बिहार का पड़ोसी जिला जिसकी सीमाएं 3 राज्यों और 2 देशों से लगती हैं, जानते ही Google Map में खोजने लगेंगे नाम

Published by : Ravi Mallick Updated At : 21 Oct 2025 1:53 PM

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General Knowledge: बैकग्राउंड में दार्जिलिंग के नजारे और एक टूरिस्ट की सांकेतिक तस्वीर (Image Freepik)

General Knowledge: भारत के हर राज्य, हर शहर की अपनी एक अलग पहचान है. यही वजह है कि भूगोल के सवाल प्रतियोगिता परीक्षाओं में जरूर पूछे जाते हैं. ऐसे में यहां भारत के एक अनोखे जिले के बारे में जानेंगे जिसकी सीमाएं 3 राज्यों और 2 देशों से सीमाएं लगती हैं.

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General Knowledge: प्रतियोगिता परीक्षाओं में करेंट अफेयर्स और जनरल नॉलेज सेक्शन में भूगोल के सवाल जरूर होते हैं. ऐसे में जीके के ट्रिकी सवालों (General Knowledge Tricky Questions) की तैयारी के लिए यहां एक मजेदार टॉपिक के बारे में विस्तार से जानेंगे. भारत में एक अनोखा जिला ऐसा है जिसकी सीमाएं 2 देशों और 3 राज्यों से लगती हैं. खास बात ये है कि यह जिला बिहार का पड़ोसी है और अपने खूबसूरत नजारों के लिए मशहूर है.

General Knowledge on Geography: 3 राज्यों और 2 देशों से लगती हैं सीमाएं

पश्चिम बंगाल में महानंदा नदी के तट पर स्थित दार्जिलिंग जिला अपनी खूबसूरत नजरों के लिए मशहूर है. यह भारत के टॉप टूरिस्ट प्लेस में से एक है. यहां दूर-दूर से लोग छुट्टियां मनाने आते हैं. इस जिले की समाएं बहुत रोचक हैं. आप Google Map में भी इसकी सीमाओं को विस्तार से देख सकते हैं.

दो देशों से लगती हैं सीमाएं

दार्जिलिंग जिला दो देशों से अपनी सीमाएं साझा करता है. दक्षिणी हिस्से में दार्जिलिंग की सीमा बांग्लादेश से लगती है, जबकि उत्तर-पश्चिम दिशा में यह नेपाल के साथ अपनी सीमा साझा करता है. नेपाल से इसकी करीब 100 किलोमीटर लंबी साझा सीमा है, जिससे यह क्षेत्र सामरिक और सांस्कृतिक रूप से भी काफी अहम बन जाता है.

उत्तर में सिक्किम दक्षिण में पश्चिम बंगाल

दार्जिलिंग के उत्तर में सिक्किम राज्य की सीमा लगती है. यहां यह सिक्किम के पश्चिमी और दक्षिणी जिलों से जुड़ा हुआ है. दूसरी ओर, दक्षिण-पूर्व दिशा में दार्जिलिंग की सीमा पश्चिम बंगाल के ही दूसरे हिस्सों से मिलती है, क्योंकि यह जिला खुद भी पश्चिम बंगाल राज्य का एक अहम भाग है.

बिहार का पड़ोसी

दार्जिलिंग जिला बिहार राज्य से भी जुड़ा हुआ है. बिहार का किशनगंज जिला इसके साथ लंबी सीमा साझा करता है. दोनों इलाकों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध भी मजबूत हैं. ऐसे में दार्जिलिंग उन चुनिंदा जिलों में शामिल करती हैं जो दो पड़ोसी देशों और कई राज्यों से जुड़े हुए हैं.

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दार्जिलिंग का दूसरा नाम क्या है?

दार्जिलिंग को पहले “दोर्जे-लिंग” कहा जाता था, जिसका मतलब होता है “वज्र का स्थान”. यह नाम लेप्चा जनजाति के लोगों ने रखा था, जो इस इलाके के मूल निवासी थे. बाद में ब्रिटिश शासन के दौरान इसका नाम दार्जिलिंग रखा गया और यह हिल स्टेशन के रूप में प्रसिद्ध हुआ.

दार्जिलिंग की सबसे फेमस चीज क्या है?

दार्जिलिंग अपनी खूबसूरत वादियों, सूर्योदय के मनमोहक नजारों और कंचनजंगा पर्वत के दृश्य के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. खासतौर पर टाइगर हिल का सूर्योदय देखने हजारों पर्यटक हर साल यहां आते हैं. यह जगह अपने प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के लिए मशहूर है.

दार्जिलिंग का मुख्य व्यवसाय क्या है?

दार्जिलिंग की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से चाय बागानों, खेती, बागवानी और वनों पर निर्भर करती है. यहां की चाय विश्वभर में अपनी खास खुशबू और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. 1000 से 2000 मीटर की ऊंचाई तक फैले चाय बागान इस इलाके की पहचान बन चुके हैं और स्थानीय लोगों की आजीविका का मुख्य स्रोत हैं.

दार्जिलिंग घूमने में कितना समय लगता है?

दार्जिलिंग की सैर के लिए आमतौर पर 3 से 4 दिन काफी होते हैं, जिनमें आप प्रमुख दर्शनीय स्थल देख सकते हैं. अगर आप आराम से घूमना चाहते हैं या पास के इलाकों जैसे मिरिक या कालिम्पोंग भी देखना चाहते हैं, तो 5 दिन का ट्रिप प्लान करना सबसे अच्छा रहेगा.

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लेखक के बारे में

By Ravi Mallick

रवि मल्लिक, प्रभात खबर डिजिटल में सीनियर कंटेट राइटर हैं. सर्वविद्या की राजधानी कहे जाने वाले वाराणसी के रहने वाले हैं. यहीं से पढ़ाई की शुरुआत हुई. भारतेंदु हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज से स्कूलिंग खत्म करने के बाद महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन पूरा किया. इसके बाद पत्रकारिता की ओर दिलचस्पी जगी और आगे की पढ़ाई के लिए लखनऊ चले गए. स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान लखनऊ में रहकर 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और साल 2019 के लोकसभा चुनाव को करीब से देखा और एक लोकर वेबसाइट के साथ काम किया. डिजिटल युग में पत्रकारिता की शुरुआत होने के चलते रवि मल्लिक Digital News को अच्छे से समझते भी हैं और उसे तराशना भी जानते हैं. पॉलिटिक्स, क्राइम और बिग ब्रेकिंग खबरों पर हाथ साफ करने के बाद साल 2019 में रवि की रुचि एजुकेशन न्यूज की ओर हुई. अमर उजाला के सफलता प्लेटफॉर्म से उन्होंने एजुकेशन की खबरों पर काम करना शुरू किया. एजुकेशन न्यूज पर काम शुरू करने के साथ-साथ रवि के करियर की गाड़ी भी आगे चली. साल 2020 में उन्होंने TV9 भारतवर्ष डिजिटल ज्वाइन किया और इस संस्थान में Career कैटेगरी की शुरुआत की. यहां करियर कैटेगरी पर काम करते हुए 3 साल पूरे कर लिए. साल 2024 में रवि मल्लिक Times Network के टाइम्सनाउ हिंदी के एजुकेशन टीम के साथ जुड़े. जॉब, स्कूली शिक्षा, बोर्ड परीक्षा और रिजल्ट की खबरों पर काम करते हुए एक साल पूरा किया. साल 2025 से रवि प्रभात खबर डिजिटल की यंग और एनर्जेटिक टीम के साथ जुड़े हैं. रवि युवाओं को बेहतर करियर ऑप्शन, करेंट अफेयर्स और नई वैकेंसी के बारे में बताना पसंद करते हैं. बोर्ड परीक्षा हो या UPSC, JEE, CUET और NEET जैसे कॉम्पिटेटिव एग्जाम इनके लिए स्मार्ट टिप्स तैयार करना अच्छा लगता है. एग्जाम टॉपर्स से बात करना और उनकी स्ट्रेटजी के बारे में छात्रों को बताना पसंद है. कॉलेजों के बारे में डिटेल्स में बताना हो या किसी कोर्स की पूरी जानकारी रवि अच्छे से समझा सकते हैं. एजुकेशन न्यूज पर 7 साल का अनुभव रखने वाले रवि मल्लिक के लिए युवाओं को प्रेरित करना, उनके बीच के मुद्दों को उठाना, सही व सटीक जानकारी देना ही प्राथमिकता रही है.

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