयास में वह प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर पाए.

एक साल इंटरव्यू देना और अगले ही साल प्रीलिम्स में फेल हो जाना किसी भी छात्र को तोड़ सकता है. लेकिन आयुष ने इसे एक मौके की तरह लिया. उन्होंने पूरे एक साल अपनी कमियों को सुधारा, नोट्स बेहतर किए और मॉक टेस्ट दिए. फिर उन्होंने (Aayush Swami AIR 461) यूपीएससी 2025 में  AIR 461 हासिल की.

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